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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक कालीन गुरुकुल व्यवस्था के संदर्भ में, 'समावर्तन संस्कार' (Samavartana Sanskara) का मुख्य उद्देश्य और उसकी विशेषता निम्नलिखित में से क्या थी?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली में 'समावर्तन संस्कार' छात्र की ब्रह्मचर्य आश्रम की शिक्षा पूर्ण होने के बाद गुरुकुल से विदाई के समय किया जाता था। इसे आधुनिक शिक्षा प्रणाली के 'दीक्षांत समारोह' (Convocation) के समकक्ष माना जाता है। इस संस्कार के पश्चात आचार्य अपने शिष्यों को समाज और राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों का उपदेश (समावर्तन उपदेश) देकर उन्हें गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने की अनुमति देते थे। इसके विपरीत, 'प्रव्रज्या' या 'उपसंपदा' बौद्ध शिक्षा प्रणाली से संबंधित संस्कार हैं, जबकि 'उपनीय' या 'उपकुर्वाण' छात्र के प्रवेश से जुड़े हैं।
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समाजीकरण का द्वितीयक (गौण) कारक निम्नलिखित में से किसे माना जाता है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 (NCF 2005) और बाल अधिकारों के दृष्टिकोण से निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल शारीरिक रूप से विकलांग बालकों को सामान्य विद्यालयों में प्रवेश देना है, ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
2. NCF 2005 के अनुसार, समावेशी शिक्षा केवल विशेष विद्यालयों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सामान्य विद्यालयों को ही अपनी शिक्षण पद्धतियों, पाठ्यक्रम और भौतिक बुनियादी ढाँचे में ऐसा लचीलापन लाना चाहिए जो प्रत्येक विविधतापूर्ण पृष्ठभूमि और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे की व्यक्तिगत सीखने की गति को स्वीकार कर सके।
3. समावेशी शिक्षा का दर्शन 'अतिरिक्त सहायता और विशिष्ट शिक्षण रणनीतियों' पर जोर देता है ताकि सामान्य कक्षा कक्ष में सभी बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'विशिष्ट बालकों' (Exceptional Children) के अध्ययन के अंतर्गत, निकोलस क्रिक (Nicholas Hobbs) द्वारा प्रतिपादित 'परियोजना री-इंटीग्रेशन' (Project Re-ED) मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस प्रकार के बालकों के पुनर्वास और शिक्षा से संबंधित है?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की अवस्थाओं और 'संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करने वाले कारकों' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage, लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक में 'विकेंद्रीकरण' (Decentration), 'संरक्षण' (Conservation) और 'श्रेणीबद्धता' (Classification) की क्षमता का पूर्ण विकास हो जाता है, जिससे वह वस्तुओं को उनके किसी एक गुण के आधार पर नहीं बल्कि अनेक पक्षों से देखकर समझ सकता है।
2. पियाजे के सिद्धांत में 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage, लगभग 11 वर्ष से आगे) के दौरान किशोरों में 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-deductive Reasoning) और 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) की क्षमता विकसित होती है, जिससे वे बिना प्रत्यक्ष रूप से देखे तार्किक निष्कर्ष निकाल सकते हैं।
3. पियाजे का यह दृढ़ मत था कि बच्चों का संज्ञानात्मक विकास मुख्य रूप से उनके वयस्कों और शिक्षकों के साथ निरंतर 'सामाजिक अंतःक्रिया' (Social Interaction) और 'सांस्कृतिक उपकरणों' (Cultural Tools) के आदान-प्रदान के माध्यम से ही संभव होता है, जिसमें परिपक्वता की कोई भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'मूल्यांकन और मापन की प्रविधियाँ' (Methods of Evaluation and Assessment) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, बेंजामिन ब्लूम (Benjamin Bloom) द्वारा प्रतिपादित 'शैक्षिक उद्देश्यों के वर्गीकरण' (Bloom's Taxonomy: ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग, विश्लेषण, संश्लेषण और मूल्यांकन) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), 'एंटीरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (ACC), और 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus) के बीच उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, मेटाकॉग्निटिव स्व-मूल्यांकन, और त्रुटि सुधार की सक्रियण गतिकी, तथा कैरोлайн ड्वेक (Carol Dweck) के 'विकासवादी मानसिकता' (Growth Mindset) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-मूल्यांकन ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Assessment Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE), रचनात्मक फीडबैक व समग्र संज्ञानात्मक-संवेगात्मक विकास के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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