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Indian Polity
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भारत का प्रथम नागरिक कौन?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
राष्ट्रपति।
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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत घोषित 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वित्तीय आपातकाल की घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसकी तिथि से दो महीने के भीतर अनुमोदन मिलना अनिवार्य है।
2. एक बार अनुमोदित होने के बाद, वित्तीय आपातकाल अनिश्चित काल के लिए तब तक लागू रहता है जब तक कि इसे राष्ट्रपति द्वारा वापस न लिया जाए।
3. वित्तीय आपातकाल के दौरान, राष्ट्रपति केंद्र और राज्यों की सेवा करने वाले सभी या किसी भी वर्ग के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में कटौती का निर्देश दे सकते हैं, जिसमें उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा (Constituent Assembly) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कुल 296 सीटों (ब्रिटिश भारत के प्रांतों के लिए) में से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 208 सीटें प्राप्त कीं, जबकि मुस्लिम लीग ने 73 सीटें जीतीं, और इस चुनाव में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) का प्रयोग न करके सीमित मताधिकार के आधार पर प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से एकल संक्रमणीय मत के द्वारा सदस्यों का चयन किया गया था।
2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित की गई, जिसमें मुस्लिम लीग ने इस बैठक का पूर्णतः बहिष्कार किया और पाकिस्तान के लिए एक अलग संविधान सभा की मांग दोहराई, तथा फ्रांसिसी परंपरा का अनुसरण करते हुए सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Provisional President) चुना गया था।
3. उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution), जिसे 13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था, में भारत को एक 'संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य' (Sovereign Socialist Secular Democratic Republic) घोषित करने का स्पष्ट प्रावधान किया गया था, जिसे सभा द्वारा उसी दिन सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश प्राप्त होने से पूर्व ही मौखिक परामर्श पर आपातकाल की उद्घोषणा कर सकता है।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को केवल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर ही न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, जबकि 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर की गई आपातकाल की घोषणा को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
3. अनुच्छेद 356 के तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने पर राज्य विधानसभा को या तो विघटित किया जा सकता है या निलंबित रखा जा सकता है, किंतु इस उपबंध के अंतर्गत राज्य के उच्च न्यायालय की संवैधानिक शक्तियों और क्षेत्राधिकार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है और उच्च न्यायालय पूर्ववत कार्य करता रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उससे संबंधित न्यायिक दृष्टांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुता' के आदर्शों को अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम से ग्रहण किया गया है।
2. 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और संसद अनुच्छेद 368 के अंतर्गत इसमें संशोधन कर सकती है, बशर्ते मूल ढांचे का उल्लंघन न हो।
3. 'गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य' (1967) और 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य' (1973) के बीच के न्यायिक सफर में प्रस्तावना की स्थिति को स्पष्ट करते हुए अंततः यह स्थापित किया गया कि प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथा यह गैर-न्यायोज्य (Non-justiciable) है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों की प्रकृति, उनके अपवादों और न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 13 न्यायिक समीक्षा का आधार प्रदान करता है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई ऐसी कोई भी विधि जो मूल अधिकारों का अल्पीकरण करती है, शून्य (Void) होगी; किंतु सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार संविधान संशोधन अधिनियम (Constitutional Amendment Act) को अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) नहीं माना जा सकता और वे मूल अधिकारों को संशोधित करने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र हैं।
2. अनुच्छेद 19(1)(g) के अंतर्गत सभी नागरिकों को कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु राज्य इस अधिकार के प्रयोग पर किसी पेशेवर या तकनीकी अर्g (Professional or Technical Qualifications) के आवश्यक होने या राज्य द्वारा किसी व्यापार, व्यवसाय या सेवा को पूर्णतः या भागतः अपने नियंत्रण में लेने के लिए कोई भी विधि बनाने से प्रतिबंधित नहीं है।
3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण' का अधिकार नागरिकों के साथ-साथ विदेशियों को भी समान रूप से उपलब्ध है, तथा उच्चतम न्यायालय ने 'मेनका गांधी वाद' (1978) में यह स्पष्ट किया कि 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) में प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांत, निष्पक्षता और औचित्य का समावेश होना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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