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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'पारिस्थितिकीय पिरामिड' (Ecological Pyramids) और ऊर्जा प्रवाह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'ऊर्जा का पिरामिड' (Pyramid of Energy) सदैव सीधा (Upright) बनता है, क्योंकि पारिस्थितिक तंत्र में एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर ऊर्जा के स्थानांतरण के दौरान 'दस प्रतिशत का नियम' (10% Law) लागू होता है जिसे लिंडमैन (Lindeman) द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
- 2. 'जीवभार का पिरामिड' (Pyramid of Biomass) अधिकांश स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों में सीधा होता है, किंतु जलीय (तलाब या समुद्र) पारिस्थितिक तंत्र में यह उल्टा (Inverted) बनता है क्योंकि वहाँ उत्पादकों (फाइटोप्लांकटन) का कुल जीवभार उपभोक्ताओं (जूप्लांकटन और मछलियों) की तुलना में बहुत कम होता है।
- 3. 'संख्या का पिरामिड' (Pyramid of Number) हमेशा सीधा ही होता है, चाहे वह घास का मैदान हो, वन पारिस्थितिक तंत्र हो या फिर एक बड़े आकार के एकल वृक्ष पर आधारित परजीवी खाद्य श्रृंखला (Parasitic Food Chain) हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा (Upright) होता है क्योंकि ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम के अनुसार प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर ऊर्जा का ह्रास होता है और लिंडमैन के 10% नियम के अनुसार केवल 10% ऊर्जा ही अगले स्तर तक पहुँचती है। कथन 2 सही है: जलीय पारिस्थितिक तंत्र में जीवभार का पिरामिड उल्टा होता है क्योंकि छोटे फाइटोप्लांकटन का भार बड़ी मछलियों के भार से कम होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि एक बड़े वृक्ष पर आधारित परजीवी खाद्य श्रृंखला (Tree Ecosystem) में 'संख्या का पिरामिड' उल्टा (Inverted) बनता है, क्योंकि एक विशाल वृक्ष पर कई पक्षी और उन पक्षियों पर अनगिनत परजीवी (जूं, कीट आदि) निर्भर रहते हैं, जिससे नीचे से ऊपर जाने पर संख्या बढ़ती जाती है।
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उत्तर प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण, प्रमुख वन्यजीव विहारों और उनकी स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार - चंदौली (स्थापना: 1957)
2. हस्तिनापुर वन्यजीव विहार - मेरठ, मुजफ्फरपुर और बिजनौर (स्थापना: 1986)
3. कछुआ वन्यजीव विहार - वाराणसी (स्थापना: 1989)
4. सुहेलदेव वन्यजीव विहार - बहराइच और श्रावस्ती (स्थापना: 1988)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कृषि जलवायु और मृदा विशेषताओं के आधार पर कुल 9 प्रमुख कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो राज्य की विविध भौगोलिक और मानसूनी परिस्थितियों को दर्शाते हैं।
2. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड (दक्षिणी पठारी) क्षेत्र में पाई जाने वाली मृदा को स्थानीय रूप से 'मार', 'भाबर', 'कब्बर' और 'परवा' के नाम से जाना जाता है, जिसमें नमी बनाए रखने की अद्भुत क्षमता होती है और यह चना एवं दलहन फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
3. उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र (भाबर एवं तराई की पट्टी) में उत्तर से आने वाली नदियों द्वारा लाई गई महीन जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है, जो अत्यधिक उपजाऊ होती है और इस क्षेत्र में धान तथा गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।
4. उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक क्षेत्रफल पर बोई जाने वाली फसल 'गेहूँ' है, जबकि उत्पादन की दृष्टि से यह राज्य देश में खाद्यान्न उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का योगदान सबसे अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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निम्नलिखित में से कौन सा युग्म 'तत्सम-तद्भव' की दृष्टि से अशुद्ध है?
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उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और मध्यवर्ती क्षेत्रों में बोली जाने वाली विभिन्न बोलियों तथा उनके मुख्य भौगोलिक विस्तार के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. भोजपुरी (Bhojpuri) - बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, गोरखपुर और देवरिया (यह बिहार की सीमा से लगे जिलों में प्रमुखता से बोली जाती है और इसका उद्गम शौरसेनी अपभ्रंश से माना जाता है)
2. अवधी (Awadhi) - लखनऊ, अयोध्या, सीतापुर, रायबरेली, सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ (यह मध्य उत्तर प्रदेश का क्षेत्र है जिसका विकास अर्द्धमागधी अपभ्रंश से हुआ है)
3. ब्रजभाषा (Brajbhasha) - आगरा, मथुरा, अलीगढ़, एटा और हाथरस (यह क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित है जहाँ सूरदास और बिहारी ने अपनी रचनाएँ लिखीं)
4. बुंदेली (Bundeli) - झाँसी, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर और बाँदा (यह दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश का पठारी क्षेत्र है जहाँ अर्धमागधी अपभ्रंश का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, पियाजे और वाइगोत्स्की के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांतों के व्यावहारिक अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत बाल-केन्द्रित शिक्षा और खोजपूर्ण अधिगम (Discovery Learning) पर बल देता है, जिसके अनुसार विशेष आवश्यकता वाले बालकों को उनकी विकासात्मक अवस्था के अनुरूप स्व-निर्देशित अधिगम के अवसर मिलने चाहिए।
2. लेव वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (ZPD) और 'मचान' (Scaffolding) की अवधारणा पर आधारित है, जो यह स्पष्ट करता है कि समावेशी कक्षा में दिव्यांग या मंदबुद्धि बालकों को सक्षम सहयोगियों द्वारा दी जाने वाली मध्यस्थ सहायता से उनकी सीखने की क्षमता का विस्तार किया जा सकता है।
3. पियाजे के अनुसार भाषा विचार का पूर्ण निर्धारण करती है, जबकि वाइगोत्स्की यह मानते थे कि भाषा और विचार का विकास जन्म से लेकर किशोरावस्था तक पूरी तरह स्वतंत्र रूप से होता है और इनका आपस में कोई संबंध नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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