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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 110' के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill) की परिभाषा और इसके पारित होने की विधायी प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कोई विधेयक 'धन विधेयक' तभी माना जाएगा जब उसमें केवल कराधान, भारत की संचित निधि से धन का विनियोग, उधार लेना या उससे संबंधित सभी या किन्हीं विषयों के प्रावधान शामिल हों, और किसी विधेयक के धन विधेयक होने या न होने पर लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) का निर्णय अंतिम होता है।
  2. 2. धन विधेयक को राज्यसभा में पुनःस्थापित (Introduce) किया जा सकता है, किंतु इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा (Prior Recommendation) का होना अनिवार्य नहीं है, हालांकि राज्यसभा इस पर संशोधन का प्रस्ताव दे सकती है।
  3. 3. राज्यसभा को धन विधेयक को प्राप्त करने की तारीख से अधिकतम चौदह दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के लोकसभा को वापस लौटाना होता है, और यदि राज्यसभा इस अवधि के भीतर विधेयक को वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में वह लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार, धन विधेयक में केवल कराधान, ऋण लेने, संचित निधि या आकस्मिकता निधि से धन निकालने या जमा करने से संबंधित प्रावधान होते हैं। किसी विधेयक के धन विधेयक होने या न होने का प्रश्न उठने पर लोकसभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है। कथन 2 गलत है: धन विधेयक को केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित (Introduce) किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं। इसके अलावा, धन विधेयक को संसद में पेश करने से पूर्व राष्ट्रपति की 'पूर्व अनुशंसा' (Prior Recommendation) लेना अनिवार्य है। कथन 3 सही है: राज्यसभा के पास धन विधेयक के मामले में बहुत सीमित शक्तियाँ हैं। राज्यसभा को इसे 14 दिनों के भीतर लौटाना होता है। यदि वह ऐसा नहीं करती है, तो विधेयक को दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है, भले ही राज्यसभा ने उस पर विचार न किया हो।
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