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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'रामसर स्थलों' (Ramsar Sites) तथा 'आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017' [Wetlands (Conservation and Management) Rules, 2017] के विधिक और कार्यात्मक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) के तहत किसी भी क्षेत्र को 'अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि' (Wetland of International Importance) के रूप में नामित किए जाने के पश्चात, वह क्षेत्र स्वतः ही भारत के पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रत्यक्ष और कठोर दंडात्मक प्रावधानों के अधीन आ जाता है, तथा राष्ट्रीय स्तर पर इसके किसी भी प्रकार के व्यावसायिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाता है।
  2. 2. 'आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017' के अंतर्गत प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में 'राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण' (State Wetland Authority) का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है, जो राज्य के सभी अधिसूचित आर्द्रभूमियों के एकीकृत प्रबंधन, उनके संरक्षण और उनके सीमांकन के लिए जिम्मेदार होता है।
  3. 3. आर्द्रभूमि नियम, 2017 के प्रावधानों के अनुसार, देश की अधिसूचित आर्द्रभूमियों के भीतर भूमि के पुनर्चक्रण (Reclamation), ठोस अपशिष्ट या खतरनाक कचरे के डंपिंग, उद्योगों की स्थापना और ऐसे किसी भी अनधिकृत मानवीय गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध है जो आर्द्रभूमि की पारिस्थितिकी को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है: रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) एक अंतर-सरकारी संधि है जो वैश्विक स्तर पर आर्द्रभूमि संरक्षण को बढ़ावा देती है। किसी स्थल को रामसर स्थल के रूप में नामित किए जाने से वह स्वतः ही भारत के 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' के प्रत्यक्ष और स्वतः दंडात्मक प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आ जाता है; बल्कि इसके संरक्षण और प्रबंधन के लिए देश में अलग से 'आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम' बनाए गए हैं और पर्यावरण संरक्षण कानून लागू करने के लिए विशिष्ट अधिसूचनाओं की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, रामसर सूची में शामिल होने का अर्थ सभी प्रकार के व्यावसायिक उपयोगों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि 'सतत उपयोग' (Wise Use) की अनुमति होती है। कथन 2 सत्य है: 'आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017' के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी प्रशासनिक व्यवस्था के तहत एक 'राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण' (State Wetland Authority) का गठन करेगा, जिसकी अध्यक्षता राज्य के पर्यावरण मंत्री या मुख्य सचिव द्वारा की जाती है। यह प्राधिकरण राज्य की आर्द्रभूमियों की एक डिजिटल सूची तैयार करने और उनके संरक्षण के लिए उत्तरदायी है। कथन 3 सत्य है: आर्द्रभूमि नियम, 2017 (और इसके बाद के संशोधनों) के अंतर्गत अधिसूचित आर्द्रभूमियों के भीतर कई गतिविधियों पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें भूमि का अतिक्रमण, आर्द्रभूमि क्षेत्र का भू-परिवर्तन या पुनर्चक्रण (Reclamation), ठोस या खतरनाक अपशिष्टों का निपटान, उद्योगों की स्थापना, और ऐसे किसी भी कार्य की मनाही है जिससे आर्द्रभूमि की पारिस्थितिकी, जल विज्ञान और जैव विविधता को नुकसान पहुँचे।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' के अंतर्गत राजभाषा (Official Language) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार, संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी, किंतु संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की अवधि (अर्थात 1965 तक) के लिए सभी राजकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग जारी रखा जाएगा, जिसे संसद विधि द्वारा आगे बढ़ा सकती है। 2. अनुच्छेद 348 के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय की सभी कार्यवाहियां, संसद के प्रत्येक सदन या राज्य के विधानमंडल द्वारा प्रस्तावित सभी विधेयकों के पाठ और अधिनियम केवल और केवल अंग्रेजी भाषा में ही होने अनिवार्य किए गए हैं, और राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना इसमें किसी अन्य भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। 3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संविधान संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधनों) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 भाषा कर दिया गया है, और किसी भी भाषा को इस अनुसूची में शामिल करने का मुख्य उद्देश्य संघ की लोक सेवा परीक्षाओं में उन भाषाओं को अनिवार्य माध्यम बनाना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संरक्षण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) तथा 'जैव विविधता प्रबंधन समितियों' (Biodiversity Management Committees - BMCs) के कार्यों एवं विधिक शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत देश के सभी स्थानीय निकायों (चाहे वे ग्रामीण हों या शहरी) के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपने स्थानीय स्तर पर जैविक संसाधनों के संरक्षण, सतत उपयोग और दस्तावेजीकरण के लिए जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) का गठन करें। 2. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) को जैव विविधता अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच करते समय 'सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908' के तहत किसी गवाह को समन भेजने, उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने और दस्तावेजों के प्रकट करने या उनका उत्पादन करने की मांग करने के मामले में एक सिविल कोर्ट (दीवानी अदालत) की शक्तियां प्राप्त होती हैं। 3. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित 'राष्ट्रीय जैव विविधता निधि' (National Biodiversity Fund) का उपयोग केवल और केवल केंद्रीय स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों के वेतन और कार्यालय के रखरखाव के लिए किया जा सकता है, तथा इस निधि का एक भी हिस्सा स्थानीय समुदायों या लाभ-साझाकरण (Benefit Claimants) के कल्याण के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → सामान्य विज्ञान और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' एक सांविधिक (Statutory) निकाय है, जिसका मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है, और यह देश में जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जैव संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत बँटवारे को विनियमित करता है। 2. यह अधिनियम केवल विदेशी नागरिकों, कंपनियों और अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए ही जैविक संसाधनों तक पहुँच या बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के पंजीकरण से पहले NBA की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य बनाता है, जबकि भारत के नागरिकों और देश में पंजीकृत भारतीय कंपनियों को किसी भी स्थिति में जैविक संसाधनों का उपयोग करने के लिए NBA या राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBBs) की पूर्व अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। 3. जैविक विविधता अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक स्थानीय निकाय स्तर पर 'जैविक विविधता प्रबंधन समितियों' (Biodiversity Management Committees - BMCs) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जिनका मुख्य कार्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का प्रलेखन करके 'जन जैव विविधता रजिस्टर' (People's Biodiversity Register - PBR) तैयार करना होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → पूना पैक्ट किसके विरुद्ध किया गया था? → चार वेदों में सबसे प्राचीन वेद कौन सा है?
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