त्वरित लिंक्स
UPTET
1 views
उत्तर प्रदेश की खनिज संपदा और खनन नीति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित बुंदेलखंड क्षेत्र (विशेषकर बांदा, महोबा, ललितपुर और हमीरपुर जिले) देश के प्रमुख खनिज-संपन्न क्षेत्रों में आता है, जहाँ विंध्यन और बुंदेलखंड गनीस शैलों से डायमंड, यूरेनियम, तांबा, और संगमरमर जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में प्राप्त होते हैं।
- 2. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित 'नवीन खनिज नीति' के तहत खनन क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शी ई-टेण्डरिंग और अवैध खनन रोकने के लिए 'भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय' के माध्यम से सख्त कदम उठाए गए हैं, और राज्य में 'चूना पत्थर' का सबसे बड़ा भंडार मिर्जापुर तथा सोनभद्र जिलों में केंद्रित है।
- 3. सोनभद्र और मिर्जापुर जिलों में पाई जाने वाली प्रचुर मात्रा में नॉन-कोकिंग कोयला जैसी ऊर्जा खनिज संरचनाओं के कारण उत्तर प्रदेश देश का शीर्ष कोयला उत्पादक राज्य बन गया है, जो अपनी कुल आवश्यकता का 50% से अधिक घरेलू उत्पादन से पूरा करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि उत्तर प्रदेश का दक्षिणवर्ती बुंदेलखंड क्षेत्र (ललितपुर, बांदा, महोबा आदि) प्राचीन चट्टानों (विंध्यन और बुंदेलखंड गनीस) से निर्मित होने के कारण खनिज दृष्टि से सबसे धनी है, जहाँ तांबा, यूरेनियम (ललितपुर), डायमंड (बांदा), और संगमरमर पाए जाते हैं। कथन 2 भी सही है; उत्तर प्रदेश में चूना पत्थर (Limestone) के विशाल भंडार मुख्य रूप से सोनभद्र (गुर्हा क्षेत्र) और मिर्जापुर (कजराहट) जिलों में स्थित हैं, और राज्य सरकार ने खनिज विकास व अवैध खनन रोकने हेतु कड़े उपाय किए हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि उत्तर प्रदेश देश का शीर्ष कोयला उत्पादक राज्य नहीं है (भारत में कोयला उत्पादन में झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ शीर्ष पर हैं); उत्तर प्रदेश में बहुत सीमित मात्रा में (मुख्य रूप से सिंगरौली क्षेत्र में कुछ अंश) कोयला पाया जाता है, और यह अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर है। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
Related Questions
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'व्यक्तित्व मापन' (Personality Assessment) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक हरमन रोर्शाक (Hermann Rorschach) द्वारा 1921 में विकसित 'रोर्शाक स्याही धब्बा परीक्षण' (Rorschach Inkblot Test) के मूल्यांकन के दौरान, किसी परीक्षार्थी द्वारा कार्ड्स पर बने आकृतियों में 'पूरे धब्बे' के बजाय 'छोटे विशिष्ट भागों' (Small Details) या सूक्ष्म तत्वों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति मनोवैज्ञानिक रूप से निम्नलिखित में से किस मुख्य विशेषता या संकेतक को दर्शाती है?
→
उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं कृषि-जलवायु परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) में विभाजित किया गया है, जो यहाँ की मृदा, वर्षा और तापमान की विभिन्नताओं को दर्शाते हैं।
2. राज्य के बुंदेलखंड क्षेत्र में मुख्य रूप से लाल और परुवा मृदा पाई जाती है, जहाँ सिंचाई के साधनों की सीमित उपलब्धता के कारण चना, मटर और ज्वार जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें उगाई जाती हैं।
3. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में गन्ने का सघन उत्पादन होता है, और यह क्षेत्र देश में चीनी के कटोरे के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।
4. राज्य के तराई क्षेत्र में पाई जाने वाली मृदा अत्यधिक शुष्क, बंजर और कंकड़-पथरयुक्त होती है, जिस कारण वहाँ कृषि कार्य पूरी तरह असंभव है और केवल कांटेदार झाड़ियाँ ही उगती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता (Creativity) और अपसारी चिंतन के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों' के संदर्भ में, जिलफोर्ड (J. P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि की संरचना मॉडल' (Structure of Intellect Model) के अंतर्गत 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) के चार प्रमुख घटकों—धाराप्रवाहता (Fluency), लचीलापन (Flexibility), मौलिकता (Originality), और विविधीकरण (Elaboration)—के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप और मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' तथा 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN) की सहयोगात्मक सक्रियण प्रक्रिया, तथा ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरण' (Four Stages of Creative Thought) के अंतर्गत 'तैयारी' (Preparation), 'उद्भावन' (Incubation), 'प्रदीप्ति या अंतर्दृष्टि' (Illumination), और 'सत्यापन' (Verification) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान के अभिनव दृष्टिकोण और विद्यार्थियों में मौलिक व सृजनात्मक कौशलों के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
बच्चों के सामाजिक-नैतिक विकास और अल्बर्ट बंडूरा के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंडूरा के अनुसार बच्चे अपने परिवेश में दूसरों के व्यवहार को देखकर, उसका अवलोकन करके और उसका अनुकरण (Imitation) करके सीखते हैं, जिसे 'प्रेक्षणात्मक अधिगम' (Observational Learning) कहा जाता है।
2. 'बॉबो डॉल प्रयोग' (Bobo Doll Experiment) के माध्यम से बंडूरा ने यह सिद्ध किया कि बच्चों में आक्रामक व्यवहार की प्रवृत्ति जन्मजात होती है और इस पर पर्यावरणीय पुरस्कार या दंड का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
3. सामाजिक अधिगम की प्रक्रिया में 'प्रतिमांचरण' या 'मॉडलिंग' (Modeling) के चार प्रमुख चरण होते हैं - ध्यान (Attention), धारण (Retention), पुनरुत्पादन (Reproduction) और अभिप्रेरण/पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
हिंदी भाषा शिक्षण और व्याकरण के संदर्भ में, पाणिनी की अष्टाध्यायी पर आधारित कात्यायन (वररुचि) द्वारा रचित 'वार्तिक' ग्रंथ की मूल भाषागत विशेषता और पाणिनी के सूत्रों में सुधार या संशोधन प्रस्तुत करने की पद्धति को निम्नलिखित में से किस रूप में सबसे सटीक रूप से परिभाषित किया जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.