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हिंदी भाषा शिक्षण और व्याकरण के अंतर्गत 'वाक्य संरचना' (Syntax) तथा 'अर्थ के आधार पर वाक्य के भेदों' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अर्थ के आधार पर वाक्य के कुल आठ भेद होते हैं, जिनमें 'विधानवाचक वाक्य', 'निषेधवाचक वाक्य', 'प्रश्नवाचक वाक्य', 'आज्ञावाचक वाक्य', 'इच्छावाचक वाक्य', 'संदिग्धवाचक वाक्य', 'संकेतवाचक वाक्य' और 'विस्मयादिबोधक वाक्य' शामिल हैं।
  2. 2. 'इच्छावाचक वाक्य' वे वाक्य होते हैं जिनसे वक्ता की किसी प्रकार की शुभकामना, आशीर्वाद या इच्छा का बोध होता है, जैसे: "भगवान तुम्हें लंबी आयु दे!"।
  3. 3. रचना या बनावट के आधार पर वाक्य के तीन प्रमुख भेद माने जाते हैं— सरल वाक्य, संयुक्त वाक्य और मिश्र वाक्य; और मिश्र वाक्य में एक मुख्य (प्रधान) उपवाक्य होता है तथा अन्य आश्रित उपवाक्य होते हैं जो सामान्यतः 'कि', 'जो', 'चूँकि', 'यदि...तो', 'यद्यपि...तथापि' जैसे व्याधिकरण समुच्चयबोधक शब्दों से जुड़े होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। हिंदी व्याकरण में वाक्यों का वर्गीकरण मुख्य रूप से दो आधारों पर किया जाता है: (1) अर्थ के आधार पर और (2) रचना के आधार पर। अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद होते हैं, जिनमें विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, आज्ञावाचक, इच्छावाचक, संदेहवाचक, संकेतवाचक और विस्मयादिबोधक शामिल हैं। इच्छावाचक वाक्यों से शुभकामना, आशीर्वाद या तीव्र आकांक्षा का बोध होता है। रचना के आधार पर वाक्य के 3 भेद (सरल, संयुक्त, मिश्र) होते हैं, और मिश्र वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य के साथ एक या अधिक आश्रित उपवाक्य 'कि', 'जो', 'यदि-तो' आदि व्याधिकरण समुच्चयबोधकों द्वारा जुड़े होते हैं। अतः विकल्प (d) सही है।
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