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UPTET
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और मध्यकालीन (मुस्लिम) शिक्षा प्रणाली की प्रमुख शिक्षण संस्थाओं, उनके पाठ्यक्रमों तथा प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली में उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए 'मदरसा' (Madarsa) संस्थाएँ होती थीं, जहाँ पाठ्यक्रम में 'नकली' (धार्मिक विज्ञान जैसे कुरान, हदीस, फिकह) और 'अकली' (तर्कशास्त्र, दर्शन, गणित, चिकित्सा) दोनों प्रकार के विषयों की शिक्षा दी जाती थी, और अध्ययन की समाप्ति पर छात्रों को 'सनद' या 'डिग्री' प्रदान की जाती थी। 2. बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में संघ के नियमों और अनुशासन से जुड़े मामलों को सुलझाने और किसी छात्र के प्रवेश या निष्कासन के लिए 'प्रवारणा' (Pravarna) नामक औपचारिक बैठक का आयोजन किया जाता था, जो वर्षा ऋतु के समापन पर होती थी। 3. तक्षशिला विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 16 वर्ष निर्धारित थी, और यहाँ विभिन्न विषयों के अध्ययन के लिए शुल्क देना अनिवार्य था, तथा धनी वर्ग के छात्र फीस देकर तुरंत प्रवेश पा लेते थे, जबकि गरीब छात्र अपनी मेधा के बल पर विशेष परीक्षाओं के माध्यम से निशुल्क प्रवेश प्राप्त कर सकते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली में उच्च शिक्षा के केंद्र 'मदरसा' कहलाते थे, जिनमें धार्मिक (नकली) और तार्किक/लौकिक (अकली) दोनों प्रकार के पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते थे और पाठ्यक्रम पूरा होने पर 'सनद' दी जाती थी। कथन 2 गलत है क्योंकि 'प्रवारणा' वर्षा ऋतु (वर्षावास) के अंत में भिक्षुओं द्वारा अपनी भूलों को स्वीकार करने का एक अनुष्ठानिक अवसर था, जबकि संघ के प्रशासनिक व अनुशासनिक कार्यों के लिए 'उवसम्पदा' या 'कर्मवाचन' जैसी प्रक्रियाएँ थीं। कथन 3 बिल्कुल सही है; तक्षशिला विश्वविद्यालय में प्रवेश की आयु सामान्यतः 16 वर्ष थी और वहाँ शिक्षा शुल्क का प्रावधान था, जहाँ धनी छात्र फीस देते थे और मेधावी गरीब छात्र निशुल्क शिक्षा प्राप्त करते थे। अत: सही विकल्प (c) है।
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