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UPTET
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बच्चों (चाहे वे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक रूप से किसी भी वर्ग के हों) को एक साथ समान शिक्षा प्रदान करना है, जिसमें विशेष आवश्यकता वाले बालकों के लिए पाठ्यक्रम या शिक्षण विधि में आवश्यक लचीलापन लाया जाता है।
- 2. भारतीय संदर्भ में निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) की धारा 3 और 29 यह सुनिश्चित करती है कि प्रारंभिक स्तर पर प्रत्येक बच्चे को उसकी विकलांगता के प्रकार के बावजूद समीप के विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण और भेदभाव-रहित शिक्षा प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार है।
- 3. समावेशी शिक्षा 'एकीकृत शिक्षा' (Integrated Education) से भिन्न है, क्योंकि एकीकृत शिक्षा में बच्चों को सामान्य विद्यालयों में समायोजित तो किया जाता है, परंतु विद्यालय को स्वयं बच्चों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी संरचना और प्रणालियों में परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं होती, जबकि समावेशी शिक्षा पूरी तरह से विद्यालय प्रणाली के लचीलेपन पर बल देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) आधुनिक शिक्षा प्रणाली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक दृष्टिकोण है। कथन 1 सही है क्योंकि समावेशी शिक्षा का मूल मंत्र 'सबके लिए शिक्षा' है, जो सामान्य और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को एक ही छत के नीचे बिना किसी भेदभाव के शिक्षा देने पर जोर देता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि RTE Act, 2009 की विभिन्न धाराएं (विशेषकर धारा 3 और विकलांग जन अधिकार अधिनियम के प्रावधान) सभी बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा की गारंटी देती हैं। कथन 3 पूरी तरह सही है; 'एकीकृत शिक्षा' (Integrated Education) और 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) में मुख्य अंतर यह है कि एकीकृत शिक्षा में बच्चे को अपनी क्षमताओं के अनुसार खुद को स्कूल के ढांचे में ढालना पड़ता है, जबकि समावेशी शिक्षा में विद्यालय प्रणाली (School System) खुद को बच्चे की अद्वितीय और विविध आवश्यकताओं के अनुसार रूपांतरित करती है। अतः तीनों कथन सही हैं।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम शैलियों' (Learning Styles) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, नील फ्लेミング (Neil Fleming) द्वारा प्रतिपादित 'VARK मॉडल' (Visual, Auditory, Reading/Writing, Kinesthetic) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ऑक्सीपिटल कॉर्टेक्स' (Occipital Cortex), 'सुपीरियर टेम्पोरल गाइरस' (Superior Temporal Gyrus), 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), और 'प्राइमरी मोटर कॉर्टेक्स' (Primary Motor Cortex) के बीच संवेदी-विशिष्ट सूचना प्रसंस्करण, क्रॉस-मोडल एकीकरण (Cross-modal Integration), और कार्यकारी नियंत्रण की सक्रियण गतिकी, तथा डेविड कोब (David Kolb) के 'प्रयोगात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-स्टाइल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Style Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी शिक्षण रणनीतियों (Multisensory Teaching Strategies), व्यक्तिगत भिन्नताओं के अनुकूलन व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास की प्रक्रिया आयु के साथ क्रमिक रूप से तीन मुख्य स्तरों (Levels) और प्रत्येक स्तर में दो अवस्थाओं (Stages) यानी कुल छह चरणों में विभाजित है, और यह विकास सार्वभौमिक होता है।
2. 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता का स्तर' (Post-Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण में व्यक्ति कानून को एक कठोर और अपरिवर्तनीय नियम के रूप में देखता है, जहाँ कानून का पालन करना ही एकमात्र परम नैतिकता है, भले ही वह सामाजिक कल्याण के विरुद्ध हो।
3. कोहलबर्ग ने अपने सिद्धांत के प्रतिपादन के लिए 'हाइन्ज़ दुविधा' (Heinz Dilemma) का उपयोग किया था, जिसके माध्यम से उन्होंने बालकों और वयस्कों के तार्किकीकरण (Reasoning) का अध्ययन किया कि वे नैतिक दुविधा की स्थिति में किस प्रकार निर्णय लेते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-conventional Morality) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (vmPFC), 'एंटterior सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (ACC) और 'इनसुलर कॉर्टेक्स' के बीच सामाजिक-नैतिक निर्णय लेने, सहानुभूतिपूर्ण प्रतिक्रिया, न्याय बोध और संज्ञानात्मक संघर्ष समाधान की सक्रियण गतिकी, तथा कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक देखभाल का दृष्टिकोण' (Ethics of Care) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मूल्य-आधारित लोकतांत्रिक शिक्षाशास्त्र (Value-Based Democratic Pedagogy) और विद्यार्थियों में नैतिक तर्क, सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों व समग्र सामाजिक-संवेगात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार स्कूली शिक्षा के लिए नया पाठ्यचर्या ढांचा (Curricular Structure) क्या है?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'पारिस्थितिकीय पिरामिड' (Ecological Pyramids) और ऊर्जा प्रवाह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ऊर्जा का पिरामिड' (Pyramid of Energy) सदैव सीधा (Upright) बनता है, क्योंकि पारिस्थितिक तंत्र में एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर ऊर्जा के स्थानांतरण के दौरान 'दस प्रतिशत का नियम' (10% Law) लागू होता है जिसे लिंडमैन (Lindeman) द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
2. 'जीवभार का पिरामिड' (Pyramid of Biomass) अधिकांश स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों में सीधा होता है, किंतु जलीय (तलाब या समुद्र) पारिस्थितिक तंत्र में यह उल्टा (Inverted) बनता है क्योंकि वहाँ उत्पादकों (फाइटोप्लांकटन) का कुल जीवभार उपभोक्ताओं (जूप्लांकटन और मछलियों) की तुलना में बहुत कम होता है।
3. 'संख्या का पिरामिड' (Pyramid of Number) हमेशा सीधा ही होता है, चाहे वह घास का मैदान हो, वन पारिस्थितिक तंत्र हो या फिर एक बड़े आकार के एकल वृक्ष पर आधारित परजीवी खाद्य श्रृंखला (Parasitic Food Chain) हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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