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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित सकल घरेलू उत्पाद' (Green GDP) और पर्यावरणीय लेखांकन (Environmental Accounting) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हरित सकल घरेलू उत्पाद (Green GDP) पारंपरिक जीडीपी का एक संशोधित रूप है, जो आर्थिक उत्पादन के मौद्रिक मूल्य को मापने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के ह्रास और पर्यावरण प्रदूषण से होने वाली क्षति की लागत को भी इसमें से घटाकर परिकलित किया जाता है।
  2. 2. संयुक्त राष्ट्र की 'सीमा-पार पर्यावरण और आर्थिक लेखा प्रणाली' (SEEA - System of Environmental-Economic Accounting) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरणीय और आर्थिक डेटा को एकीकृत करने के लिए एक सांख्यिकीय ढाँचे के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  3. 3. भारत में हरित लेखांकन (Green Accounting) की अवधारणा को लागू करने और इसकी कार्यप्रणाली तैयार करने के लिए सबसे पहले वर्ष 2011 में 'आर. रंगराजन समिति' का गठन किया गया था, जिसकी सिफारिशों के आधार पर देश में आधिकारिक तौर पर वार्षिक 'ग्रीन जीडीपी' के आंकड़े प्रकाशित किए जाते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: हरित सकल घरेलू उत्पाद (Green GDP) पारंपरिक जीडीपी का एक ऐसा संशोधित रूप है जो आर्थिक विकास के दौरान प्राकृतिक पूंजी के ह्रास (Depletion of natural resources) और पर्यावरण प्रदूषण (Environmental degradation) से होने वाली क्षति के आर्थिक मूल्यों को ध्यान में रखता है यानी पारंपरिक जीडीपी से पर्यावरणीय लागत को घटाया जाता है। कथन 2 सही है: संयुक्त राष्ट्र द्वारा विकसित 'सिस्टम ऑफ एनवायरनमेंटल-इकोनॉमिक अकाउंटिंग' (SEEA) दुनिया भर में आर्थिक और पर्यावरणीय आंकड़ों को एकीकृत करने के लिए आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय ढांचा (Statistical framework) है। कथन 3 गलत है: भारत में हरित लेखांकन के लिए वर्ष 2011 में 'डॉ. पार्थसारथी शोम' (Dr. Parthasarathi Shome) की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था, न कि आर. रंगराजन समिति का। इसके अलावा, भारत में अभी तक नियमित या आधिकारिक रूप से वार्षिक 'ग्रीन जीडीपी' के आंकड़े नियमित रूप से प्रकाशित नहीं किए जाते हैं, यद्यपि इस दिशा में प्रयास जारी हैं।
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