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UPTET
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उत्तर प्रदेश की राजव्यवस्था, पंचायती राज व्यवस्था और विधानमंडल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उत्तर प्रदेश विधानसभा (Legislative Assembly) में कुल सदस्यों की संख्या 403 है, और यदि आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदाय के मनोनयन के प्रावधान को समाप्त कर दिया जाए (104वें संविधान संशोधन के पश्चात), तो यह पूरी तरह निर्वाचित सदन है, जिसके गठन के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है।
  2. 2. उत्तर प्रदेश विधान परिषद (Legislative Council) एक स्थायी सदन है जिसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है, और इसके कुल सदस्यों में से एक-तिहाई सदस्य स्थानीय संस्थाओं (जैसे नगर निगम, जिला पंचायत आदि) द्वारा चुने जाते हैं।
  3. 3. उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत) का विधिवत शुभारंभ उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 के तहत किया गया था, और 73वें संविधान संशोधन (1992) के माध्यम से इसे संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया जिसके तहत पंचायतों में महिलाओं के लिए न्यूनतम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की गईं।
  4. 4. उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त और उपलोकायुक्त अधिनियम के तहत नियुक्त राज्य के पहले 'लोकायुक्त' न्यायमूर्ति विशंभर दयाल थे, जिनका कार्यकाल सबसे लंबा रहा, तथा इस पद पर नियुक्त होने वाले व्यक्ति का चयन मुख्यमंत्री, विधानसभा में विपक्ष के नेता और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की संयुक्त समिति द्वारा किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन उत्तर प्रदेश की राजव्यवस्था, विधानमंडल और स्थानीय शासन के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं। 1. उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 निर्वाचित सीटें हैं और 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा आंग्ल-भारतीय समुदाय के मनोनयन का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है; विधायक बनने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष है। 2. विधान परिषद (उच्च सदन) एक स्थायी सदन है, इसके एक-तिहाई सदस्य स्थानीय निकायों द्वारा चुने जाते हैं और कार्यकाल 6 वर्ष होता है। 3. यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 पर आधारित है जिसे 73वें संशोधन से संवैधानिक बनाया गया। 4. राज्य के पहले लोकायुक्त न्यायमूर्ति विशंभर दयाल थे और इनकी नियुक्ति समिति में सीएम, विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं।
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