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UPTET
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प्राचीन भारतीय दर्शन प्रणालियों, उनके प्रणेताओं और मूल सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. न्याय दर्शन - महर्षि गौतम (तर्क, प्रमाण और प्रत्यक्ष-अनुमान आधारित यथार्थवादी ज्ञान) 2. वैशेषिक दर्शन - महर्षि कणाद (परमाणुवाद और पदार्थों के षड्धर्मों का सिद्धांत) 3. सांख्य दर्शन - महर्षि पतंजलि (पुरुष और प्रकृति के संयोग से सृष्टि की उत्पत्ति और योग का प्रतिपादन) उपर्युक्त युग्मों में से कौन सा/से सही सुमेलित है/हैं?

Detailed Explanation

युग्म 1 सही है: न्याय दर्शन के प्रवर्तक महर्षि गौतम (अक्षपाद) हैं, जो तर्क, प्रमाण (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द) और यथार्थवादी ज्ञान पर बल देते हैं। युग्म 2 सही है: वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कणाद हैं, जिन्होंने परमाणुवाद (Atomic Theory) और पदार्थों की छह श्रेणियों (द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय) का सिद्धांत दिया। युग्म 3 गलत है: सांख्य दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कपिल हैं, न कि महर्षि पतंजलि। महर्षि पतंजलि ने 'योग दर्शन' का प्रतिपादन किया था, जबकि सांख्य दर्शन पुरुष और प्रकृति के द्वैतवाद पर आधारित है।
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