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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण' (National Ganga River Basin Authority - NGRBA) और इसके शासी ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) का गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3(3) के अंतर्गत एक योजना के रूप में वर्ष 2009 में किया गया था, जिसके अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं।
- 2. NGRBA को केवल गंगा नदी के प्रदूषण उन्मूलन तक सीमित रखा गया था और इसके पास गंगा बेसिन के संरक्षण, नियंत्रण और उपशमन के लिए किसी भी नदी बेसिन प्रबंधन योजना को तैयार करने या उसका वित्तपोषण करने की कोई वैधानिक विनियामक शक्ति नहीं थी।
- 3. वर्ष 2016 में सरकार ने NGRBA को भंग करके इसके स्थान पर 'राष्ट्रीय गंगा परिषद' (National Ganga Council) का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता भी प्रधानमंत्री करते हैं, जबकि इसके कार्यान्वयन हेतु 'राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन' (NMCG) को एक वैधानिक निकाय के रूप में शक्ति प्रदान की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) का गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3(3) के तहत फरवरी 2009 में एक योजना के रूप में किया गया था। देश के प्रधानमंत्री इस प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
कथन 2 गलत है: NGRBA को गंगा बेसिन के संरक्षण, नियंत्रण और उपशमन के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का अधिकार दिया गया था। यह न केवल प्रदूषण निवारण तक सीमित था, बल्कि इसे गंगा नदी बेसिन के समग्र प्रबंधन, योजना बनाने और वित्तपोषण करने की शक्ति प्राप्त थी।
कथन 3 सही है: वर्ष 2016 में 'राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण' (NGRBA) को समाप्त कर दिया गया और इसके स्थान पर 'राष्ट्रीय गंगा परिषद' (National Ganga Council) की स्थापना की गई। इसके साथ ही, इसके कार्यकारी विंग के रूप में 'राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन' (NMCG) को अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए वर्ष 2016 में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत पंजीकृत सोसायटी से एक वैधानिक प्राधिकरण के रूप में परिवर्तित किया गया।
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Global Multidimensional Poverty Index - MPI) और भारत में गरीबी आकलन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वैश्विक MPI को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है, तथा यह सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर — इन तीन समान रूप से भारित आयामों के अंतर्गत कुल 10 संकेतकों का उपयोग करता है।
2. भारत में नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा जारी राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI) का आधार वैश्विक MPI की कार्यप्रणाली पर आधारित है, परंतु इसमें राष्ट्रीय संदर्भ के अनुरूप दो अतिरिक्त संकेतक — 'मातृ स्वास्थ्य' (Maternal Health) और 'बैंक खाता' (Bank Account) — जोड़े गए हैं, जिससे कुल संकेतकों की संख्या 12 हो जाती है।
3. नीति आयोग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पिछले कुछ वर्षों में बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, तथा इस सुधार में सबसे बड़ा योगदान पोषण और स्कूली शिक्षा के संकेतकों में सुधार का रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में गरीबों की संख्या में सबसे अधिक कमी आई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XII' के अंतर्गत 'वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद' (Finance, Property, Contracts and Suits - Articles 264-300A) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 267 के अनुसार संसद को 'भारत की संचित निधि' (Consolidated Fund of India) की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें सरकार को प्राप्त होने वाले सभी राजस्व, उसके द्वारा जुटाए गए ऋण और ऋणों की वसूली से प्राप्त सभी धन जमा किए जाते हैं, तथा इस निधि से बिना संसद की पूर्व स्वीकृति के एक भी रुपया निकाला नहीं जा सकता।
2. अनुच्छेद 267 के अंतर्गत ही 'भारत की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of India) की स्थापना का प्रावधान है, जिसे राष्ट्रपति के распоря (Discretion) या नियंत्रण में रखा जाता है, और इसका उपयोग किसी अप्रत्याशित या आकस्मिक व्यय को पूरा करने के लिए संसद की पूर्व स्वीकृति के बिना किया जा सकता है, बशर्ते बाद में इसके लिए संसद से विधिवत अनुमोदन प्राप्त कर लिया जाए।
3. अनुच्छेद 282 के तहत संघ या किसी राज्य को यह अधिकार दिया गया है कि वह अपने राजस्व से किसी ऐसे सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान दे सकता है जो उसके विधायी शक्तियों के दायरे से बाहर हो, और इस प्रावधान का उपयोग अक्सर केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को विशिष्ट विकासात्मक योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता (Grants) प्रदान करने के वास्ते किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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