त्वरित लिंक्स
UPTET
1 views
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के स्थानांतरण' (Transfer of Learning) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक सी.डब्ल्यू. वैन टोरन (C.W. Van Tören) या पारंपरिक रूप से 'अधिगम स्थानांतरण के द्विपक्षीय या क्रॉस एजुकेशनल थ्योरी' (Cross-Educational Transfer) के अंतर्गत, जब शरीर के एक अंग द्वारा सीखे गए कौशल का प्रशिक्षण दूसरे सममित (Symmetric) अंग को स्वतः स्थानांतरित हो जाता है (जैसे दाहिने हाथ से लिखने का कौशल बाएं हाथ में आ जाना), तो इस प्रकार के स्थानांतरण को निम्नलिखित में से किस विशिष्ट नाम से जाना जाता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अधिगम के स्थानांतरण के विभिन्न रूपों में 'पार्श्वीय स्थानांतरण' या 'द्विपक्षीय स्थानांतरण' (Bilateral Transfer / Cross-Educational Transfer) वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर के एक अंग (जैसे दायां हाथ या पैर) द्वारा प्राप्त प्रशिक्षण या सीखे गए कौशल का लाभ या प्रभाव शरीर के दूसरे सममित (Symmetric) अंग (जैसे बायां हाथ या पैर) को स्वतः प्राप्त हो जाता है। इसका कारण हमारे तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों (Hemispheres) के बीच का समन्वय है। यह प्रश्न UPTET परीक्षा के बाल विकास एवं शिक्षण विधि के अंतर्गत 'अधिगम के स्थानांतरण के प्रकार' से संबंधित है।
Related Questions
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लेव विगोत्स्की (Lev Vygotsky) द्वारा प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'मचान (Scaffolding)' के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डॉर्मोलेटेरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), 'इन्फीरियर फ्रंटल गाइरस' (IFG) और 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (MNS) के बीच सामाजिक अंतःक्रिया, संज्ञानात्मक नियंत्रण और अनुकरण आधारित संप्रेषण की सक्रियण गतिकी, तथा जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) द्वारा प्रतिपादित 'निर्देशात्मक मचान और प्रतिनिधित्व के रूपों (Enactive, Iconic, and Symbolic)' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सहयोगात्मक सामाजिक शिक्षाशास्त्र (Collaborative Social Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्व-विनियमित अधिगम, भाषा-मध्यस्थता वाले उच्च-स्तरीय मानसिक कार्यों व समग्र संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
बुद्धि की संरचना (Structure of Intellect - SOI) के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बुद्धि के त्रि-आयामी (Structure of Intellect) मॉडल का प्रतिपादन जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा किया गया था, जिन्होंने मानसिक क्षमताओं को तीन स्वतंत्र आयामों - विषय-वस्तु (Contents), संक्रियाएँ (Operations), और उत्पाद (Products) में वर्गीकृत किया है।
2. गिलफोर्ड के प्रारंभिक मॉडल के अनुसार, बुद्धि कुल 4×5×6 = 120 स्वतंत्र बौद्धिक कारकों (Factors) से मिलकर बनी थी, जिसे बाद में संशोधित करके कुल 150 और अंततः 180 कारकों तक विस्तारित किया गया।
3. इस सिद्धांत के अंतर्गत 'विषय-वस्तु' (Contents) आयाम के भीतर सांकेतिक (Symbolic), प्रतीकात्मक, व्यवहारपरक (Behavioral) और आकृतिक (Figural) जैसी मानसिक सामग्रियां शामिल होती हैं, जिन पर मस्तिष्क की संक्रियाएँ कार्य करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के क्षेत्र और कक्षा-कक्ष शिक्षण' के संदर्भ में, बेंजामिन ब्लूम (Benjamin Bloom) द्वारा प्रतिपादित 'शैक्षिक उद्देश्यों के वर्गीकरण' (Taxonomy of Educational Objectives) के अंतर्गत 'संज्ञानात्मक पक्ष' (Cognitive Domain) के छह प्रमुख स्तरों—'ज्ञान' (Knowledge), 'बोध' (Comprehension), 'अनुप्रयोग' (Application), 'विश्लेषण' (Analysis), 'संश्लेषण/सर्जन' (Synthesis/Creation), और 'मूल्यांकन' (Evaluation)—के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा डेविड क्राथवोल (David Krathwohl) और बेंजामिन ब्लूम द्वारा प्रतिपादित 'भावात्मक पक्ष' (Affective Domain) के पाँच क्रमिक स्तरों—'ग्रहण करना' (Receiving), 'आकलन/अनुक्रिया करना' (Responding), 'मूल्य निर्धारण' (Valuing), 'संगठन' (Organization), और 'चरित्रिकरण' (Characterization)—के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक बहु-आयामी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मूल्य-आधारित पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों में उच्च-स्तरीय बौद्धिक एवं भावनात्मक क्षमताओं के समेकित विकास में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots) की संकल्पना और भारतीय संदर्भ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' की अवधारणा का प्रतिपादन ब्रिटिश पर्यावरणविद् नॉर्मन मायर्स (Norman Myers) द्वारा वर्ष 1988 में किया गया था, जिसके अंतर्गत किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट घोषित करने के लिए न्यूनतम 1,500 स्थानिक (Endemic) पौधों की प्रजातियों का होना तथा उस क्षेत्र की मूल वानस्पतिक भूमि का कम से कम 70% भाग नष्ट हो चुका होना आवश्यक है।
2. वर्तमान में वैश्विक स्तर पर कुल 36 जैव विविधता हॉटस्पॉट की पहचान की गई है, जिनमें से संपूर्ण भारत में केवल दो ही क्षेत्र यानी 'पश्चिमी घाट' (Western Ghats) और 'पूर्वी हिमालय' (Eastern Himalayas) शामिल हैं।
3. 'सुंदर्लैंड' (Sundaland) जैव विविधता हॉटस्पॉट के अंतर्गत भारत का निकोबार द्वीप समूह भी शामिल है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के जैव विविधता क्षेत्रों से अपनी पारिस्थितिकीय समानता रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
→
बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Moral Development Theory) और इसके 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों (चरण 5 और चरण 6) की प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस स्तर के पाँचवें चरण ('सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' - Social Contract and Individual Rights) में व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसमें विवेकपूर्ण तरीके से बदलाव किया जा सकता है।
2. छठे चरण ('सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' - Universal Ethical Principles) में व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव या कानूनी दंड के भय से नहीं, बल्कि अपने स्वयं के चुने हुए उन अंतरात्मा के सार्वभौमिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, और मानव जीवन की गरिमा) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, भले ही वे नियम मौजूदा कानूनों के विरुद्ध क्यों न हों।
3. कोहलवर्ग के अनुसार नैतिक विकास के इस सर्वोच्च उत्तर-रूढ़िगत स्तर पर अधिकांश किशोर और वयस्क अपने जीवन के व्यावहारिक अनुभवों के कारण स्वतः पहुँच जाते हैं, और इस अवस्था की मुख्य विशेषता यह होती है कि इसमें नैतिक तर्क पूरी तरह से पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और अधिकार बनाए रखने पर केंद्रित हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.