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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, 'योग दर्शन' के प्रणेता महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित 'अष्टांग योग' के अंगों और उनके सही क्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महर्षि पतंजलि के योग सूत्र में वर्णित अष्टांग योग के आठ अंग क्रमशः इस प्रकार हैं: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।
- 2. अष्टांग योग के प्रथम पाँच अंग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार) 'बहिरंग साधना' (External Aids) कहलाते हैं, जिनका संबंध मुख्य रूप से शरीर, इंद्रियों और बाहरी वातावरण के नियंत्रण से है।
- 3.
अष्टांग योग के अंतिम तीन अंग (धारणा, ध्यान और समाधि) 'अंतरंग साधना' (Internal Aids) कहलाते हैं, जो मन की एकाग्रता और चेतना की उच्चतम अवस्था (समाधि) को प्राप्त करने के लिए आंतरिक रूप से अभ्यास किए जाते हैं, उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
व्याख्या: उपर्युक्त तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। महर्षि पतंजलि द्वारा रचित 'पातंजल योगसूत्र' भारतीय दर्शन के छह आस्तिक दर्शनों में से एक 'योग दर्शन' का मूल ग्रंथ है। इस दर्शन में चित्त की वृत्तियों के निरोध के लिए 'अष्टांग योग' (आठ अंग) का मार्ग बताया गया है। 1. अष्टांग योग के आठ अंग क्रमशः यम (सामाजिक अनुशासन), नियम (व्यक्तिगत अनुशासन), आसन (शारीरिक मुद्राएँ), प्राणायाम (श्वास पर नियंत्रण), प्रत्याहार (इंद्रियों का विषयों से प्रत्यावर्तन), धारणा (मन की एकाग्रता), ध्यान (अखंड चिंतन) और समाधि (परम चेतना में लीन होना) हैं, अतः पहला कथन सही है। 2. इन आठ अंगों में से पहले पाँच अंग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार) 'बहिरंग साधन' माने जाते हैं क्योंकि इनका संबंध शरीर और बाहरी परिवेश व इंद्रियों से होता है, अतः दूसरा कथन भी सही है। 3. अंतिम तीन अंग (धारणा, ध्यान और समाधि) को 'अंतरंग साधन' कहा जाता है क्योंकि ये सीधे तौर पर मन, बुद्धि और आत्मा की आंतरिक गहराइयों तथा मानसिक संयम से जुड़े होते हैं, अतः तीसरा कथन भी सही है। इसलिए सही विकल्प (d) है।
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