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Indian Polity
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मौलिक कर्तव्यों को संविधान में किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?

Detailed Explanation

1976 में 42वें संशोधन से जोड़े गए।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों, करों के अधिरोपण और अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 268 से 293 के बीच केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिसके तहत संसद को उन सभी करों पर कर लगाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है जो संघ सूची में शामिल हैं, किंतु कुछ ऐसे कर भी हैं जिन्हें केंद्र लगाता और वसूलता है, लेकिन उनका पूरा आगम संबंधित राज्यों को ही सौंप दिया जाता है (जैसे अनुच्छेद 269 के अंतर्गत अंतर-राज्यीय व्यापार पर लगने वाले कर)। 2. संविधान के अनुच्छेद 263 के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा स्थापित अंतर-राज्यीय परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, उन पर बहस करना तथा ऐसे विषयों की जाँच करना जिनमें राज्यों के समान हित हों; किंतु अंतर-राज्यीय परिषद् द्वारा दी गई संस्तुतियाँ या निर्णय केंद्र सरकार या संबंधित राज्यों के लिए विधिक रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) नहीं होते हैं, बल्कि वे केवल परामर्शकारी (Advisory) प्रकृति की होती हैं। 3. संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) एक संवैधानिक निकाय है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण तथा राज्यों को समेकित निधि से सहायता अनुदान (Grants-in-Aid) देने वाले सिद्धांतों की सिफारिश राष्ट्रपति से करता है, और इस आयोग द्वारा दी गई सभी संस्तुतियाँ केंद्र सरकार के लिए मानना हमेशा अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को न्यायपालिका में चुनौती नहीं दी जा सकती है, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इस प्रावधान को समाप्त कर दिया गया और यह तय किया गया कि आपातकाल की उद्घोषणा की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह जोड़ा गया कि राष्ट्रीय आपातकाल संपूर्ण देश में या उसके किसी विशिष्ट भाग में लागू किया जा सकता है। 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित हो जाता है, किंतु अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह अन्य मूल अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को निलंबित करने का आदेश दे सके, और 44वें संशोधन के पश्चात यह अनिवार्य कर दिया गया कि ऐसा आदेश संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक पुनरावलोकन, प्रवर्तन तथा अपवादों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 31C के अनुसार, यदि राज्य कोई ऐसी विधि बनाता है जो अनुच्छेद 39(b) और (c) में वर्णित नीति निदेशक तत्वों को प्रभावी करने के लिए है, तो उस विधि को इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छिनती है या न्यून करती है, बशर्ते उस कानून को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हो। 2. उच्चतम न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में यह स्पष्ट किया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत मूल अधिकारों सहित संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति है, किंतु यह संशोधन संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन नहीं करना चाहिए, और अनुच्छेद 31C की वह व्यवस्था जिसके तहत न्यायिक समीक्षा पर प्रतिबंध लगाया गया था, को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था। 3. अनुच्छेद 34 संसद को यह अधिकार देता है कि वह भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी भी क्षेत्र में सेना विधि (Martial Law) लागू होने के दौरान किसी भी सरकारी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति द्वारा लोक व्यवस्था बनाए रखने या उसकी पुनस्थापना के लिए किए गए कृत्यों को वैध बनाने के लिए संसद द्वारा कानून बनाकर क्षतिपूर्ति (Indemnity) का उपबंध कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) में उल्लिखित विभिन्न आयामों और उससे संबंधित ऐतिहासिक न्यायिक दृष्टांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को वर्ष 1917 की रूसी क्रांति से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुता' के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति पर आधारित हैं। 2. 'गोलकनाथ वाद (1967)' में उच्चतम न्यायालय ने पहली बार यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और संसद को अनुच्छेद 368 के अंतर्गत इसमें संशोधन करने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है। 3. प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथा इसकी प्रकृति गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) है, जिसका अर्थ है कि इसके प्रावधानों को अदालतों में सीधे लागू नहीं कराया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान का हिस्सा नहीं बनाया गया था, अपितु इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग-IVक में अनुच्छेद 51क के तहत जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वाँ कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था। 2. मूल कर्तव्यों का विचार तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित था, और जापान को छोड़कर विश्व के किसी भी प्रमुख लोकतांत्रिक देश के संविधान में नागरिकों के मूल कर्तव्यों का इस प्रकार का विस्तृत उल्लेख नहीं मिलता है। 3. जिस प्रकार मूल अधिकार न्यायोचित (Justiciable) प्रकृति के होते हैं और उनके उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय की शरण ली जा सकती है, उसी प्रकार मूल कर्तव्य भी विधىतः न्यायोचित हैं तथा इनके प्रवर्तन के लिए संसद द्वारा रिट जारी कराई जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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