BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
1 views

भारतीय कला, वास्तुकला और प्राचीन इतिहास के संदर्भ में, मौर्योत्तर काल (Post-Maurya Period) की विभिन्न कला शैलियों—विशेष रूप से गांधार, मथुरा और अमरावती कला—के लक्षणों और दार्शनिक पृष्ठभूमियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गांधार कला शैली पर यूनानी (हेलेनिस्टिक) प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसके तहत बुद्ध की मूर्तियों में अपोलो देवता जैसी शारीरिक बनावट, घुंघराले बाल, मांसपेशियों का यथार्थवादी अंकन और पारदर्शी ग्रीक वस्त्रों (Chiton) जैसी विशेषताओं को दर्शाया गया है।
  2. 2. मथुरा कला शैली पूरी तरह से स्वदेशी थी और इसमें लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) का उपयोग किया गया; इस शैली में बुद्ध के साथ-साथ जैन तीर्थंकरों और हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों का भी बहुतायत में निर्माण हुआ, तथा इसमें प्रारंभिक भारतीय मूर्तिकला की कामुकता और प्रतीकात्मकता का प्रभाव झलकता है।
  3. 3. अमरावती कला शैली, जो मुख्य रूप से सातवाहन शासकों के संरक्षण में कृष्णा-गोदबारी घाटी में फली-फूलि, ने सफेद संगमरमर (White Marble) का व्यापक उपयोग किया और इसमें बुद्ध के जीवन की कथाओं (जातक कथाओं) को आख्यानात्मक (Narrative) रूप में उकेरने पर विशेष बल दिया गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: गांधार कला शैली (उत्तर-पश्चिम भारत) ग्रीक और रोमन कला से अत्यधिक प्रभावित थी (हेलेनिस्टिक प्रभाव)। इसमें बुद्ध को आध्यात्मिक और यथार्थवादी रूप में प्रस्तुत किया गया है, जहाँ उनके बाल घुंघराले, चेहरे पर शांत भाव और शरीर पर ग्रीक वस्त्र जैसी सिलवटें दिखाई देती हैं। कथन 2 सही है: मथुरा कला पूर्णतः स्वदेशी थी और इसमें सिकरी के चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया। यह कला बौद्ध धर्म के साथ-साथ जैन धर्म और ब्राह्मणवादी (हिंदू) परंपराओं से भी जुड़ी थी, जिसमें यक्ष, यक्षिणी और देवी-देवताओं की मूर्तियां भी बनाई गईं। कथन 3 सही है: अमरावती कला दक्षिण भारत में सातवाहन राजवंश के संरक्षण में विकसित हुई। इसमें मुख्य रूप से सफेद संगमरमर (पैलियोजोइक लाइमस्टोन) का प्रयोग किया गया और यह जातक कथाओं के विस्तृत और गतिशील आख्यानों (Narratives) के लिए जानी जाती है।
Share:

Related Questions

राज्यसभा का कार्यकाल क्या होता है? दिल्ली सल्तनत में 'टंका' (चांदी) और 'जीतल' (तांबा) के सिक्के किस शासक ने चलाए थे? अमीर खुसरो की प्रसिद्ध रचना 'खज़ाइन-उल-फ़ुतू' में किसका वर्णन है? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के तहत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (Pardoning Power) और 'अनुच्छेद 161' के तहत राज्यपाल की क्षमादान शक्ति के बीच तुलनात्मक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति का दायरा उन मामलों तक विस्तारित है जहाँ सजा या दंड ऐसे कानून के विरुद्ध दिए गए अपराध के लिए हो जो संघ की कार्यकारी शक्ति के विस्तार क्षेत्र में आता है, जबकि राज्यपाल के पास मृत्युदंड (Death Sentence) को क्षما करने की वैधानिक शक्ति कभी नहीं होती है, भले ही संबंधित राज्य का कानून मृत्युदंड का प्रावधान करता हो। 2. न्यायालय द्वारा दी गई किसी भी सैन्य अदालत या कोर्ट-मार्शल (Court-martial) द्वारा दिए गए दंड या सजा के मामले में राष्ट्रपति को क्षमादान, प्रविलंबन या परिहार देने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, जबकि राज्यपाल को कोर्ट-मार्शल के निर्णयों के विरुद्ध ऐसी कोई शक्ति प्राप्त नहीं है। 3. उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के अनुसार, राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों की क्षमादान शक्तियों के प्रयोग की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की जा सकती है, और यदि यह पाया जाता है कि निर्णय बिना किसी युक्तियुक्त आधार के, या राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर, या प्रासंगिक तथ्यों को नजरअंदाज करके लिया गया है, तो न्यायालय उस आदेश को रद्द कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय इतिहास के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान मुद्रा प्रणाली और आर्थिक सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने विशुद्ध अरबी सिक्के चलवाए, और उसने सल्तनत की दो मुख्य आधारभूत मुद्राओं—चांदी का टंका (Tanka) और तांबे का जीतल (Jital)—को प्रारंभ किया, तथा टंके में चांदी का मानक वजन लगभग 175 ग्रेन निर्धारित किया। 2. मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा शुरू की गई 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) प्रणाली के असफल होने का एक प्रमुख कारण यह था कि राज्य द्वारा सिक्कों के डिजाइन और उत्पादन पर एकाधिकार स्थापित नहीं किया जा सका, जिससे लोगों ने बड़े पैमाने पर घरों में ही तांबे और पीतल के जाली या नकली सिक्के ढालना शुरू कर दिया और राजकोष को भारी नुकसान हुआ। 3. शेरशाह सूरी (हालाँकि वह सूरी वंश से था, किंतु उसने सल्तनत और मुगल काल के मध्य प्रशासनिक प्रणालियों को सुधारा) द्वारा जारी किया गया 'रुपया' नामक चांदी का सिक्का इतना अधिक लोकप्रिय हुआ कि वह ब्रिटिश काल तक भारतीय मुद्रा प्रणाली का मानक बना रहा, जिसका वजन लगभग 178 ग्रेन था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.