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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'आर्कटिक प्रवर्धन' (Arctic Amplification) और इसके भू-जलवायु प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. आर्कटिक प्रवर्धन एक ऐसी परिघटना है जिसमें वैश्विक औसत तापमान वृद्धि की तुलना में आर्कटिक क्षेत्र में तापमान वृद्धि की दर काफी अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण 'बर्फ-ऐल्बेडो फीडबैक' (Ice-Albedo Feedback) है।
  2. 2. जैसे-जैसे आर्कटिक क्षेत्र की बर्फ और समुद्री हिम (Sea Ice) पिघलती है, महासागर और भूमि अधिक सौर विकिरण को अवशोषित करते हैं, जिससे तापमान में और अधिक वृद्धि होती है।
  3. 3. आर्कटिक प्रवर्धन के कारण आर्कटिक और मध्यम अक्षांशों (Mid-latitudes) के बीच तापमान का प्रवणता (Temperature Gradient) बढ़ जाता है, जिससे ध्रुवीय भंवर (Polar Vortex) और जेट स्ट्रीम (Jet Stream) अधिक स्थिर और मजबूत हो जाती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: आर्कटिक प्रवर्धन (Arctic Amplification) वह प्रक्रिया है जिसके तहत आर्कटिक क्षेत्र में तापमान वृद्धि की दर वैश्विक औसत से दोगुनी या तिगुनी अधिक होती है। इसका प्रमुख चालक बर्फ-ऐल्बेडो फीडबैक है। कथन 2 सही है: सफेद बर्फ सूर्य के प्रकाश को अंतरिक्ष में वापस परावर्तित (reflect) करती है। जब यह बर्फ पिघलती है, तो नीचे गहरे रंग का महासागर या भूमि सामने आती है जो अधिक सौर ऊर्जा को अवशोषित करती है, जिससे वार्मिंग चक्र तेज हो जाता है। कथन 3 गलत है: आर्कटिक प्रवर्धन के कारण आर्कटिक और मध्यम अक्षांशों के बीच तापमान का अंतर (Temperature Gradient) **घट जाता है** (कम हो जाता है)। इस कम हुए प्रवणता के कारण जेट स्ट्रीम (Jet Stream) अधिक कमजोर और लहरदार (Wavy) हो जाती है, जिससे चरम मौसम की घटनाएं (जैसे शीत लहरें या ग्रीष्म लहरें) लंबे समय तक बनी रहती हैं। अतः कथन 3 असत्य है।
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