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उत्तर प्रदेश के वन्यजीव विहारों, पक्षी विहारों और उनकी स्थापना वर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. 'चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार' - स्थापना वर्ष 1957 (यह चंदौली जिले में स्थित उत्तर प्रदेश का पहला वन्यजीव विहार है।)
- 2. 'किशनपुर वन्यजीव विहार' - स्थापना वर्ष 1972 (यह लखीमपुर खीरी जिले में स्थित है और मुख्य रूप से बारहसिंगा तथा बाघों के संरक्षण के लिए जाना जाता है।)
- 3. 'नवाबगंज पक्षी विहार' - स्थापना वर्ष 1984 (यह उन्नाव जिले में स्थित है और यह उत्तर प्रदेश का पहला स्थापित पक्षी विहार है, जिसका वर्तमान नाम चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार है।)
- 4. 'सुहेलदेव वन्यजीव विहार' - स्थापना वर्ष 1988 (यह श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों में विस्तृत है और तराई क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए स्थापित किया गया है।
) उपर्युक्त युग्मों में से कौन सा/से सही सुमेलित है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी युग्म सही सुमेलित हैं। 1. चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार (चंदौली) की स्थापना 1957 में हुई थी और यह यूपी का पहला वन्यजीव विहार है। 2. किशनपुर वन्यजीव विहार (लखीमपुर खीरी) की स्थापना 1972 में हुई, जो बारहसिंगा के लिए प्रसिद्ध है। 3. नवाबगंज पक्षी विहार (उन्नाव) की स्थापना 1984 में हुई थी और यह राज्य का पहला पक्षी विहार है। 4. सुहेलदेव वन्यजीव विहार की स्थापना 1988 में श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों में की गई थी।
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उत्तर प्रदेश के वन्यजीव विहारों (Wildlife Sanctuaries) और उनकी स्थापना वर्ष तथा भौगोलिक अवस्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. 'चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार' - चंदौली जिला (यह उत्तर प्रदेश का सबसे पहला/पुराना वन्यजीव विहार है, जिसकी स्थापना 1957 में की गई थी।)
2. 'हस्तिनापुर वन्यजीव विहार' - मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, गाजियाबाद और हापुड़ जिलों में विस्तृत (यह उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा वन्यजीव विहार है।)
3. 'किशनपुर वन्यजीव विहार' - लखीमपुर खीरी जिला (यह दुधवा टाइगर रिजर्व का हिस्सा है और मुख्य रूप से बारहसिंगा तथा बाघों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।)
4. 'कतरियाघाट वन्यजीव विहार' - बहराइच जिला (यह गिरवा नदी के तट पर स्थित है और यहाँ विशेष रूप से घड़ियाल तथा मगरमच्छ संरक्षण प्रजनन केंद्र संचालित किया जाता है।)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन सा/से सही सुमेलित है/हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के दौरान बालक में 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'आरक्षण/पलटावी गुण' (Reversibility) का विकास हो जाता है, जिससे वह किसी वस्तु या समस्या को केवल एक आयाम से देखने के बजाय उसके कई पहलुओं पर एक साथ विचार कर सकता है।
2. पियाजे के अनुसार 'स्किमा' (Schema) ज्ञान के संगठित पैटर्न या मानसिक संरचनाएँ होती हैं, जिनमें नए अनुभवों को शामिल करने की प्रक्रिया को 'समावेशन' (Assimilation) कहा जाता है, जबकि मौजूदा स्कीमा में बदलाव करके नए अनुभव के अनुकूल ढलने की प्रक्रिया को 'समायोजन' (Accommodation) कहा जाता है।
3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों का क्रम संवेदी-गामक अवस्था से शुरू होकर औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था पर समाप्त होता है, और इन चरणों की विकासात्मक अनुक्रमिकता (Developmental Sequence) सार्वभौमिक होती है, जिसे बदला या टाला नहीं जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा और अधिगम' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) के 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) तथा एडवर्ड डेसी (Edward Deci) और रिचर्ड रयान (Richard Ryan) के 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory - SDT: स्वायत्तता, सक्षमता, और संबद्धता) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रिगोमीडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (vmPFC), 'न्यूक्लियस एकुम्बेंस' (Nucleus Accumbens), और 'इंसुलर कॉर्टेक्स' (Insular Cortex) के बीच आंतरिक पुरस्कार प्रसंस्करण (Intrinsic Reward Processing), भावनात्मक नियमन (Emotional Regulation), और होमियोस्टैटिक ड्राइव की सक्रियण गतिकी, तथा विक्टर व्रूम (Victor Vroom) के 'प्रत्याशा सिद्धांत' (Expectancy Theory) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, ऑटोनॉमी-सपोर्टिव पेडागोजी (Autonomy-Supportive Pedagogy) और विद्यार्थियों में आंतरिक अभिप्रेरणा, लक्षित व्यवहार व समग्र मानसिक कल्याण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली, वैदिक काल और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक व दार्शनिक केंद्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के 'वाराणसी' (काशी) को प्राचीन काल से ही वेदों, उपनिषदों और दर्शनशास्त्र की उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है, जहाँ उपनिषद काल में काशिराज अजातशत्रु और दार्शनिक उद्दालक आरुणि जैसे विद्वानों की सभाओं का उल्लेख मिलता है।
2. 'नैमिषारण्य' (वर्तमान सीतापुर जिला), जिसका उल्लेख पुराणों में 80,000 ऋषियों की तपोभूमि के रूप में मिलता है, प्राचीन वैदिक संस्कृति और पुराणों के श्रवण-वाचन का एक अत्यंत पवित्र अरण्य (वन) केंद्र था।
3. बौद्ध काल में उत्तर प्रदेश के 'श्रावस्ती' स्थित जेतवन आर्म (Jetavana) और 'कौशाम्बी' स्थित घोषइटाराम विहार केवल धार्मिक गतिविधियों के केंद्र थे, और यहाँ किसी भी प्रकार की उच्च बौद्ध शिक्षा या तार्किक दर्शन की शिक्षा देने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण, पक्षी विहारों और उनके अवस्थिति जिलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बखिरा पक्षी विहार' उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में स्थित एक कृत्रिम झील पर बना हुआ पक्षी विहार है, जिसे हाल ही में अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट (Ramsar Site) के रूप में भी मान्यता दी गई है।
2. 'सुराहा ताल पक्षी विहार' उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित है, जिसे 'जय प्रकाश नारायण पक्षी विहार' के नाम से भी जाना जाता है।
3. 'ओखला पक्षी विहार' उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद जिलों की सीमा पर यमुना नदी के तट पर स्थित है, जो दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का एक प्रमुख जैव-विविधता केंद्र है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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