BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

UPTET
17 views

बाल विकास के सिद्धांतों और अधिगम प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बाल विकास की प्रक्रिया निरंतरता के सिद्धांत (Principle of Continuity) का पालन करती है, जिसका अर्थ है कि यह प्रक्रिया गर्भधारण से शुरू होकर मृत्युपर्यंत चलती रहती है और इसमें कभी भी कोई आकस्मिक या अचानक परिवर्तन नहीं होता है।
  2. 2. विकास की गति व्यक्तिगत भिन्नताओं (Individual Differences) के कारण सभी बच्चों में एक समान नहीं होती है, लेकिन विकास का प्रतिरूप (Developmental Pattern) सभी सामान्य बच्चों में लगभग एक जैसा ही होता है, जैसे कि मस्तोमुखी क्रम (Cephalocaudal sequence) और निकट-दूर क्रम (Proximodistal sequence)।
  3. 3. अधिगम और परिपक्वता (Maturation) एक दूसरे से पूरी तरह स्वतंत्र प्रक्रियाएँ हैं, जहाँ परिपक्वता केवल जैविक और आनुवंशिक कारकों पर निर्भर करती है, और इस पर पर्यावरण, अभ्यास या अधिगम के अनुभवों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि विकास की प्रक्रिया निरंतर अवश्य होती है, परंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि इसमें कोई आकस्मिक परिवर्तन नहीं होता। किशोरावस्था (Adolescence) के दौरान होने वाले तीव्र शारीरिक और मानसिक परिवर्तन 'अचानक या तीव्र गति' (Spurt) के उदाहरण हैं। कथन 2 सही है क्योंकि विकास व्यक्तिगत भिन्नताओं के बावजूद एक निश्चित प्रतिरूप का अनुसरण करता है, जिसमें मस्तोमुखी (सिर से पैर की ओर) और निकट-दूर (केंद्र से बाहर की ओर) प्रवृत्तियाँ शामिल हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि परिपक्वता और अधिगम एक दूसरे से स्वतंत्र नहीं बल्कि घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं; परिपक्वता जैविक विकास का आधार प्रदान करती है, जबकि अधिगम उस परिपक्वता के स्तर पर आधारित होता है और पर्यावरण तथा अभ्यास दोनों ही परिपक्वता एवं विकास की गति को प्रभावित कर सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, भू-आकृतिक विभाजनों और जलवायु के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित 'भाबर' पेटी शिवालिक पहाड़ियों के पाद-प्रदेश में पश्चिम में सहारनपुर से लेकर पूर्व में कुशीनगर तक फैली हुई है, जहाँ नदियाँ कंकड़-पत्थरों के नीचे विलुप्त हो जाती हैं। 2. 'तराई' क्षेत्र भाबर के ठीक दक्षिण में स्थित एक दलदली और नम क्षेत्र है, जहाँ घने वनों के कटान के बाद कृषि विशेषकर धान और गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। 3. उत्तर प्रदेश का अधिकांश पठारी (बुंदेलखंड) क्षेत्र प्राचीन गोंडवाना लैंड की चट्टानों का हिस्सा है, जहाँ ग्रीष्मकाल में अत्यधिक तापमान और शीतकाल में सामान्य ठंड पड़ती है। 4. उत्तर प्रदेश में मानसूनी हवाओं से होने वाली वर्षा का वितरण पूर्व से पश्चिम और दक्षिण से उत्तर की ओर क्रमशः घटता जाता है, जिसके कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश की तुलना में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औसत वर्षा अधिक होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → उत्तर प्रदेश के भौतिक विभाजनों, भूगर्भिक संरचना और प्रमुख नदियों के प्रवाह तंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से तीन प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया जाता है—भाबर एवं तराई क्षेत्र, गंगा-यमुना का विशाल मैदान, और दक्षिण का पठारी (पर्वतीय) क्षेत्र। दक्षिण का पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का ही उत्तरward विस्तार है, जिसमें विंध्य पर्वत शृंखला की चट्टानें शामिल हैं। 2. उत्तर प्रदेश में बहने वाली 'बेतवा नदी' (जिसे वेत्रवती भी कहा जाता है) मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के कुमरागाँव से निकलती है और हमीरपुर जिले के निकट यमुना नदी में मिल जाती है, जबकि इसकी मुख्य सहायक नदी 'धसान' है। 3. राज्य में प्रवाहित होने वाली 'केन नदी' (जिसे कर्णवती भी कहा जाता है) कैमूर पहाड़ियों से निकलती है और बाँदा जिले के चिल्ला नामक स्थान पर यमुना नदी में मिलती है, और यह पन्ना राष्ट्रीय उद्यान से होकर प्रवाहित होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? → उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश को योजना आयोग द्वारा कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, और राज्य के दक्षिण के पठारी क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' और 'काबर' मृदाएँ चिकनी, उपजाऊ तथा अधिक नमी धारण करने वाली काली मिट्टी के समान होती हैं। 2. उत्तर प्रदेश में 'तराई क्षेत्र' (Terai Region) अपनी उच्च आर्द्रता और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी के कारण विशेष रूप से धान और गन्ने की सघन खेती के लिए जाना जाता है, जबकि इस क्षेत्र में धान की खेती के साथ-साथ उच्च जल स्तर के कारण कुछ भागों में जलीय वनस्पति और लंबे घास के मैदान भी पाए जाते हैं। 3. राज्य में 'अमरोहा', 'संभल' और 'बदायूं' जिलों को मुख्य रूप से 'मेंथा ऑयल' के उत्पादन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त है, और भारत के कुल मेंथा तेल उत्पादन का लगभग 80% हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश से ही प्राप्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भूगर्भीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा जनपद 'प्राचीन गोंडवाना लैंड' (Gondwana Land) का भू-भाग न होकर, उत्तर-पवित्र गंगा के मैदानी जलोढ़ निक्षेपों (Alluvial Deposits) से निर्मित सबसे नवीन भू-आकृतिक प्रदेश का हिस्सा माना जाता है? → उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा और अधिगम अक्षमता (ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर - ASD)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, साइमन बैरन-कोहेन (Simon Baron-Cohen) द्वारा प्रतिपादित 'एम्पैथी-सिस्टमेटाइजिंग थ्योरी' (Empathy-Systematizing Theory) के अंतर्गत मस्तिष्क के 'मीडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (mPFC), 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्カス' (STS) और 'अमिगडाला' के बीच सामाजिक-संवेगात्मक अनुनाद, मानसिककरण (Mentalizing) और नियम-आधारित प्रणालीकरण की सक्रियण विसंगति, तथा उता फ्रिथ (Uta Frith) और फ्रान्सेस्का हाप्पे (Francesca Happé) द्वारा प्रतिपादित 'थ्योरी ऑफ माइंड (ToM) डेफिसिट मॉडल' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, संरचित दृश्य शिक्षाशास्त्र (Structured Visual Pedagogy -जैसे TEACCH फ्रेमवर्क) और विद्यार्थियों में सामाजिक-सञ्चार कौशल, अनुकूली व्यवहार व समग्र तार्किक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.