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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, 'संसद की वित्तीय समितियों' (Financial Committees) — अर्थात् प्राक्कलन समिति (Estimates Committee), लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) और सार्वजनिक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) — के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. लोक लेखा समिति में कुल 30 सदस्य होते हैं, जिनमें से 20 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के आधार पर एकल संक्रमणीय मत द्वारा चुने जाते हैं, तथा इस समिति का अध्यक्ष हमेशा विपक्षी दल से ही नियुक्त किया जाना संविधान द्वारा अनिवार्य किया गया है।
  2. 2. प्राक्कलन समिति देश की सबसे बड़ी वित्तीय समिति है जिसमें 30 सदस्य होते हैं और इसके सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से ही निर्वाचित होते हैं; इसमें राज्यसभा को कोई प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं होता है, तथा इस समिति का मुख्य कार्य बजट में अनुमानित खर्चों की जांच करना और सार्वजनिक व्यय में मितव्ययिता लाने के लिए सुझाव देना है।
  3. 3. सार्वजनिक उपक्रम समिति का गठन वर्ष 1964 में कृष्ण मेनन समिति की संस्तुति पर किया गया था, जिसमें कुल 22 सदस्य (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से) होते हैं, और इस समिति का अध्यक्ष हमेशा राज्यसभा के सदस्यों में से ही चुना जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है: लोक लेखा समिति (PAC) में कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से), न कि 30 सदस्य। इसके अलावा, यद्यपि 1967 से यह परंपरा बन गई है कि इस समिति का अध्यक्ष विपक्ष के नेता/दल से होता है, परंतु यह संविधान द्वारा अनिवार्य नहीं है, बल्कि लोकसभा अध्यक्ष की एक परंपरा और स्वविवेक पर आधारित है। कथन 2 सत्य है: प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) वास्तव में संसद की सबसे बड़ी वित्तीय समिति है जिसमें 30 सदस्य होते हैं और इसके सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से ही चुने जाते हैं (राज्यसभा का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता)। इसका मुख्य उद्देश्य बजट में अनुमानित प्राकलनों की जांच करना और मितव्ययिता के उपाय सुझाना है। कथन 3 असत्य है: सार्वजनिक उपक्रम समिति में 22 सदस्य (15 लोकसभा और 7 राज्यसभा से) होते हैं, जो सही है; किंतु इस समिति का अध्यक्ष हमेशा 'लोकसभा के सदस्यों' में से ही नियुक्त किया जाता है, न कि राज्यसभा से।
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