BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
17 views

भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'अनुसूचित जातियों और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006' (Forest Rights Act, 2006) के प्रावधानों और इसके क्रियान्वयन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस अधिनियम के तहत 'वन अधिकार समिति' (Forest Rights Committee - FRC) का गठन ग्राम स्तर पर किया जाता है, जो ग्राम सभा (Gram Sabha) की एक उप-समिति होती है, और यह समिति व्यक्तिगत वन अधिकार (IFR) तथा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) के दावों का प्रारंभिक सत्यापन कर उन्हें ग्राम सभा के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करती है।
  2. 2. अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत पारंपरिक वनवासियों को न केवल अपने आवास और खेती के लिए भूमि का अधिकार प्रदान किया गया है, बल्कि उन्हें गौण वनोपज (Minor Forest Produce - MFP) के स्वामित्व, उपयोग और इसके विपणन का अधिकार तथा सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, पुनर्जनन या प्रबंधन का अधिकार भी कानूनी रूप से दिया गया है।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'ऑल इंडिया वनवासी समाज बनाम संघ राज्य क्षेत्र' तथा अन्य मामलों में दिए गए निर्णयों के अनुसार, इस अधिनियम के अंतर्गत वन अधिकारों के दावों की अस्वीकृति या अपील की प्रक्रिया में राज्य सरकार के वन विभाग (Forest Department) को अंतिम निर्णय लेने की अनन्य विधिक शक्ति प्राप्त है, और ग्राम सभा के निर्णय इस मामले में अंतिम नहीं होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 'अनुसूचित जातियों और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006' के नियमों के तहत, ग्राम स्तर पर 'वन अधिकार समिति' (FRC) का गठन किया जाता है जो ग्राम सभा की देखरेख में काम करती है। यह समिति व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों के दावों की प्रारंभिक जाँच करती है और उन्हें अंतिम अनुमोदन के लिए ग्राम सभा को सौंपती है। कथन 2 सही है: अधिनियम की धारा 3 के तहत पारंपरिक वनवासियों और अनुसूचित जातियों को उनकी आजीविका के लिए न केवल भूमि अधिकार, बल्कि गौण वनोपज (Minor Forest Produce - MFP) के स्वामित्व, उपयोग और विपणन का अधिकार (बांस और तेंदू पत्ता आदि सहित) तथा सामुदायिक वन संसाधनों (CFR) के संरक्षण और प्रबंधन का विधिक अधिकार भी प्राप्त है। कथन 3 गलत है: अधिनियम के तहत दावों के सत्यापन और निर्णय की प्रक्रिया में अंतिम प्राधिकारी 'ग्राम सभा' होती है, न कि राज्य का वन विभाग। वन विभाग या नौकरशाही अकेले अपने दम पर दावों को सीधे अस्वीकृत नहीं कर सकती है। यदि किसी दावे को अस्वीकार किया जाता है, तो उसके लिए उचित कानूनी प्रक्रिया और उप-मंडलीय स्तर (SDLC) तथा जिला स्तरीय समितियों (DLC) का प्रावधान है, जहाँ ग्राम सभा की भूमिका सर्वोपरि होती है।
Share:

Related Questions

→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायती राज - अनुच्छेद 243 से 243-O) तथा 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में एक नया ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों के प्रशासनिक नियंत्रण के लिए कुल 29 कार्यात्मक विषयों को सूचबद्ध किया गया है, और इन विषयों पर कानून बनाने की शक्ति अनन्य रूप से राज्य के विधानमंडल को प्रदान की गई है। 2. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, किंतु इन योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए कर, शुल्क, और टोल (Tolls) लगाने की वित्तीय शक्तियां देना अनिवार्य (Mandatory) नहीं बल्कि राज्य विधानमंडल के विवेक पर निर्भर है। 3. संविधान के अनुच्छेद 243-I के अनुसार प्रत्येक राज्य के राज्यपाल द्वारा हर पांच वर्ष की समाप्ति पर एक 'वित्त आयोग' (Finance Commission) का गठन किया जाएगा, जो राज्य और पंचायतों के बीच करों, शुल्कों और फीसों के विभाजन के सिद्धांतों की संप्रभुता के साथ अंतिम रूप से समीक्षा करता है और इसके द्वारा की गई सिफारिशें राज्य सरकार के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी (Binding) होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, 'संसद के विशेषाधिकार' (Parliamentary Privileges - अनुच्छेद 105 और 194) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद के दोनों सदनों, उसके सदस्यों और समितियों को कुछ विशेष अधिकार और उन्मुक्तियाँ प्रदान की गई हैं, और ये विशेषाधिकार केवल तभी उपलब्ध होते हैं जब संसद सत्र में हो या विधाई कार्य चल रहा हो; सत्र के सत्रावसान या विघटन के दौरान ये स्वतः समाप्त हो जाते हैं। 2. 'संसदीय विशेषाधिकारों' के अंतर्गत प्रत्येक सदन को यह अनन्य अधिकार प्राप्त है कि वह अपनी कार्यवाही के प्रकाशन को रोक सकता है और सदन के सदस्यों या बाहरी व्यक्तियों द्वारा विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) या सदन की अवमानना (Contempt of the House) के लिए उन्हें दंडित या भर्त्सना कर सकता है। 3. यद्यपि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105(3) में यह प्रावधान किया गया है कि जब तक संसद विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध (Codify) नहीं करती है, तब तक इसके विशेषाधिकार वही माने जाएंगे जो ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के पास संविधान लागू होने के समय (26 जनवरी 1950 को) थे, तथापि आज तक भारतीय संसद द्वारा इन विशेषाधिकारों को पूरी तरह से संहिताबद्ध करने के लिए कोई व्यापक कानून नहीं बनाया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → नरम दल के नेताओं के संबंध में कथनों पर विचार करें: 1. वे संवैधानिक सुधारों में विश्वास रखते थे, 2. दादाभाई नौरोजी ने "धन निकासी सिद्धांत" दिया, 3. वे ब्रिटिश शासन के पूर्ण बहिष्कार के समर्थक थे। सही विकल्प चुनें? → किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल में 'लुक ईस्ट पॉलिसी' को 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) में बदल दिया गया? → भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1928 में प्रस्तुत 'नेहरू रिपोर्ट' (Nehru Report) और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पंडित मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा तैयार की गई नेहरू रिपोर्ट में भारत के लिए पूर्ण स्वायत्तता या पूर्ण स्वराज्य (Complete Independence) के लक्ष्य की मांग की गई थी, जिसे ब्रिटिश संसद द्वारा बिना किसी संशोधन के तुरंत स्वीकार कर लिया गया था। 2. इस रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के संबंध में प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन मंडलों (Separate Electorates) की व्यवस्था को समाप्त करने की संस्तुति की गई थी, तथा इसके स्थान पर जनसंख्या के आधार पर केवल संयुक्त निर्वाचन मंडलों में आरक्षित सीटों का प्रस्ताव रखा गया था। 3. नेहरू रिपोर्ट के प्रस्तावों से असंतुष्ट होकर युवा राष्ट्रवादी नेताओं जैसे जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने 'इन्डिपेपेंडेंस फॉर इंडिया लीग' (Independence for India League) की स्थापना की, क्योंकि वे डोमिनियन स्टेटस (Dominion Status) के लक्ष्य से संतुष्ट नहीं थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.