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उत्तर प्रदेश के खनिज संसाधनों, उनके प्राप्ति स्थलों और उद्योग-धंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में देश के सबसे बड़े स्वर्ण भंडार होने के साथ-साथ राज्य का प्रमुख चूना पत्थर, कोयला और नॉन-प्लास्टिक फायर क्ले भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  2. 2. मिर्जापुर जिले का कछवां क्षेत्र और सोनभद्र का चुर्क एवं डाला क्षेत्र सीमेंट उद्योग के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, क्योंकि यहाँ सीमेंट निर्माण के लिए आवश्यक कच्चा माल यानी चूना पत्थर आसानी से उपलब्ध है।
  3. 3. उत्तर प्रदेश में 'यूरेनियम' का एकमात्र भंडार ललितपुर जिले में पाया जाता है, जबकि 'डोलमाइटर' के प्रमुख निक्षेप बांदा और मिर्जापुर जिलों में स्थित हैं।
  4. 4. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य की पहली खनिज नीति वर्ष 1998 में घोषित की गई थी, जिसके तहत खनिज बहुल जिलों को 'औद्योगिक जिले' के रूप में घोषित कर खनिज विकास को बढ़ावा दिया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन उत्तर प्रदेश के खनिज संसाधनों और उनसे संबंधित उद्योगों के संदर्भ में पूरी तरह सही हैं। 1. सोनभद्र जिले में हाल ही में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) द्वारा स्वर्ण भंडार की खोज की गई है और यहाँ चूना पत्थर, कोयला (सिंगरौली क्षेत्र) व नॉन-प्लास्टिक फायर क्ले प्रचुर मात्रा में मिलता है। 2. मिर्जापुर (कछवां) और सोनभद्र (चुर्क, डाला, रोहतास) सीमेंट उद्योग के प्रमुख केंद्र हैं क्योंकि यहाँ चूना पत्थर की उपलब्धता प्रचुर है। 3. उत्तर प्रदेश में यूरेनियम का एकमात्र भंडार ललितपुर जिले में पाया जाता है, और डोलमाइट के मुख्य निक्षेप बांदा, मिर्जापुर व सोनभद्र में मिलते हैं। 4. उत्तर प्रदेश की पहली खनिज नीति 29 दिसंबर 1998 को घोषित की गई थी, जिसमें खनिज बहुल जिलों (जैसे सोनभद्र, मिर्जापुर, ललितपुर, बाँदा आदि) को औद्योगिक जिला घोषित किया गया था।
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