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उत्तर प्रदेश की जलवायु और मानसूनी तंत्र के संदर्भ में 'दक्षिण-पश्चिम मानसून' (South-West Monsoon) और उसकी दो शाखाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उत्तर प्रदेश में ग्रीष्म ऋतु के अंत में वर्षा मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी की शाखा (Bay of Bengal Branch) के कारण होती है, जो पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए राज्य के पूर्वी जिलों में अधिक वर्षा करती है और जैसे-जैसे पश्चिम की ओर बढ़ती है, वर्षा की मात्रा कम होती जाती है।
  2. 2. अरब सागर की शाखा (Arabian Sea Branch) उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्रों में भारी मूसलाधार वर्षा करती है क्योंकि अरावली पर्वतमाला इस मानसून के समानांतर होने के कारण इसे रोक नहीं पाती, जिससे यह नमी सीधे उत्तर प्रदेश के मैदानों में प्रवेश कर जाती है।
  3. 3. राज्य में होने वाली कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 75% से 80% भाग मानसूनी महीनों (जून से सितंबर) के दौरान ही प्राप्त होता है, जबकि शीतकाल में होने वाली कुछ वर्षा 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) के कारण रबी की फसल के लिए अत्यंत लाभदायक होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: उत्तर प्रदेश में मानसूनी वर्षा मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी की शाखा द्वारा होती है, जो पूर्व (गोरखपुर, बलिया) से पश्चिम (मेरठ, सहारनपुर) की ओर चलने पर कम होती जाती है। कथन 2 गलत है: अरब सागर की शाखा अरावली पर्वतमाला के समानांतर निकल जाने के कारण राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिक वर्षा नहीं कर पाती; इसके विपरीत, अरावली की स्थिति के कारण यह नमी सीधे आगे निकल जाती है और उत्तर प्रदेश में मुख्य वर्षा बंगाल की खाड़ी की शाखा से ही होती है। कथन 3 सही है: उत्तर प्रदेश में अधिकांश वर्षा (लगभग 75-80%) मानसूनी काल में होती है, और सर्दियों में भूमध्य सागर से उठने वाले 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) के कारण होने वाली वर्षा रबी की फसल (विशेषकर गेहूँ) के लिए बहुत फायदेमंद होती है।
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