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बच्चों के सामाजिक और नैतिक विकास के संदर्भ में, जीन पियाजे और लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांतों के बीच निम्नलिखित में से कौन सा मुख्य सैद्धांतिक अंतर सही रूप से रेखांकित करता है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे ने बच्चों के नैतिक विकास का अध्ययन करते हुए बताया कि छोटे बच्चे नियमों को अपरिवर्तनीय और ईश्वर प्रदत्त मानते हैं (नैतिक यथार्थवाद - Moral Realism), जो वयस्कों के दबाव के कारण होता है। बाद में वे यह समझते हैं कि नियम आपसी सहयोग और समझौते से बनाए जाते हैं (नैतिक स्वायत्तता - Moral Autonomy)। वहीं, लॉरेंस कोहलबर्ग ने पियाजे के विचारों को आगे बढ़ाते हुए संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) को आधार बनाकर नैतिक तर्क के 3 स्तर और 6 चरण दिए, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि जैसे-जैसे बालक का संज्ञानात्मक स्तर और सामाजिक परिप्रेक्ष्य लेने की क्षमता (Social Perspective-Taking) बढ़ती है, वैसे-वैसे उसकी नैतिक तार्किकता अधिक परिपक्व और सार्वभौमिक होती जाती है। अतः विकल्प (अ) इन दोनों सिद्धांतों के बीच सबसे सटीक और सैद्धांतिक अंतर को दर्शाता है।
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