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Indian Polity
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प्रथम वित्त आयोग कब गठित हुआ?

Detailed Explanation

1951 में।
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→ भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) तथा अधीनस्थ न्यायपालिका से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ 'किसी अन्य प्रयोजन' के लिए भी अपने प्रादेशिक क्षेत्र के भीतर किसी व्यक्ति, प्राधिकारी या सरकार को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालय की यह रिट अधिकारिता उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक विस्तृत (Wider) है। 2. संविधान के अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर आने वाले सभी न्यायालयों और अधिकरणों (ट्रिब्यूनल) पर अधीक्षण की शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति के अंतर्गत उच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए भी अधीनस्थ न्यायपालिका के प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज की निगरानी कर सकता है। 3. संविधान के अनुच्छेद 233क के अंतर्गत राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग या पदोन्नति से संबंधित यदि कोई पूर्ववर्ती या भूतलक्षी (Retrospective) कार्रवाई उच्च न्यायालय से परामर्श किए बिना भी की गई हो, तो वह केवल इस आधार पर अवैध या शून्य घोषित नहीं की जा सकती है यदि उसमें अन्य सभी संवैधानिक औपचारिकताओं का पालन किया गया हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम और शहरी स्थानीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से संविधान में भाग IX-क जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत अनुच्छेद 243-Q में यह प्रावधान है कि प्रत्येक राज्य में संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, लघुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद और वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाएगा, बशर्ते राज्यपाल किसी औद्योगिक नगरी के लिए नगरपालिका के गठन से छूट दे सके। 2. संविधान की बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं की विधायी शक्तियों और उत्तरदायित्वों से संबंधित कुल 18 कार्यात्मक विषयों (Functional Items) का उल्लेख किया गया है, तथा इन विषयों के अंतर्गत आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करना और उनका क्रियान्वयन करना नगरपालिकाओं का दायित्व है। 3. इस संशोधन अधिनियम के तहत महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) के गठन का अनिवार्य प्रावधान किया गया है, जिसके सदस्यों की कुल संख्या में से कम से कम दो-तिहाई सदस्य महानगर क्षेत्र में स्थित नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और जिला पंचायतों के अध्यक्षों में से ही प्रत्यक्ष रूप से महानगर के मतदाताओं द्वारा चुने जाएंगे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत घोषित 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वित्तीय आपातकाल की घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसकी तिथि से दो महीने के भीतर अनुमोदन मिलना अनिवार्य है। 2. एक बार अनुमोदित होने के बाद, वित्तीय आपातकाल अनिश्चित काल के लिए तब तक लागू रहता है जब तक कि इसे राष्ट्रपति द्वारा वापस न लिया जाए। 3. वित्तीय आपातकाल के दौरान, राष्ट्रपति केंद्र और राज्यों की सेवा करने वाले सभी या किसी भी वर्ग के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में कटौती का निर्देश दे सकते हैं, जिसमें उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी शामिल हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से राष्ट्रपति द्वारा उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है, किंतु उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श लेना अनिवार्य संवैधानिक शर्त है। 2. अनुच्छेद 233 के अंतर्गत जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, और जिला न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायिक सेवा के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श के पश्चात नियमों के अनुसार की जाती है। 3. संविधान के अनुच्छेद 235 के अनुसार जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण (जिसमें posting, promotion और छुट्टी देना शामिल है) का अधिकार निहित रूप से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की विधायी, कार्यकारी और वीटो शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार जब कोई विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के पश्चात राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राष्ट्रपति को उस पर अपनी अनुमति देना या अनुमति रोक लेना या धन विधेयक को छोड़कर किसी अन्य विधेयक को संसद के पुनर्विचार के लिए वापस भेजना का अधिकार है, किंतु यदि संसद उस विधेयक को बिना किसी संशोधन के या संशोधन के साथ पुनः पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति को उस पर अनुमति देना अनिवार्य हो जाता है। 2. राष्ट्रपति की 'आधाकारी वीटो' (Pocket Veto) की शक्ति का आधार यह है कि संविधान में राष्ट्रपति द्वारा किसी विधेयक पर अनुमति देने या न देने के लिए कोई समय-सीमा (Time Limit) निर्धारित नहीं की गई है, जिसके कारण राष्ट्रपति अनिश्चित काल तक विधेयक को अपने पास रख सकते हैं, और इस वीटो शक्ति का प्रयोग सर्वप्रथम वर्ष 1986 में राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह द्वारा 'भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक' के संदर्भ में किया गया था। 3. संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित (Promulgate) करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति संसद के दोनों सदनों के सत्र में न होने पर ही प्रयोग की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया अध्यादेश संसद की पुनर्सवेतन बैठक शुरू होने के ठीक छह सप्ताह के भीतर संसद द्वारा अनुमोदित होना अनिवार्य होता है, अन्यथा वह स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।
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