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उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प, एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना और भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त शिल्पों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'बनारसी ब्रोकेड और साड़ियाँ' और 'भदोही के कालीन (Carpet)' उत्तर प्रदेश के ऐसे प्रसिद्ध शिल्प हैं जिन्हें भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्रदान किया गया है, और भदोही को भारत की 'कालीन नगरी' के रूप में जाना जाता है।
- 2. 'मुरादाबाद' जिला धातु शिल्प (पीतल के बर्तन और कलाकृतियों) के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जिसे एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत मुरादाबाद के लिए चयनित किया गया है, और इसे 'पीतल नगरी' भी कहा जाता है।
- 3. 'लखनऊ की चिकनकारी' और 'मृदा शिल्प (Terracotta) गोरखपुर' दोनों को भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त नहीं हैं, क्योंकि ये पूरी तरह से हस्तनिर्मित न होकर मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर उत्पादित किए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: वाराणसी के बनारसी ब्रोकेड/साड़ियों और भदोही के कालीनों को उनके पारंपरिक और विशिष्ट स्वरूप के लिए जीआई (GI) टैग मिला हुआ है। भदोही को कालीन नगरी कहा जाता है। कथन 2 सही है: मुरादाबाद अपने बेहतरीन पीतल शिल्प और बर्तनों के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है, जिसे ODOP योजना के तहत मुरादाबाद जिले की पहचान बनाया गया है और इसे 'पीतल नगरी' भी कहते हैं। कथन 3 गलत है: लखनऊ की 'चिकनकारी' (कसीदाकारी) और गोरखपुर के 'टेराकोटा' (मृदा शिल्प) दोनों को ही आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त है, और ये पूरी तरह से पारंपरिक हस्तशिल्प हैं न कि मशीनी उत्पाद।
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बच्चों (चाहे वे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक रूप से किसी भी वर्ग के हों) को एक साथ समान शिक्षा प्रदान करना है, जिसमें विशेष आवश्यकता वाले बालकों के लिए पाठ्यक्रम या शिक्षण विधि में आवश्यक लचीलापन लाया जाता है।
2. भारतीय संदर्भ में निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) की धारा 3 और 29 यह सुनिश्चित करती है कि प्रारंभिक स्तर पर प्रत्येक बच्चे को उसकी विकलांगता के प्रकार के बावजूद समीप के विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण और भेदभाव-रहित शिक्षा प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार है।
3. समावेशी शिक्षा 'एकीकृत शिक्षा' (Integrated Education) से भिन्न है, क्योंकि एकीकृत शिक्षा में बच्चों को सामान्य विद्यालयों में समायोजित तो किया जाता है, परंतु विद्यालय को स्वयं बच्चों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी संरचना और प्रणालियों में परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं होती, जबकि समावेशी शिक्षा पूरी तरह से विद्यालय प्रणाली के लचीलेपन पर बल देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायु विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से तीन प्रमुख प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है - भावर एवं तराई क्षेत्र, गंगा-यमुना का विशाल मैदान, और दक्षिण का पठारी क्षेत्र।
2. राज्य के दक्षिण का पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का ही उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जिसके अंतर्गत झाँसी, ललितपुर, महोबा, बांदा और सोनभद्र जैसे जिले आते हैं, और यहाँ की मुख्य नदियाँ बेतवा, केन तथा सोन हैं।
3. 'भावर' क्षेत्र महीन कणों वाली उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी का मैदान है, जहाँ नदियाँ सतह पर बहती हैं और कृषि के लिए यह क्षेत्र सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के संज्ञानात्मक-व्यवहारवादी सिद्धांतों और स्व-नियामक शिक्षण' के संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) द्वारा प्रतिपादित 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Social Cognitive Theory) के अंतर्गत 'अवलोकन आधिगम' (Observational Learning) के चार प्रमुख प्रक्रियाओं—'अवधान' (Attention), 'धारण' (Retention), 'उत्पादन' (Reproduction), और 'अभिप्रेरणा' (Motivation)—के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (Mirror Neuron System - MNS) और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' की अनुकरण एवं तदनुकूल क्रियात्मक सक्रियण गतिकी, तथा बैरी जिमरमैन (Barry Zimmerman) द्वारा प्रतिपादित 'स्व-नियमन अधिगम चक्र' (Self-Regulated Learning Cycle) के अंतर्गत 'पूर्वानुमान चरण' (Forethought Phase), 'निष्पादन चरण' (Performance Phase), और 'आत्म-चिंतन चरण' (Self-Reflection Phase) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मेटाकॉग्निटिव रणनीतियों और विद्यार्थियों में स्वायत्त अधिगम दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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बुद्धि की संरचना (Structure of Intellect - SOI) के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बुद्धि के त्रि-आयामी (Structure of Intellect) मॉडल का प्रतिपादन जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा किया गया था, जिन्होंने मानसिक क्षमताओं को तीन स्वतंत्र आयामों - विषय-वस्तु (Contents), संक्रियाएँ (Operations), और उत्पाद (Products) में वर्गीकृत किया है।
2. गिलफोर्ड के प्रारंभिक मॉडल के अनुसार, बुद्धि कुल 4×5×6 = 120 स्वतंत्र बौद्धिक कारकों (Factors) से मिलकर बनी थी, जिसे बाद में संशोधित करके कुल 150 और अंततः 180 कारकों तक विस्तारित किया गया।
3. इस सिद्धांत के अंतर्गत 'विषय-वस्तु' (Contents) आयाम के भीतर सांकेतिक (Symbolic), प्रतीकात्मक, व्यवहारपरक (Behavioral) और आकृतिक (Figural) जैसी मानसिक सामग्रियां शामिल होती हैं, जिन पर मस्तिष्क की संक्रियाएँ कार्य करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'व्यक्तित्व मापन' (Personality Assessment) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक हरमन रोर्शच (Hermann Rorschach) द्वारा 1921 में विकसित 'स्याही धब्बा परीक्षण' (Inkblot Test) के अंतर्गत, जब कोई परीक्षार्थी (Subject) किसी कार्ड पर बने स्याही के धब्बे के केवल किसी छोटे और विशिष्ट हिस्से (Detail) का उत्तर देता है, तो इस प्रकार की अनुक्रिया का विश्लेषण करते समय मनोवैज्ञानिक इसे मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस संकेतक या श्रेणी से संबंधित मानते हैं?
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