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भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1928 में प्रस्तुत 'नेहरू रिपोर्ट' (Nehru Report) और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पंडित मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा तैयार की गई नेहरू रिपोर्ट में भारत के लिए पूर्ण स्वायत्तता या पूर्ण स्वराज्य (Complete Independence) के लक्ष्य की मांग की गई थी, जिसे ब्रिटिश संसद द्वारा बिना किसी संशोधन के तुरंत स्वीकार कर लिया गया था।
  2. 2. इस रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के संबंध में प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन मंडलों (Separate Electorates) की व्यवस्था को समाप्त करने की संस्तुति की गई थी, तथा इसके स्थान पर जनसंख्या के आधार पर केवल संयुक्त निर्वाचन मंडलों में आरक्षित सीटों का प्रस्ताव रखा गया था।
  3. 3. नेहरू रिपोर्ट के प्रस्तावों से असंतुष्ट होकर युवा राष्ट्रवादी नेताओं जैसे जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने 'इन्डिपेपेंडेंस फॉर इंडिया लीग' (Independence for India League) की स्थापना की, क्योंकि वे डोमिनियन स्टेटस (Dominion Status) के लक्ष्य से संतुष्ट नहीं थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: नेहरू रिपोर्ट (1928) में भारत के लिए 'डोमिनियन स्टेटस' (औपनिवेशिक स्वराज्य) की मांग की गई थी, न कि 'पूर्ण स्वराज्य' (पूर्ण स्वतंत्रता) की। इसके अलावा, ब्रिटिश सरकार ने इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया था, बल्कि इसका विरोध किया था। कथन 2 सही है: नेहरू रिपोर्ट ने ब्रिटिश काल से चली आ रही मुसलमानों के लिए पृथक्/अलग निर्वाचन मंडलों (Separate Electorates) की प्रणाली को खारिज कर दिया और इसके स्थान पर केवल संयुक्त निर्वाचन मंडलों (Joint Electorates) में आबादी के अनुपात में सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव रखा। कथन 3 सही है: नेहरू रिपोर्ट में डोमिनियन स्टेटस के लक्ष्य को देखकर कांग्रेस के युवा नेता जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस अत्यंत क्षुब्ध हुए, क्योंकि वे पूर्ण स्वतंत्रता से कम कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। परिणामस्वरुप, इन दोनों नेताओं ने मिलकर 'इन्डिपेपेंडेंस फॉर इंडिया लीग' की स्थापना की।
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