त्वरित लिंक्स
Indian Polity
30 views
न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) का अर्थ क्या है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कानूनों की संवैधानिकता की जांच करना न्यायिक पुनरावलोकन है।
Related Questions
→
राष्ट्रपति का चुनाव किस तरह का होता है?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की शक्तियों, क्षेत्राधिकार और कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय के मूल (Original) क्षेत्राधिकार के अंतर्गत भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या एक तरफ भारत सरकार और कोई राज्य तथा दूसरी तरफ एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी विवाद का समाधान शामिल है, किंतु इस क्षेत्राधिकार में किसी संधि, समझौते या प्रसंविदा (Covenant) से उत्पन्न होने वाले विवाद पूरी तरह से अपवर्जित (Excluded) हैं।
2. संविधान के अनुच्छेद 143 के माध्यम से राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि राष्ट्रपति किसी सार्वजनिक महत्व के विधि या तथ्य के प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय मांगते हैं, तो उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य (Mandatory) होता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को अपनी द्वारा दिए गए किसी निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन (Review) करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके अलावा अनुच्छेद 142 के अंतर्गत न्यायालय को यह असाधारण शक्ति प्रदत्त है कि वह अपने समक्ष लंबित किसी वाद या मामले में पूर्ण न्याय (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक ऐसा कोई भी डिक्री पारित कर सकता है या आदेश दे सकता है जो भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवर्तननीय हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 67 के अनुसार, उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्य सभा द्वारा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित ऐसे संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है जिससे लोक सभा सहमत हो, किंतु इस प्रकार के संकल्प को प्रस्तुत करने के लिए चौदह दिन की पूर्व लिखित सूचना देना अनिवार्य है और लोक सभा की इस संदर्भ में सहमति केवल साधारण बहुमत से ही अपेक्षित होती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 75(1ए) के अनुसार, मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोक सभा के सदस्यों की कुल संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और यह प्रावधान 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा अंतर्स्थापित किया गया था, जो केंद्र के साथ-साथ राज्यों की मंत्रिपरिषद पर भी समान रूप से लागू होता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन संबंधी और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, तथा यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना मांगता है, तो प्रधानमंत्री उसे उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है, भले ही संबंधित विषय पर मंत्रिपरिषद द्वारा सामूहिक रूप से कोई निर्णय न लिया गया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?
→
संविधान के भाग 4A में क्या है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.