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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 355 के अंतर्गत 'संघ के कर्तव्य' (Duty of the Union) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस अनुच्छेद के अनुसार, संघ का यह कर्तव्य है कि वह बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति (Internal Disturbance) से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे।
  2. 2. इस प्रावधान के तहत, यदि किसी राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ जाती है, तो केंद्र सरकार उस राज्य सरकार की औपचारिक सहमति के बिना भी अपने सुरक्षा बलों को तैनात कर सकती है और आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।
  3. 3. 'एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 355 के अंतर्गत 'आंतरिक अशांति' शब्द का दायरा बहुत व्यापक है और इसके आधार पर किसी भी राज्य में चुनी हुई सरकार को बर्खास्त करने से पहले राष्ट्रपति को राज्य विधानसभा को भंग करना अनिवार्य होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के भाग XVIII (आपातकालीन उपबंध) के अंतर्गत अनुच्छेद 355 यह प्रावधान करता है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलाई जा रही है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 355 और अनुच्छेद 356 की संवैधानिक योजना के तहत, यदि किसी राज्य में आंतरिक सुरक्षा या व्यवस्था गंभीर संकट में है, तो केंद्र सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी (अनुच्छेद 355) के तहत राज्य की सहमति के बिना भी केंद्रीय सुरक्षा बलों (जैसे अर्धसैनिक बल) को तैनात कर सकती है और आवश्यक निर्देश दे सकती है। कथन 3 गलत है: 'एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि 'आंतरिक अशांति' बहुत गंभीर प्रकृति की होनी चाहिए जो सामान्य कानून व्यवस्था की स्थिति से भिन्न हो। इसके अलावा, न्यायालय ने यह कभी नहीं कहा कि राष्ट्रपति शासन लागू करने से पहले विधानसभा को अनिवार्य रूप से भंग करना ही होगा; बल्कि न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा घोषणा किए जाने तक विधानसभा को केवल निलंबित (Suspend) रखा जा सकता है, और यदि संसद उस घोषणा का अनुमोदन नहीं करती है, तो विधानसभा पुनः बहाल हो सकती है।
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