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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संविधान के निर्वाचन के सिद्धांतों' तथा 'संघीय व्यवस्था' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 131 भारत संघ और एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी भी कानूनी विवाद के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय को अनन्य मूल अधिकारिता (Exclusive Original Jurisdiction) प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत राजनीतिक विवादों और व्यक्तिगत नागरिकों द्वारा राज्यों के विरुद्ध दायर किए गए मुकदमों को भी सीधे शामिल किया जाता है।
- 2. 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) की अवधारणा को भारतीय संविधान की प्रस्तावना और विभिन्न प्रावधानों में अंतर्निहित माना गया है, और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय संघवाद अमेरिकी मॉडल की तरह राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक अविभाज्य संघ (Indestructible Union of Destructible States) है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 245 और 246 के अंतर्गत संसद और राज्यों के विधानमंडलों की कानून बनाने की विधायी शक्तियों का क्षेत्रीय और विषय-वस्तु के आधार पर विभाजन किया गया है, जिसके तहत यदि समवर्ती सूची (Concurrent List) के किसी विषय पर राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून संसद द्वारा बनाए गए पूर्ववर्ती कानून के प्रतिकूल या असंगत है, तो अनुच्छेद 254 के अनुसार राज्य का कानून पूर्ण रूप से शून्य हो जाएगा, भले ही उसे राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हुई हो या नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 131 के तहत सर्वोच्च न्यायालय की अनन्य मूल अधिकारिता (Exclusive Original Jurisdiction) केवल उन कानूनी विवादों पर लागू होती है जिनका संबंध किसी कानूनी अधिकार के अस्तित्व या सीमा से हो। इसमें राजनीतिक विवाद या व्यक्तिगत नागरिकों या निजी कंपनियों द्वारा राज्यों के विरुद्ध दायर किए गए मुकदमे शामिल नहीं होते हैं। इसके अलावा, यदि कोई निजी नागरिक राज्य के खिलाफ मुकदमा करता है, तो अनुच्छेद 131 लागू नहीं होता।
कथन 2 सही है। भारतीय संविधान का संघीय ढांचा अमेरिकी संघवाद से भिन्न है। यह कैनेडियन मॉडल पर आधारित एक 'अविभाज्य संघ है जिसमें राज्यों का कोई विनाश संभव है' (Indestructible Union of Destructible States)। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों में 'सहकारी संघवाद' को संविधान के बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना है।
कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 254(2) के अनुसार, यदि समवर्ती सूची के किसी विषय पर राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून संसद के कानून के प्रतिकूल है, तो सामान्य स्थिति में संसद का कानून मान्य होगा और राज्य का कानून असंगत सीमा तक शून्य होगा। परंतु, यदि ऐसा राज्य कानून राज्य के विधानमंडल द्वारा पारित किए जाने के बाद 'राष्ट्रपति की अनुमति' (Assent of the President) के लिए आरक्षित रखा जाता है और राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति दे देते हैं, तो वह कानून उस राज्य में प्रभावी बना रहता है, भले ही वह संसद के कानून के प्रतिकूल हो (बशर्ते संसद बाद में उसी विषय पर संशोधन करके नया कानून न बना दे)। इसलिए कथन 3 में 'भले ही उसे राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हुई हो या नहीं' वाक्यांश इसे गलत बनाता है।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ध्वनि तरंगों के समान होती हैं और ठोस, तरल तथा गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, हालांकि तरल माध्यम में प्रवेश करने पर इनकी गति कम हो जाती है।
2. 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं, जिनकी प्रकृति प्रकाश तरंगों जैसी होती है, तथा ये केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं और तरल या गैसीय माध्यम में प्रवेश करते ही लुप्त हो जाती हैं, जिसका उपयोग वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के बाहरी क्रोड़ (Outer Core) के तरल होने का पता लगाने के लिए किया है।
3. धरातल पर सबसे अंत में पहुँचने वाली 'सतह तरंगें' (Surface Waves या L-waves) सबसे कम विनाशकारी होती हैं, क्योंकि इनकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य बहुत अधिक होती है, जिसके कारण ये केवल पृथ्वी के क्रस्ट (Crust) तक ही सीमित रहती हैं और आंतरिक भागों को प्रभावित नहीं करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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OpenAI ने भारत में अपना प्रबंध निदेशक किसे नियुक्त किया है?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली' (Public Distribution System - PDS) और 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013' (NFSA) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 देश की ग्रामीण आबादी के 75% और शहरी आबादी के 50% हिस्से को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के माध्यम से रियाइती दरों पर खाद्यान्न प्राप्त करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है, जिसके तहत पात्र व्यक्तियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न (चावल, गेहूं और मोटे अनाज) क्रमशः 3, 2 और 1 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिलता है।
2. इस अधिनियम के तहत आने वाले 'अंत्योदय अन्न योजना' (AAY) परिवारों को, जो सबसे गरीब परिवारों की श्रेणी में आते हैं, उनकी प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न की पात्रता को पूर्ववत सुरक्षित रखा गया है।
3. NFSA, 2013 के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों की पहचान करने और सूची तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की होती है, जो सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) के आंकड़ों के आधार पर सीधे तौर पर राज्यों को लाभार्थियों का आवंटन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' (Article 32) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की 'रिट अधिकारिता' और 'लोकहित याचिका' (PIL - Public Interest Litigation) की अवधारणा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोकहित याचिका (PIL) की अवधारणा को भारतीय न्यायशास्त्र में पारंपरिक 'लॉन्ग स्टैंडी' (Locus Standi - यानी केवल पीड़ित व्यक्ति द्वारा ही अदालत जाने का अधिकार) के नियम को शिथिल करके विकसित किया गया है, जिसके तहत कोई भी सार्वजनिक हितैषी व्यक्ति या संस्था समाज के उपेक्षित या पीड़ित वर्गों की ओर से अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।
2. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय किसी भी लोकहित याचिका पर सुनवाई करने से यह कहकर मना कर सकता है कि याचिकाकर्ता स्वयं उस मामले से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित (Directly Affected) नहीं है।
3. 'एस.पी. गुप्ता बनाम भारत संघ (1981)' के ऐतिहासिक मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या सामाजिक संगठन किसी जनहित के मुद्दे पर पत्र या टेलीग्राम के माध्यम से भी अदालत को सूचित करता है, तो न्यायालय उसे एक रिट याचिका के रूप में स्वीकार कर सकता है।
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उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
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