त्वरित लिंक्स
Civil services
16 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP) तथा 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - UCC) से संबंधित 'अनुच्छेद 44' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 44 में यह उपबंध किया गया है कि राज्य, भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह मूल अधिकार (Fundamental Rights) की भांति न्यायोचित (Justiciable) होने के कारण सीधे उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय है।
- 2. गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 (Portuguese Civil Code) के रूप में एक समान पारिवारिक कानून वर्तमान में भी लागू है, जो धार्मिक प्राथमिकताओं के बिना अधिकांश मामलों में सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है।
- 3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे शाह बानो केस और सरला मुद्गल केस) में इस बात पर बल दिया है कि देश में एक समान नागरिक संहिता को लागू किया जाना चाहिए, जिससे राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिले और लैंगिक न्याय सुनिश्चित हो सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में शामिल राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP) देश के शासन में मौलिक हैं, किंतु वे संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार 'अन्यायोचित' (Non-justiciable) हैं, यानी इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा बलपूर्वक लागू नहीं कराया जा सकता। इसलिए यह मूल अधिकारों की तरह न्यायोचित नहीं हैं। कथन 2 सही है क्योंकि गोवा में पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 लागू है, जो विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में धर्मनिरपेक्ष रूप से अधिकांश नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है। कथन 3 सही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने शाह बानो मामले (1985) और सरला मुद्गल मामले (1995) सहित कई अन्य निर्णयों में सरकार को अनुच्छेद 44 के तहत देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है।
Related Questions
→
भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'शिक्षा का अधिकार' (Right to Education) से संबंधित है?
→
निम्नलिखित में से कौन सी एक ठंडी महासागरीय जलधारा है?
→
भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, 'वर्ष 1920 के नागपुर अधिवेशन' (Nagpur Session) और 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नागपुर में हुए कांग्रेस के इस ऐतिहासिक अधिवेशन की अध्यक्षता सी. विजयराघवाचारी ने की थी, और इसी अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया तथा कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन करते हुए प्रांतीय कांग्रेस समितियों का गठन भाषाई आधार पर (Linguistic basis) करने का निर्णय लिया गया।
2. असहयोग आंदोलन के दौरान देश भर में सरकारी उपाधियों और मानद पदों का परित्याग किया गया, न्यायालयों का बहिष्कार किया गया, और साथ ही स्वदेशी वस्तुओं तथा खादी के प्रचार-प्रसार को प्राथमिकता दी गई, जिसके तहत विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई, जिसे रबीन्द्रनाथ टैगोर ने 'निष्ठुर बर्बादी' (Cruel waste) बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की थी।
3. वर्ष 1922 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में घटी 'चौरी-चौरा' की हिंसक घटना के तुरंत पश्चात महात्मा गांधी ने बारदोली में कांग्रेस की कार्य समिति की बैठक बुलाई और आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा की, जिस कारण से कम्युनिस्ट नेता एम. एन. रॉय और सुभाष चंद्र बोस सहित कई युवा नेताओं ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रीय चेतना का परिपक्व चरण बताया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 79 से 122) के अंतर्गत 'संसद की विधायी प्रक्रिया और वित्तीय मामलों' से संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार 'धन विधेयक' (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं; तथा राज्यसभा को धन विधेयक प्राप्त होने की तारीख से चौदह दिन की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों सहित या उसके बिना विधेयक को लोकसभा को वापस करना होता है, और यदि इस अवधि के भीतर राज्यसभा विधेयक को वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित समझा जाता है जिसमें वह लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
2. अनुच्छेद 110 के उपबंधों के अनुसार यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, तो लोकसभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है, और इस निर्णय को किसी भी न्यायालय में, या संसद के किसी भी सदन में (स्वयं लोकसभा को छोड़कर), या राष्ट्रपति के समक्ष चुनौती दी जा सकती है यदि अध्यक्ष ने संविधान की प्रक्रिया का उल्लंघन किया हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 117 के अनुसार कोई भी वित्तीय विधेयक (Financial Bill), जो अनुच्छेद 110 के खंड (क) से (च) में विनिर्दिष्ट किसी भी विषय से संबंधित है, लोकसभा में राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति के बिना पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता है, किंतु राज्यसभा में ऐसे विधेयक पर विचार करते समय राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति का होना अनिवार्य नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत संविधान संशोधन की प्रक्रिया, 'मूल ढांचा सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) और इससे संबंधित न्यायिक निर्णयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके अंतर्गत संसद संविधान के 'भाग III' (मौलिक अधिकार) सहित किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, किंतु इस प्रकार का संशोधन दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग कुल सदस्यता के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम- से-कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा ही पारित किया जाना अनिवार्य है।
2. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की तेरह-न्यायाधीशों की अब तक की सबसे बड़ी संविधान पीठ ने बहुमत से यह ऐतिहासिक निर्णय दिया कि संसद की संविधान संशोधन की शक्ति असीमित नहीं है, और संसद अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को नष्ट या क्षीण नहीं कर सकती है, हालाँकि इस निर्णय में 'मूल ढांचे' के घटकों की कोई प्रत्यक्ष या विस्तृत परिभाषा नहीं दी गई थी।
3. 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि संविधान का 42 वां संशोधन अधिनियम, 1978 (जिसके द्वारा अनुच्छेद 368 में खंड (4) और (5) जोड़े गए थे, जो संसद की संशोधन शक्ति को न्यायिक समीक्षा से पूर्णतः मुक्त करते थे) संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करता है, क्योंकि न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का अधिकार संविधान की मूल विशेषता का एक अनिवार्य हिस्सा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.