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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत 'संविधान संशोधन की प्रक्रिया' और 'न्यायिक समीक्षा' की सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है, किंतु इसे पारित करने के लिए प्रत्येक सदन में कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत होना अनिवार्य है, तथा इस प्रक्रिया में दोनों सदनों के बीच गतिरोध को दूर करने के लिए संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान उपलब्ध है।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' वाद में यह प्रतिपादित किया गया था कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, किंतु वह 'संविधान के बुनियादी ढांचे' (Basic Structure) को नष्ट या क्षीण नहीं कर सकती है।
- 3. '99वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2014' (राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग - NJAC अधिनियम) को सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के बुनियादी ढांचे—विशेषकर न्यायपालिका की स्वतंत्रता—का उल्लंघन करने वाला मानते हुए असंवैधानिक और शून्य घोषित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और इसे दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित कराना अनिवार्य है। संविधान संशोधन विधेयकों के मामले में गतिरोध को सुलझाने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है। कथन 2 सही है: केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन करने की व्यापक शक्ति है, बशर्ते ऐसा संशोधन संविधान के 'आधारभूत ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे। कथन 3 सही है: 99वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम को सर्वोच्च न्यायालय ने 'सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2015)' वाद में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत (जो कि बुनियादी ढांचे का हिस्सा है) के विरुद्ध मानते हुए पूरी तरह असंवैधानिक घोषित कर दिया था। अत: विकल्प (b) सही उत्तर है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP, अनुच्छेद 36-51) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार DPSP देश के शासन में मौलिक हैं और देश के लिए कानून बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा बलपूर्वक लागू नहीं कराया जा सकता है।
2. मूल संविधान में 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' (Equal justice and free legal aid) का प्रावधान नहीं था, इसे स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 39A के रूप में जोड़ा गया था।
3. अनुच्छेद 40 के तहत राज्य ग्राम पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियां प्रदान करेगा जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा यह प्रावधान मूलतः एक गांधीवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'प्रवाल भित्तियों' (Coral Reefs) और उनके पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रवाल (Corals) वास्तव में छोटे समुद्री invertebrates होते हैं जो 'निटेरिया' (Cnidaria) संघ से संबंधित हैं, और वे 'जूजैन्टेली' (Zooxanthellae) नामक सूक्ष्म शैवाल के साथ एक सहजीवी (Symbiotic) संबंध साझा करते हैं जो उन्हें उनका जीवंत रंग और प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से पोषण प्रदान करता है।
2. प्रवाल भित्तियों के विकास के लिए आदर्श तापमान आमतौर पर 20°C से 21°C के बीच होता है, और ये अत्यधिक खारे (Hypersaline) तथा अत्यधिक गहरे समुद्र के ठंडे पानी में सबसे अधिक पनपती हैं जहाँ सूर्य की किरणें बिल्कुल नहीं पहुँच पाती हैं।
3. जब समुद्री जल का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है या पर्यावरण में किसी अन्य प्रकार का तनाव उत्पन्न होता है, तो प्रवाल अपने ऊतकों में रहने वाले जूजैन्टेली शैवाल को बाहर निकाल देते हैं, जिससे वे सफेद रंग के हो जाते हैं, जिसे 'प्रवाल विरंजन' (Coral Bleaching) कहा जाता है, और यदि यह तनाव लंबे समय तक बना रहे तो प्रवाल की मृत्यु भी हो सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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खिलजी वंश की स्थापना किसने की थी?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की संरचना, स्वतंत्रता और इसकी शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. निर्वाचन आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है, जिसकी स्थापना संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत की गई है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाए गए किसी विशिष्ट विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
2. संविधान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की अहर्ताओं (Qualifications) का कोई भी विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है, और न ही संविधान द्वारा सेवानिवृत्त होने वाले निर्वाचन आयुक्तों को सरकार द्वारा किसी अन्य नियुक्ति या पद ग्रहण करने से पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है।
3. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य किसी भी निर्वाचन आयुक्त को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
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