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Civil services
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'शिक्षा का अधिकार' (Right to Education) से संबंधित है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 21A 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है।
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भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों (अनुच्छेद 256 से 263) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 256 के अनुसार, प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का प्रयोग इस प्रकार किया जाएगा जिससे संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और उस राज्य में लागू किसी भी पूर्ववर्ती कानून का अनुपालन सुनिश्चित हो सके, तथा संघ की कार्यकारी शक्ति राज्य को ऐसे निर्देश देने तक विस्तारित होती है जो इस उद्देश्य के लिए आवश्यक प्रतीत हों।
2. संविधान के अनुच्छेद 262 के अंतर्गत संसद को अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों के पानी के उपयोग, नियंत्रण या वितरण से संबंधित किसी भी विवाद या शिकायत के न्यायनिर्णयन (Adjudication) के लिए विधि द्वारा उपबंध करने की शक्ति प्राप्त है, और संसद इस अनुच्छेद के तहत बनाए गए किसी भी कानून के अधिकार क्षेत्र से उच्चतम न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को बाहर (Exclude) कर सकती है।
3. अनुच्छेद 263 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति को 'अंतर-राज्य परिषद' (Inter-State Council) की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच करना, उन पर बहस करना तथा ऐसे विषयों से संबंधित नीतियों का बेहतर समन्वय करने के लिए संस्तुति करना है, तथा यह एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) और उससे जुड़े समानांतर सरकारों (Parallel Governments) के गठन के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र और प्रशासनिक विद्रोह के रूप में कई 'समानांतर सरकारों' (Parallel Governments) की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया (उत्तर प्रदेश) में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में, तामलुक (बंगाल) में 'जातीय सरकार' के रूप में और सतारा (महाराष्ट्र) में 'प्रति सरकार' के रूप में सबसे दीर्घकालिक सरकार स्थापित हुई थी।
2. तामलुक की 'जातीय सरकार' के अंतर्गत सशस्त्र स्वयंसेवकों की एक वाहिनी का गठन किया गया था जिसे 'विद्या वाहिनी' कहा जाता था, और इस सरकार ने चक्रवात पीड़ितों के लिए राहत कार्य करने के साथ-साथ अपनी स्वयं की न्यायपालिका और प्रशासनिक व्यवस्था भी संचालित की थी।
3. सतारा की 'प्रति सरकार' (Prati Sarkar) का नेतृत्व नाना पाटिल और चव्हाण बंधुओं द्वारा किया गया था, और यह इस आंदोलन के दौरान स्थापित होने वाली सभी समानांतर सरकारों में सबसे अधिक समय तक (वर्ष 1945 के मध्य तक) सक्रिय रही, जिसने भूमिगत पत्रिकाओं और 'न्यायदान मंडलों' के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वशासन स्थापित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा किस कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, जिसमें 23 देशों के प्रतिनिधि भारत की चुनाव प्रक्रिया का अध्ययन करेंगे?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 311' के अंतर्गत लोक सेवकों को प्राप्त सुरक्षा और संवैधानिक संरक्षण के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 311 संघ या राज्य के अधीन सिविल पद धारण करने वाले व्यक्तियों को बर्खास्त करने, हटाने या रैंक में अवनत करने (Reduction in rank) के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है, और यह सुरक्षा न केवल सिविल सेवकों बल्कि रक्षा सेवाओं (Defence Services) के सदस्यों पर भी समान रूप से लागू होती है।
2. अनुच्छेद 311 के तहत किसी भी लोक सेवक को तब तक बर्खास्त या पदच्युत नहीं किया जा सकता जब तक कि उसे उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना देकर सुनवाई का उचित अवसर (Reasonable opportunity of being heard) न दिया गया हो।
3. इस अनुच्छेद के अंतर्गत कुछ अपवादात्मक परिस्थितियाँ भी शामिल हैं, उदाहरण के लिए, यदि किसी लोक सेवक को आपराधिक आचरण के आधार पर दोषी ठहराया जाता है, या यदि संबंधित प्राधिकारी के लिए यह व्यावहारिक नहीं है कि वह ऐसा अवसर दे, या यदि राष्ट्रपति या राज्यपाल संतुष्ट हैं कि राज्य की सुरक्षा के हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो सुनवाई का अवसर देने की आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था, वास्तुकला और राजस्व प्रणाली से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सल्तनत काल में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा प्रशासनिक नियंत्रण और राजस्व सुधारों के तहत 'बिसवा' (Biswa) पद्धति को पैमाइश (Measurement) के आधार पर भू-राजस्व निर्धारण का मुख्य पैमाना बनाया गया था, जिसके अंतर्गत कुल उपज का आधा हिस्सा (50 प्रतिशत) राज्य के लगान के रूप में नकद या अनाज के रूप में वसूला जाता था।
2. फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल में सल्तनत वास्तुकला में एक नई विशेषता का विकास हुआ, जिसमें इमारतों की दीवारों को बाहर की ओर ढलानदार (Sloping walls) बनाना शामिल था, जो मुख्य रूप से तुगलक वास्तुकला की एक विशिष्ट पहचान बन गई, और इस शैली की सबसे उत्कृष्ट शुरुआत गयासुद्दीन तुगलक के मकबरे से होती है।
3. सल्तनत काल में राजस्व व्यवस्था के अंतर्गत 'खराज' (Kharaj) गैर-मुस्लिम प्रजा से लिया जाने वाला एक प्रकार का भू-राजस्व कर था, जबकि 'उश्र' (Ushr) केवल मुस्लिम किसानों द्वारा अपनी भूमि की पैदावार पर दिया जाने वाला धार्मिक कर था, और युद्ध में लूटे गए माल का चार-पंजी (80 प्रतिशत) हिस्सा राज्य के कोष में तथा एक-पंचमांश (20 प्रतिशत) हिस्सा सैनिकों में बांटा जाता था।
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