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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, 'वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन' (Lucknow Session) और इसके ऐतिहासिक महत्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस अधिवेशन की अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की थी, जिसमें नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस के दोनों विभाजित गुटों (नरम दल और गर्म दल) का पुनर्मिलन हुआ था, जिसमें एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
- 2. इसी अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच 'लखनऊ पैक्ट' (Lucknow Pact) पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके तहत कांग्रेस ने पहली बार मुसलमानों के लिए 'पृथक् निर्वाचक मंडल' (Separate Electorates) की मांग को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया था।
- 3. लखनऊ अधिवेशन में ही महात्मा गांधी पहली बार कांग्रेस के मंच पर उपस्थित हुए थे, जहाँ बिहार के किसान नेता राजकुमार शुक्ल ने उनका ध्यान चंपारण के नील किसानों की दयनीय स्थिति की ओर आकर्षित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: वर्ष 1916 का लखनऊ अधिवेशन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक ऐतिहासिक अधिवेशन था, जिसकी अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की थी। वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में अलग हुए नरम दल और गर्म दल एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक के प्रयासों से इस अधिवेशन में पुनः एक हो गए।
कथन 2 सही है: इसी अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच 'लखनऊ पैक्ट' संपन्न हुआ। कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ और हिंदू-मु मुस्लिम एकता के नाम पर पहली बार मुसलमानों के लिए पृथक् निर्वाचक मंडलों की मांग को स्वीकार कर लिया, जिसे बाद में राष्ट्रवादी इतिहासकारों द्वारा भविष्य के सांप्रदायिक विभाजन की नींव के रूप में देखा गया।
कथन 3 सही है: लखनऊ अधिवेशन में ही चंपारण के किसान नेता राजकुमार शुक्ल ने पहली बार महात्मा गांधी से मुलाकात की थी और उन्हें बिहार के चंपारण में तिनकठिया प्रणाली के तहत नील की खेती करने वाले किसानों के शोषण के बारे में अवगत कराया था, जिसके परिणाम 1917 के चंपारण सत्याग्रह के रूप में सामने आए। अतः तीनों कथन सही हैं।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना' (National Action Plan on Climate Change - NAPCC) और इसके अंतर्गत शामिल मिशनों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री की जलवायु परिवर्तन पर परिषद (Prime Minister's Council on Climate Change) द्वारा वर्ष 2008 में लॉन्च की गई NAPCC में शुरुआत में कुल आठ राष्ट्रीय मिशन शामिल थे, जो जलवायु परिवर्तन के शमन (Mitigation) और अनुकूलन (Adaptation) दोनों पहलुओं को संबोधित करते हैं।
2. इन आठ मिशनों में 'राष्ट्रीय सौर मिशन' (National Solar Mission), 'राष्ट्रीय संवर्धित ऊर्जा दक्षता मिशन' (National Mission on Enhanced Energy Efficiency), और 'राष्ट्रीय जल मिशन' (National Water Mission) शामिल हैं, किंतु इसमें कृषि और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से संबंधित किसी भी प्रकार के पृथक मिशन को शामिल नहीं किया गया है।
3. भारत सरकार द्वारा बाद में इस कार्य योजना का विस्तार करते हुए इसमें 'राष्ट्रीय हरित भारत मिशन' (Green India Mission) को जोड़ा गया, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के घटते वन आवरण को पुनर्स्थापित करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति उसकी आनुवंशिक लचीलापन (Resilience) को बढ़ाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत 'भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) के प्रावधानों और उनकी सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति का विस्तार उन सभी मामलों पर होता है जहाँ दंड या दंडादेश ऐसे विषय के विरुद्ध किसी विधि के तहत दिया गया है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु सैन्य न्यायालयों (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में राष्ट्रपति के पास क्षमादान की कोई शक्ति नहीं होती है।
2. राष्ट्रपति द्वारा किसी भी मामले में मृत्युदंड (Death Sentence) को माफ करने, उसका लघुकरण करने या उसका परिहार करने की शक्ति का प्रयोग करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की सलाह से बाध्य होना अनिवार्य होता है, और राष्ट्रपति व्यक्तिगत विवेक (Individual Discretion) के आधार पर इस शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार, राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72 के तहत) न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूर्णतः बाहर है, और न्यायालय किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान याचिका को अस्वीकार किए जाने के निर्णय की वैधता की जांच नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 202' से 'अनुच्छेद 207' तक उल्लिखित 'राज्य विधानमंडल की वित्तीय प्रक्रिया और धन विधेयकों' (Financial Procedures and Money Bills) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 199 के अनुसार, कोई विधेयक 'धन विधेयक' (Money Bill) तभी माना जाएगा जब उसमें केवल ऐसे उपबंध शामिल हों जो करों के अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन, अथवा राज्य की संचित निधि से धन के विनियोजन से संबंधित हों, और यदि किसी विधेयक में धन संबंधी मामलों के साथ-साथ अन्य गैर-वित्तीय मामले भी मिला दिए जाते हैं, तो वह स्वतः एक धन विधेयक बन जाता है।
2. 'राज्य के वित्त विधेयक' (Financial Bills) के संदर्भ में, अनुच्छेद 207 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि ऐसा कोई भी विधेयक जो राज्य की संचित निधि से व्यय उपबंधित करता है, राज्य विधानसभा में तब तक पुनर्स्थापित या पारित नहीं किया जा सकता जब तक कि राज्यपाल ने उस विधेयक को उस विधानसभा में विचार के लिए संस्तुति (Recommendation) न दे दी हो।
3. राज्य विधान परिषद (Legislative Council) को किसी धन विधेयक के संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियां प्राप्त हैं; वह न तो धन विधेयक को अस्वीकार कर सकती है और न ही उसमें संशोधन कर सकती है, तथा उसे विधानसभा द्वारा पारित किए जाने के पश्चात अधिकतम चौदह दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस लौटाना होता है, अन्यथा उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, वर्ष 1928 में प्रस्तुत 'नेहरू रिपोर्ट' (Nehru Report) की संस्तुतियों और उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में तैयार की गई इस रिपोर्ट में भारत के लिए पूर्ण स्वायत्तता या पूर्ण स्वराज्य (Complete Independence) के लक्ष्य की मांग की गई थी, जिसे ब्रिटिश संसद द्वारा बिना किसी संशोधन के स्वीकार कर लिया गया था।
2. इस रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संयुक्त निर्वाचन क्षेत्रों (Joint Electorates) का प्रस्ताव किया गया था, और मुसलमानों के लिए किसी भी प्रकार के पृथक् निर्वाचन (Separate Electorates) की मांग को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया गया था, यद्यपि जनसंख्या के आधार पर अल्पसंख्यकों के लिए सीटें आरक्षित करने का सुझाव दिया गया था।
3. नेहरू रिपोर्ट के जवाब में युवा राष्ट्रवादी नेताओं जैसे जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने 'इन्डिपेपेंडेंस फॉर इंडिया लीग' (Independence for India League) की स्थापना की क्योंकि वे डोमिनियन स्टेटस (Dominion Status) के प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं थे।
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