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उत्तर प्रदेश के 'जनजातियों और लोक-संस्कृति' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और बिजनौर जिलों में पाई जाने वाली 'थारू' जनजाति दीपावली के पर्व को 'शोक पर्व' के रूप में मनाती है, तथा इनका मुख्य रूप से संबंध किरात वंश से है। 2. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य की कुल 13 नई जातियों (जैसे- गोंड, धुरिया, नायक, ओझा, पठاری आदि) को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है, और इनमें से गोंड जनजाति राज्य की सबसे बड़ी अनुसूचित जनजाति है। 3. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और सोनभद्र क्षेत्र में पाई जाने वाली 'कर्मा' नृत्य शैली खरवार और गोड़ जनजातियों द्वारा मुख्य रूप से कर्मा वृक्ष की पूजा के अवसर पर की जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि दीपावली को 'शोक पर्व' के रूप में 'थारू' जनजाति नहीं बल्कि 'बुक्सा' (बोक्सा) जनजाति मनाती है (थारू जनजाति इस दिन को शोक के रूप में नहीं मनाती, हालांकि थारू समुदाय से जुड़ा यह भ्रम अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है; वास्तविक रूप से थारू जनजाति दीपावली को दीप पर्व के रूप में मनाती है जबकि बुक्सा या कुछ अन्य संदर्भों में इसे लेकर असमंजस रहता है, लेकिन प्रामाणिक रूप से थारू जनजाति दीपावली को शोक पर्व मानती है - यहाँ कथन 1 में तकनीकी त्रुटि यह है कि थारू जनजाति दीपावली को शोक पर्व मानती है यह कथन सत्य है, परंतु बिजनौर जिले में थारू नहीं बल्कि 'बुक्सा' जनजाति निवास करती है)। अतः स्पष्ट रूप से: कथन 1 गलत है क्योंकि थारू जनजाति मुख्य रूप से उधम सिंह नगर, महाराजगंज, लखीमपुर, बहराइच और सिद्धार्थनगर में पाई जाती है, न कि बिजनौर में (बिजनौर में बुक्सा जनजाति पाई जाती है)। कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं; उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियों में गोंड सबसे बड़ी जनजाति है और कर्मा नृत्य खरवार व गोंड जनजातियों का प्रमुख लोकनृत्य है। अत: सही उत्तर विकल्प (b) है।
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