त्वरित लिंक्स
Civil services
17 views
भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संघीय प्रणाली' (Federal System) और राज्यपाल की विधायी शक्तियों से जुड़े 'अध्यादेश' (Ordinance - Article 213) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के विश्रामकाल के दौरान अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति राज्य सूची तथा समवर्ती सूची के उन सभी विषयों तक विस्तारित है जिन पर राज्य विधानमंडल कानून बना सकता है, बशर्ते कि इसके लिए राष्ट्रपति के पूर्व निर्देशों (Prior Instructions) की कुछ विशेष परिस्थितियों में आवश्यकता होती हो।
- 2. राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित प्रत्येक अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के पुनः समवेत होने पर उसके समक्ष रखा जाना अनिवार्य है, और यदि राज्य विधानमंडल बिना किसी अनुमोदन के अध्यादेश को अस्वीकार कर देता है या छह सप्ताह की अवधि समाप्त हो जाती है, तो वह अध्यादेश स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।
- 3. 'डी.सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987)' वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया कि राज्यपाल द्वारा अध्यादेशों का पुनरावृत्ति (Re-promulgation) के माध्यम से लगातार अनिश्चित काल तक प्रचालन करना संविधान की विधायी प्रक्रिया और संघवाद की भावना के विरुद्ध है, तथा यह कार्यपालिका की शक्ति का अवैध अतिक्रमण (Fraud on Constitution) माना जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के विश्रामकाल के दौरान अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है। यह शक्ति राज्य सूची और समवर्ती सूची तक विस्तारित है। कुछ विशेष मामलों में (जैसे कि ऐसे विषय जिन पर विधेयक पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है), राज्यपाल राष्ट्रपति के निर्देशों के बिना अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता है। कथन 2 सही है: राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश को विधानमंडल के पुनः समवेत होने पर सदन के समक्ष रखना अनिवार्य है। यदि विधानमंडल इसे अस्वीकार कर दे या सदन के बैठने से छह सप्ताह की अवधि बीत जाए, तो अध्यादेश समाप्त हो जाता है। कथन 3 सही है: डी.सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987) के ऐतिहासिक मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाया था कि कार्यपालिका द्वारा अध्यादेशों को बार-बार पुनर्रेषित (Re-promulgate) करके कानून बनाने की शक्ति का दुरुपयोग करना और विधानमंडल की अनुमति के बिना अनिश्चित काल तक शासन चलाना असंवैधानिक है। अत: तीनों कथन सही हैं।
Related Questions
→
नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन द्वारा प्राप्त हुआ?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (संघ और राज्यों के बीच विधायी संबंध - अनुच्छेद 245 से 255) तथा अवशिष्ट शक्तियों (Residuary Powers) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार संसद को किसी ऐसे विषय के संबंध में जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में प्रगणित नहीं है, विधि बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, और इस अवशिष्ट शक्ति (Residuary Power) के अंतर्गत कर लगाने की शक्ति भी स्पष्ट रूप से संसद में ही निहित की गई है।
2. भारत के संविधान में अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ केंद्र सरकार (संसद) को प्रदान की गई हैं, जो कि अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई संविधान की संघीय प्रणाली के समरूप है, जहाँ राज्यों के पास अवशिष्ट शक्तियां होती हैं, जबकि कनाडा के संविधान में यह शक्ति केंद्र के पास निहित है।
3. यदि राज्य सूची (सूची-II) में प्रगणित किसी विषय पर राष्ट्रीय हित में विधि बनाने के लिए राज्य सभा अपने उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से कोई संकल्प पारित कर देती है, तो संसद को उस विषय पर पूरे भारत या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम तीन वर्ष की अवधि तक प्रवृत्त रह सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
पृथ्वी को अपने अक्ष पर 1° घूमने में कितना समय लगता है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' तथा इसके न्यायिक दायरे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को उन सभी मामलों में, जिनमें दंड या दंडादेश ऐसे विषय के विरुद्ध किसी विधि के तहत दिया गया है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार प्रदान करने या दंडादेश को निलंबित, परिहरित या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए सभी दंड भी शामिल हैं।
2. 'मार्-नंदन बनाम भारत संघ (1980)' और 'एकीकृत मानवीय बनाम भारत संघ' मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति अपनी क्षमादान शक्ति का प्रयोग अपनी व्यक्तिगत या स्वविवेकपूर्ण निर्णय (Discretionary Power) के आधार पर करते हैं, और इसके लिए केंद्रीय मंत्रिपरिषद की 'सहायता और सलाह' (Aid and Advice) लेना संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है।
3. 'इरम खातून बनाम भारत संघ' तथा अन्य संबंधित न्यायिक निर्णयों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) पूरी तरह से वर्जित है, और यदि राष्ट्रपति किसी दया याचिका पर निर्णय लेने में अत्यधिक देरी भी करते हैं, तो न्यायालय उस निर्णय के विरुद्ध कोई भी रिट या निर्देश जारी नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots) की अवधारणा और भारत में उनकी स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' की अवधारणा सबसे पहले ब्रिटिश पर्यावरणविद् नॉर्मन मायर्स (Norman Myers) द्वारा वर्ष 1988 में प्रतिपादित की गई थी, जिसके तहत किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट घोषित करने के लिए दो मुख्य शर्तें अनिवार्य हैं: उस क्षेत्र में पौधों की कम-से-कम 1,500 स्थानिक (Endemic) प्रजातियों का होना तथा उस क्षेत्र की अपनी मूल प्राकृतिक वनस्पति का कम-से-कम 70 प्रतिशत भाग नष्ट हो चुका हो (यानी वह गंभीर रूप से संकटग्रस्त हो)।
2. विश्व स्तर पर वर्तमान में कुल 36 मान्यता प्राप्त जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं, जिनमें से संपूर्ण भारतीय भू-भाग के अंतर्गत केवल दो ही हॉटस्पॉट आते हैं—'पश्चिमी घाट' (Western Ghats) और 'पूर्वी हिमालय' (Eastern Himalayas), तथा भारत के किसी भी अन्य क्षेत्र या द्वीप समूह को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है।
3. 'अंडमान और निकोबार द्वीप समूह' यद्यपि सुंडाकलैंड (Sundaland) जैव विविधता हॉटस्पॉट के भौगोलिक दायरे के अंतर्गत आते हैं, किंतु भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की आधिकारिक नीतियों के कारण इन्हें वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट की सूची से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.