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बच्चों में नैतिक विकास के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत की 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) अवस्था के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सी प्रमुख विशेषताएँ सम्मिलित हैं? 1. इस स्तर पर व्यक्ति के नैतिक निर्णय बाहरी सामाजिक नियमों या अधिकार से स्वतंत्र होते हैं, और व्यक्ति अपने स्वयं के विवेक तथा सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर सही या गलत का निर्धारण करता है। 2. इस चरण के अंतर्गत आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) अवस्था में व्यक्ति यह समझता है कि कानून सामाजिक भलाई के लिए बनाए गए हैं, और यदि कोई कानून मानवाधिकारों का हनन करता है, तो उसमें परिवर्तन किया जा सकता है। 3. इस स्तर की अंतिम अवस्था 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principles Orientation) है, जहाँ व्यक्ति किसी बाहरी सजा या प्रशंसा के लिए नहीं, बल्कि अपने आंतरिक अंतरात्मा (Conscience) और न्याय, मानवाधिकार तथा समानता के सार्वभौमिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण कार्य करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के तीसरे और सर्वोच्च स्तर यानी 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality, जो लगभग 13 वर्ष से वयस्कता तक होती है) में व्यक्ति के नैतिक मूल्य आंतरिक हो जाते हैं। कथन 1 बिल्कुल सही है क्योंकि यहाँ निर्णय बाहरी सामाजिक दबाव से मुक्त होकर व्यक्तिगत विवेक और सार्वभौमिक सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि 'सामाजिक अनुबंध अभिविन्यास' (चरण 5) में व्यक्ति समझता है कि कानून लचीले समझौते हैं जिन्हें बदला जा सकता है यदि वे समाज के कल्याण या अधिकारों के विरुद्ध हों। कथन 3 भी पूर्णतः सत्य है क्योंकि 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (चरण 6) में व्यक्ति अपनी अंतरात्मा की आवाज और न्याय के सार्वभौमिक मानकों के अनुसार कार्य करता है, भले ही वह कानून के विरुद्ध क्यों न हो। अतः तीनों कथन सही हैं।
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