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UPTET
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, पियाजे और वाइगोत्स्की के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांतों के व्यावहारिक अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत बाल-केन्द्रित शिक्षा और खोजपूर्ण अधिगम (Discovery Learning) पर बल देता है, जिसके अनुसार विशेष आवश्यकता वाले बालकों को उनकी विकासात्मक अवस्था के अनुरूप स्व-निर्देशित अधिगम के अवसर मिलने चाहिए।
- 2. लेव वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (ZPD) और 'मचान' (Scaffolding) की अवधारणा पर आधारित है, जो यह स्पष्ट करता है कि समावेशी कक्षा में दिव्यांग या मंदबुद्धि बालकों को सक्षम सहयोगियों द्वारा दी जाने वाली मध्यस्थ सहायता से उनकी सीखने की क्षमता का विस्तार किया जा सकता है।
- 3. पियाजे के अनुसार भाषा विचार का पूर्ण निर्धारण करती है, जबकि वाइगोत्स्की यह मानते थे कि भाषा और विचार का विकास जन्म से लेकर किशोरावस्था तक पूरी तरह स्वतंत्र रूप से होता है और इनका आपस में कोई संबंध नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि जीन पियाजे का सिद्धांत बच्चों को 'सक्रिय निर्माता' मानता है और खोजपूर्ण अधिगम (Discovery Learning) तथा विकासात्मक चरणों के अनुसार अनुकूलन पर जोर देता है। कथन 2 सही है क्योंकि लेव वाइगोत्स्की की ZPD (Zone of Proximal Development) और Scaffolding (मचान) की अवधारणाएँ समावेशी कक्षाओं में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उपयुक्त ढांचागत सहायता (Scaffolding) प्रदान करने का आधार बनती हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि पियाजे के अनुसार विचार भाषा से पहले आता है और भाषा विचार पर निर्भर करती है, जबकि वाइगोत्स्की के अनुसार प्रारंभिक अवस्था में भाषा और विचार अलग होते हैं, परंतु लगभग दो वर्ष की आयु के बाद वे आपस में मिल जाते हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा के सिद्धांतों' के संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) के अंतर्गत 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) और 'सौंदर्यपरक आवश्यकताओं' (Aesthetic Needs) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Ventromedial Prefrontal Cortex - vmPFC), 'इंसुला' (Insula) और 'मेolimbic डोपापिनर्जिक पाथवे' (Mesolimbic Dopaminergic Pathway) के बीच आंतरिक प्रेरणा, मूल्य निर्धारण और संतुष्टि की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डेसी (Edward Deci) और रिचर्ड रायन (Richard Ryan) द्वारा प्रतिपादित 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory: स्वायत्तता, सक्षमता, और संबद्धता) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मानवतावादी शिक्षाशास्त्र (Humanistic Pedagogy) और विद्यार्थियों में आंतरिक अभिप्रेरणा, भावनात्मक कल्याण व समग्र व्यक्तिगत विकास के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियों और उनकी सांस्कृतिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'थारू' जनजाति मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों (विशेषकर लखीमपुर खीरी, बहराइच, महाराजगंज और सिद्धार्थनगर) में निवास करती है, और यह जनजाति दीपावली के पर्व को 'शोक पर्व' के रूप में मनाती है।
2. 'बुक्सा' (बोक्सा) जनजाति मुख्य रूप से बिजनौर जिले में निवास करती है, जिनकी अपनी एक पंचायत व्यवस्था होती है जिसका सर्वोच्च अधिकारी 'तखत' कहलाता है, और ये हिंदू धर्म के अनुयायी होते हैं।
3. 'جونसारी' (जौनसारी) और 'राजी' जनजातियाँ उत्तर प्रदेश के पर्वतीय और पश्चिमी जिलों में पाई जाती हैं, जिनमें 'राजी' जनजाति को उत्तर प्रदेश की सबसे कम जनसंख्या वाली और वन-रावत के रूप में भी जाना जाता है।
4. 'खरवार' जनजाति उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, मिर्जापुर, देवरिया और बलिया जिलों में मुख्य रूप से पाई जाती है, जो कि हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों को मानती है और जिनका मुख्य पारंपरिक नृत्य 'करमा' है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय संविधान में 'समवर्ती सूची' का प्रावधान किस देश के संविधान से लिया गया है?
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) और प्रमुख फसल पैटर्नों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को योजना आयोग द्वारा कृषि जलवायु के आधार पर कुल 9 प्रमुख जोनों (Zones) में विभाजित किया गया है, जहाँ विभिन्न प्रकार की मृदा और वर्षा की मात्रा के अनुसार फसलें उगाई जाती हैं।
2. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में मुख्य रूप से बलुई-दोमट (Sandy Loam) और जलोढ़ मृदा पाई जाती है, जो गन्ने और गेहूँ की सघन खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है।
3. बुंदेलखंड क्षेत्र की प्रमुख मृदाओं में 'मार' और 'भाट' मृदा शामिल हैं, जो अत्यधिक उपजाऊ और जल धारण क्षमता से युक्त होती हैं, तथा जिनमें धान की खेती सबसे प्रमुख रूप से की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास एवं उत्तर प्रदेश के पुरातत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित 'सराय नाहर राय' और 'मदहा' नामक पुरास्थल मध्य पाषाण काल (Mesolithic Period) से संबंधित हैं, जहाँ से मानवरहित समाधियों और बूचड़खाने-सह-नृत्य क्षेत्र (Butchering areas) के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
2. उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में स्थित 'कोशाम्बी' पुरास्थल प्राचीन वत्स महाजनपद की राजधानी थी, जिसकी पहचान का श्रेय पुरातत्वविद् ए. कनिंघम को जाता है, और यहाँ से मिले अशोक के स्तंभ लेख पर रानी कार्वाकी का उल्लेख मिलता है जिसे 'रानी का अभिलेख' भी कहा जाता है।
3. उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में स्थित 'लहुरादेवा' पुरास्थल से भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीनतम कृषि साक्ष्य के रूप में चावल (धान) के प्रमाण मिले हैं, जिसकी प्राचीनता लगभग 7000 ईसा पूर्व से 8000 ईसा पूर्व के मध्य आंकी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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