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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष' (National Clean Energy Fund - NCEF) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष (NCEF) की स्थापना वर्ष 2010-11 के केंद्रीय बजट के तहत की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को वित्त पोषित करना और जीवाश्म ईंधन (विशेष रूप से कोयले) पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए नवीन अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को समर्थन देना था।
  2. 2. NCEF के लिए वित्त पोषण मुख्य रूप से देश में उत्पादित या आयातित कोयले (चाहे वह घरेलू हो या विदेशी) पर लगाए जाने वाले एक उपकर (Clean Energy Cess / Carbon Tax) के माध्यम से जुटाया जाता था, जिसे बाद में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के पश्चात 'क्षतिपूर्ति उपकर' (Compensation Cess) में परिवर्तित कर दिया गया।
  3. 3. राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष का प्रशासन और प्रबंधन पूरी तरह से नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन एक स्वतंत्र अंतर-मंत्रालयी समूह द्वारा किया जाता है, जो परियोजनाओं के चयन और संवितरण के लिए अंतिम निर्णय लेता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष (NCEF) की स्थापना वित्तीय वर्ष 2010-11 के केंद्रीय बजट के माध्यम से की गई थी। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा पहलों को बढ़ावा देना और जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा उत्पादन के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए अनुसंधान और वित्त पोषण प्रदान करना था। कथन 2 गलत है: NCEF के लिए राजस्व कोयले पर लगाए जाने वाले स्वच्छ ऊर्जा उपकर (Clean Energy Cess) के माध्यम से जुटाया जाता था। हालाँकि, जब 2017 में जीएसटी लागू किया गया, तो इस उपकर को समाप्त कर दिया गया और इसके स्थान पर 'GST (कम्पेन्सेशन टू स्टेट्स) एक्ट, 2017' के तहत 'क्षतिपूर्ति उपकर' (Compensation Cess) लाया गया, जिससे प्राप्त होने वाले फंड को सीधे NCEF में नहीं बल्कि राज्यों को राजस्व क्षति की भरपाई के लिए एक अलग फंड में ट्रांसफर किया जाने लगा। कथन 3 गलत है: NCEF का प्रशासन नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अंतर्गत नहीं, बल्कि **केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance)** (आर्थिक मामलों के विभाग) के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन एक अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group) द्वारा किया जाता है।
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