BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
16 views

भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी 'हरित जमा (Green Deposits)' फ्रेमवर्क और संधारणीय वित्त (Sustainable Finance) पहलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हरित जमा फ्रेमवर्क के अंतर्गत विनियमित संस्थाओं (REs) को यह अनुमति दी गई है कि वे ग्राहकों से ऐसी जमा राशि स्वीकार करें जिनका उपयोग विशेष रूप से ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवहन और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल अन्य सतत परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाए।
  2. 2. इस फ्रेमवर्क के अनुसार, हरित जमा के तहत जुटाई गई धनराशि का आवंटन केवल भारत के भीतर की जाने वाली परियोजनाओं तक ही सीमित है, और इसके लिए तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third-party verification) या प्रभाव मूल्यांकन अनिवार्य रूप से कराना आवश्यक है।
  3. 3. भारतीय रिज़र्व बैंक के इन दिशा-निर्देशों के तहत, वाणिज्यिक बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 'हरित जमा' के उपयोग और प्रबंधन का एक स्वतंत्र लेखा-परीक्षण (Independent Audit) प्रकाशित करना अनिवार्य किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी 'हरित जमा' (Green Deposits) फ्रेमवर्क के तहत विनियमित संस्थाओं (REs) को ऐसी जमाएं स्वीकार करने की अनुमति दी जाती है, जिनका उपयोग ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवहन, जल प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण जैसी हरित गतिविधियों एवं परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाता है। कथन 2 सही है: इस फ्रेमवर्क के प्रावधानों के अनुसार, हरित जमा के माध्यम से जुटाई गई धनराशि का उपयोग भारत के भीतर स्थित योग्य हरित परियोजनाओं के वित्तपोषण/पुनर्वितपोषण के लिए किया जाना चाहिए। साथ ही, संस्थाओं को अपने हरित जमा आवंटन की प्रभावशीलता की पुष्टि के लिए तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third-party verification/impact assessment) कराना आवश्यक होता है। कथन 3 गलत है: RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, विनियमित संस्थाओं को अपने बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के तहत हरित जमा के आवंटन पर वार्षिक आधार पर रिपोर्ट करना होता है और इसका बाह्य समीक्षा (External review/assurance) कराना होता है, लेकिन वित्तीय रिपोर्टिंग के हिस्से के रूप में एक 'स्वतंत्र लेखा-परीक्षण (Independent Audit) प्रकाशित करना' हर मामले में अनिवार्य वैधानिक नियम के रूप में इस प्रकार नहीं है, बल्कि यह प्रकटीकरण (Disclosure) और प्रभाव आकलन पर आधारित होता है। अतः कथन 3 सटीक नहीं है। इसलिए केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
Share:

Related Questions

→ भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के प्रावधानों और 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत स्थापित 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) एक संविधिक (Statutory) निकाय है, जिसकी अध्यक्षता देश के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, तथा इसके उपाध्यक्ष के रूप में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री कार्य करते हैं। 2. इस अधिनियम की धारा 29 के तहत किसी भी राष्ट्रीय उद्यान (National Park) या वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) के भीतर व्यावसायिक खनन या वन्यजीवों के आवास को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि की अनुमति केवल और केवल संबंधित राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन (Chief Wildlife Warden) की लिखित अनुमति से दी जा सकती है, जिसके लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की संस्तुति अनिवार्य नहीं होती है। 3. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न अनुसूचियों (Schedules) में वर्ष 2022 के संशोधन अधिनियम के माध्यम से व्यापक बदलाव किया गया है, जिसके तहत अनुसूचियों की कुल संख्या को घटाकर छह से चार कर दिया गया है, ताकि प्रजातियों के संरक्षण प्रबंधन को अधिक सुगम बनाया जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाएँ' (All India Services - अनुच्छेद 312) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से एक संकल्प पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक या expedient है, तो संसद विधि द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अलावा किसी भी नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन का प्रावधान कर सकती है। 2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, किंतु वे केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के अधीन सेवा करते हैं तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई या सेवा से हटाने (Dismissal) की अंतिम शक्ति संबंधित राज्य सरकार के पास होती है, जिसके नियंत्रण में वे कार्यरत होते हैं। 3. भारतीय वन सेवा (IFS) को वर्ष 1966 में अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के तहत एक अखिल भारतीय सेवा के रूप मेंconstitute (गठित) किया गया था, जो आज़ादी के बाद सृजित की गई पहली नई अखिल भारतीय सेवा थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या है? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XX' के अंतर्गत 'संविधान संशोधन' की प्रक्रिया (अनुच्छेद 368) और उसकी सीमाओं के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, और संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफ़ारिश से ही पुनःस्थापित किया जा सकता है। 2. संविधान के कुछ विशिष्ट उपबंधों, जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया या संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्तियों के विस्तार से संबंधित संशोधनों के लिए, संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत के साथ-साथ देश के कुल राज्यों में से कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से अनुसमर्थन (Ratification) होना अनिवार्य है। 3. उच्चतम न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में प्रतिपादित 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure) के सिद्धांत के अंतर्गत न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति और मौलिक अधिकारों तथा नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन को शामिल किया गया है, और संसद संविधान संशोधन के माध्यम से भी मूल संरचना का उल्लंघन नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष' (National Clean Energy Fund - NCEF) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष (NCEF) की स्थापना वर्ष 2010-11 के केंद्रीय बजट के तहत की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को वित्त पोषित करना और जीवाश्म ईंधन (विशेष रूप से कोयले) पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए नवीन अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को समर्थन देना था। 2. NCEF के लिए वित्त पोषण मुख्य रूप से देश में उत्पादित या आयातित कोयले (चाहे वह घरेलू हो या विदेशी) पर लगाए जाने वाले एक उपकर (Clean Energy Cess / Carbon Tax) के माध्यम से जुटाया जाता था, जिसे बाद में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के पश्चात 'क्षतिपूर्ति उपकर' (Compensation Cess) में परिवर्तित कर दिया गया। 3. राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष का प्रशासन और प्रबंधन पूरी तरह से नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन एक स्वतंत्र अंतर-मंत्रालयी समूह द्वारा किया जाता है, जो परियोजनाओं के चयन और संवितरण के लिए अंतिम निर्णय लेता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.