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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 360' के अंतर्गत 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) की उद्घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत यदि राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व या साख खतरे में है, तो वह वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा कर सकता है, तथा मूल संविधान में इस उद्घोषणा के लिए 'आंतरिक वित्तीय संकट' शब्द का प्रयोग किया गया था।
- 2. वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा का संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से 'दो महीने' के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा अनुमोदन किया जाना अनिवार्य है, अन्यथा यह आपातकाल स्वतः समाप्त हो जाता है।
- 3. वित्तीय आपातकाल के दौरान भारत के राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त होता है कि वह संघ के कला-कर्मचारियों के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतनों और भत्तों में कमी करने के लिए निर्देश जारी कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के मूल पाठ में 'आंतरिक वित्तीय संकट' जैसा कोई विशिष्ट शब्द नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 360 में केवल यह कहा गया है कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व या साख खतरे में है। इसके अलावा, वित्तीय आपातकाल की अवधारणा अमेरिकी संविधान से प्रेरित नहीं है और इसमें इस प्रकार के किसी विशेष प्रतिस्थापन का इतिहास नहीं है। कथन 2 सही है; वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तिथि से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना आवश्यक है, और इसके लिए संसद के साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है। कथन 3 सही है; वित्तीय आपातकाल के दौरान संघ के नियंत्रण में काम करने वाले सभी या किसी भी वर्ग के व्यक्तियों के वेतनों और भत्तों में कमी की जा सकती है, जिसके अंतर्गत संघ के न्यायाधीशों (उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश) के वेतन और भत्ते भी शामिल हैं।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) की उत्पत्ति, उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों और वैश्विक जलवायु पर उनके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति और उनकी दिशा मुख्य रूप से प्रचलित हवाओं (Planetary Winds), पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न कोरिolis बल (Coriolis Force), महासागरीय जल के तापमान तथा लवणता में भिन्नता (Thermohaline circulation) जैसे कारकों द्वारा निर्धारित होती है।
2. कोरियोलिस बल उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराओं को उनकी मूल दिशा से दाईं ओर (Clockwise) और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Counter-clockwise) विक्षेपित कर देता है, तथा भूमध्य रेखा पर यह बल अधिकतम होता है।
3. विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्र (जैसे उत्तर-पश्चिम अटलांटिक में ग्रैंड बैंक और उत्तर-पश्चिम प्रशांत में डोगर बैंक या याकुशिमा क्षेत्र) सामान्यतः वहाँ विकसित होते हैं जहाँ गर्म और ठंडी महासागरीय धाराएँ आपस में मिलती हैं, क्योंकि यह स्थिति प्लवक (Plankton) के विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'जेट स्ट्रीम' (Jet Streams) और उनके वायुमंडलीय प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जेट स्ट्रीम्स क्षोभमंडल (Troposphere) के ऊपरी हिस्से में उच्च गति से प्रवाहित होने वाली संकीर्ण पट्टियाँ हैं, जिनका निर्माण पृथ्वी के घूर्णन और ध्रुवीय तथा उष्णकटिबंधीय वायुराशियो (Air Masses) के बीच अत्यधिक तापीय प्रवणता (Thermal Gradient) के कारण होता है।
2. उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम (Subtropical Westerly Jet Stream) भारतीय मानसून को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो शीतकाल में हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती है और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षوب (Western Disturbances) के कारण होने वाली वर्षा के लिए उत्तरदायी होती है, तथा ग्रीष्मकाल में यह तिब्बत के पठार के गर्म होने के कारण हिमालय के उत्तर में विस्थापित हो जाती है।
3. रॉस्बी तरंगें (Rossby Waves), जो जेट स्ट्रीम्स के बड़े पैमाने पर घुमावदार प्रवाह पैटर्न हैं, वायुमंडल में दाब प्रवणता को स्थिर करने में मदद करती हैं और इनकी गति इतनी तीव्र होती है कि ये मौसम प्रणालियों को हफ्तों तक एक ही स्थान पर रोक कर रखती हैं, जिससे कभी-कभी लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव या बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएँ उत्पन्न होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, 'संसद की वित्तीय समितियों' (Financial Committees) — अर्थात् प्राक्कलन समिति (Estimates Committee), लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) और सार्वजनिक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) — के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोक लेखा समिति में कुल 30 सदस्य होते हैं, जिनमें से 20 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के आधार पर एकल संक्रमणीय मत द्वारा चुने जाते हैं, तथा इस समिति का अध्यक्ष हमेशा विपक्षी दल से ही नियुक्त किया जाना संविधान द्वारा अनिवार्य किया गया है।
2. प्राक्कलन समिति देश की सबसे बड़ी वित्तीय समिति है जिसमें 30 सदस्य होते हैं और इसके सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से ही निर्वाचित होते हैं; इसमें राज्यसभा को कोई प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं होता है, तथा इस समिति का मुख्य कार्य बजट में अनुमानित खर्चों की जांच करना और सार्वजनिक व्यय में मितव्ययिता लाने के लिए सुझाव देना है।
3. सार्वजनिक उपक्रम समिति का गठन वर्ष 1964 में कृष्ण मेनन समिति की संस्तुति पर किया गया था, जिसमें कुल 22 सदस्य (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से) होते हैं, और इस समिति का अध्यक्ष हमेशा राज्यसभा के सदस्यों में से ही चुना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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