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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, पियाजे और वाइगोत्स्की के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांतों के व्यावहारिक अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत बाल-केन्द्रित शिक्षा और खोजपूर्ण अधिगम (Discovery Learning) पर बल देता है, जिसके अनुसार विशेष आवश्यकता वाले बालकों को उनकी विकासात्मक अवस्था के अनुरूप स्व-निर्देशित अधिगम के अवसर मिलने चाहिए। 2. लेव वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (ZPD) और 'मचान' (Scaffolding) की अवधारणा पर आधारित है, जो यह स्पष्ट करता है कि समावेशी कक्षा में दिव्यांग या मंदबुद्धि बालकों को सक्षम सहयोगियों द्वारा दी जाने वाली मध्यस्थ सहायता से उनकी सीखने की क्षमता का विस्तार किया जा सकता है। 3. पियाजे के अनुसार भाषा विचार का पूर्ण निर्धारण करती है, जबकि वाइगोत्स्की यह मानते थे कि भाषा और विचार का विकास जन्म से लेकर किशोरावस्था तक पूरी तरह स्वतंत्र रूप से होता है और इनका आपस में कोई संबंध नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि जीन पियाजे का सिद्धांत बच्चों को 'सक्रिय निर्माता' मानता है और खोजपूर्ण अधिगम (Discovery Learning) तथा विकासात्मक चरणों के अनुसार अनुकूलन पर जोर देता है। कथन 2 सही है क्योंकि लेव वाइगोत्स्की की ZPD (Zone of Proximal Development) और Scaffolding (मचान) की अवधारणाएँ समावेशी कक्षाओं में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उपयुक्त ढांचागत सहायता (Scaffolding) प्रदान करने का आधार बनती हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि पियाजे के अनुसार विचार भाषा से पहले आता है और भाषा विचार पर निर्भर करती है, जबकि वाइगोत्स्की के अनुसार प्रारंभिक अवस्था में भाषा और विचार अलग होते हैं, परंतु लगभग दो वर्ष की आयु के बाद वे आपस में मिल जाते हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
Related Questions
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage, लगभग 7 से 11 वर्ष) की प्रमुख मनोवैज्ञानिक एवं तार्किक विशेषताओं—विशेषकर 'संरक्षण' (Conservation), 'वर्गीकरण' (Classification), 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'क्रमबद्धता' (Seriation)—के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य (गलत) है?
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बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'समीप-दूरी विकास का सिद्धांत' (Proximodistal Trend) यह इंगित करता है कि शारीरिक विकास शरीर के केंद्रीय भाग (धड़) से शुरू होकर बाहर की ओर (हाथों और उंगलियों की दिशा में) अग्रसर होता है।
2. 'मस्तकोधुमुखी विकास का सिद्धांत' (Cephalocaudal Trend) के अनुसार विकास हमेशा पैर के अंगूठे से शुरू होकर सिर की दिशा में ऊपर की ओर बढ़ता है।
3. विकास की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है, जो गर्भाधान से शुरू होती है और मृत्युपर्यंत चलती है, किंतु इसकी गति जीवन के विभिन्न चरणों में एक समान (एक जैसी) रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में 'विशिष्ट बालकों' (Exceptional Children) की श्रेणी में आने वाले 'प्रतिभाशाली बालकों' (Gifted Children) की पहचान के लिए निम्नलिखित में से किस मनोवैज्ञानिक परीक्षण या मापनी (Scale) का प्रयोग सबसे अधिक प्रामाणिक माना जाता है?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में 'अधिगम की अक्षमताएँ' (Learning Disabilities) और उनके विशिष्ट लक्षणों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia) एक पठन संबंधी विकार है, जिससे ग्रसित बालकों को अक्सर शब्दों, अक्षरों और ध्वनियों को पहचानने, पढ़ने, वर्तनी लिखने तथा शब्दों को उल्टा पढ़ने (जैसे 'saw' को 'was' पढ़ना) में गंभीर कठिनाई होती है।
2. 'डिस्ग्राफिया' (Dysgraphia) एक लेखन संबंधी विकार है, जिसमें बच्चे की लिखावट अत्यंत खराब, अस्पष्ट और अनियमित होती है, तथा उसे पेंसिल पकड़ने, वर्तनी बनाने और विचारों को लिखित रूप में व्यक्त करने में भारी समस्या का सामना करना पड़ता है।
3. 'डिस्कैल्कुलिया' (Dyscalculia) एक पठन या भाषा संबंधी विकार है, जिसके अंतर्गत बालकों को शब्दों का उच्चारण करने और लंबे वाक्यों को याद रखने में कठिनाई होती है, तथा इसका गणितीय गणनाओं से कोई संबंध नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPWD Act, 2016) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के प्रमुख प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. RPWD Act, 2016 के तहत दिव्यांगता के प्रकारों को पहले के 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है, और इसके अंतर्गत 'विशिष्ट अधिगम अक्षमता' (Specific Learning Disabilities - जैसे डिस्लेक्सिया) को भी आधिकारिक रूप से दिव्यांगता की श्रेणी में शामिल किया गया है।
2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) में यह प्रावधान किया गया है कि गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष आवासीय या गैर-आवासीय विद्यालयों का विकल्प पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा और उन्हें केवल और केवल सामान्य विद्यालयों में ही पढ़ना अनिवार्य होगा।
3. NEP 2020 में विद्यालयी शिक्षा के सभी स्तरों पर 'संसाधन केंद्रों' (Resource Centres) की स्थापना, शिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण, भारतीय संकेत भाषा (Indian Sign Language - ISL) को मानकीकृत करने तथा विद्यालयों में बाधा-मुक्त बुनियादी ढांचे (Barrier-free Access) के विकास पर विशेष बल दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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