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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपात उपबंध' (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपात की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के वास्ते 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति द्वारा ऐसी घोषणा तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा लिखित रूप में संघ के प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों का निर्णय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए।
- 2. राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा उसके अनुमोदन की तिथि से एक महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, अन्यथा वह एक महीने की समाप्ति पर स्वतः समाप्त हो जाएगी।
- 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है, और अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह अन्य मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए न्यायालयों में जाने के अधिकार को निलंबित कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार, राष्ट्रीय आपात की घोषणा 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर की जा सकती है (मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' शब्द था, जिसे 44वें संशोधन, 1978 द्वारा बदला गया)। राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा तभी कर सकता है जब 'संघीय मंत्रिमंडल' (Cabinet - जिसमें केवल प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं, न कि सभी मंत्री) द्वारा ऐसा निर्णय लिखित रूप में राष्ट्रपति को संसूचित किया जाता है।
कथन 2 गलत है: राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा उसके जारी किए जाने की तारीख से 'एक महीने' (मूलतः दो महीने था, जिसे 44वें संशोधन द्वारा घटाकर एक महीना किया गया) के भीतर संसद के दोनों सदनों द्वारा 'विशेष बहुमत' द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है।
कथन 3 गलत है: राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्राप्त मूल अधिकार 'स्वतः' (Automatically) तभी निलंबित होते हैं जब आपातकाल की घोषणा 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर की गई हो, 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर नहीं। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 20 और 21 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों को कभी भी (राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी) निलंबित नहीं किया जा सकता है। अतः उपर्युक्त तीनों कथन गलत हैं।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'रामसर अभीसमय' (Ramsar Convention) और भारत में आर्द्रभूमियों (Wetlands) के संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रामसर अभीसमय वर्ष 1971 में यूनेस्को (UNESCO) के तत्वावधान में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षरित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जो विशेष रूप से जलीय पक्षियों के आवास के रूप में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग (Wise Use) को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
2. 'मोंट्रो रिकॉर्ड' (Montreux Record) रामसर सूची के अंतर्गत दर्ज आर्द्रभूमियों का एक रजिस्टर है, जिसे पारिस्थितिकीय स्वरूप में परिवर्तन, प्रदूषण या अन्य मानवीय हस्तक्षेपों के कारण आसन्न खतरे की स्थिति में रामसर स्थलों के साथ जोड़ा जाता है, और वर्तमान में भारत के सभी रामसर स्थल अनिवार्य रूप से इस रिकॉर्ड के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं।
3. भारत में आर्द्रभूमियों (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत आर्द्रभूमि प्राधिकरणों को यह वैधानिक अधिकार दिया गया है कि वे देश की सभी अधिसूचित आर्द्रभूमियों के भीतर सभी प्रकार की मानवीय गतिविधियों, जैसे कि नौकायन, मछली पकड़ना और स्थानीय समुदायों द्वारा पारंपरिक उपयोग, पर पूर्ण प्रतिबंध लगा सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 108' के अंतर्गत संसद के 'संयुक्त अधिवेशन' (Joint Sitting) के प्रावधानों और इसकी कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 108 के अनुसार, किसी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) को पारित करने को लेकर लोकसभा और राज्यसभा के बीच गतिरोध उत्पन्न होने पर राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आहूत कर सकता है, और यह प्रावधान धन विधेयक (Money Bill) तथा संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill) दोनों पर समान रूप से लागू होता है।
2. यदि संयुक्त बैठक के लिए राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो भी वह संयुक्त बैठक आहूत की जा सकती है और लोकसभा के विघटन से संयुक्त बैठक का प्रस्ताव व्यपगत (Lapse) नहीं होता है।
3. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष (Speaker) द्वारा की जाती है, और यदि अध्यक्ष अनुपस्थित हैं, तो लोकसभा के उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) तथा उनकी भी अनुपस्थिति में राज्यसभा के उपसभापति (Deputy Chairman) द्वारा की जाती है, किंतु राज्यसभा के सभापति (Chairman) कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र और राज्यों के बीच 'विधायी संबंधों' (अनुच्छेद 245 से 255) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को पूरे या भारत के किसी भी भाग के लिए कानून बनाने की प्रादेशिक शक्ति (Territorial jurisdiction) प्राप्त है, तथा संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि उनका अतिरिक्त-प्रादेशिक (Extra-territorial) प्रवर्तन होता है।
2. संविधान की सातवीं अनुसूची की 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) के विषयों पर विधि बनाने की शक्ति संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों को प्राप्त है, किंतु यदि किसी समवर्ती सूची के विषय पर राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून संसद द्वारा बनाए गए पूर्ववर्ती कानून के प्रतिकूल या असंगत है, तो संसद का कानून मान्य होगा और राज्य का कानून उस सीमा तक शून्य हो जाएगा, भले ही राज्य के कानून को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर यह घोषित करे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में प्रगणित किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है, जिसे बार-बार अनिश्चितकाल तक बढ़ाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' (Right to Constitutional Remedies) और जारी की जाने वाली विभिन्न रिटों (Writs) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए निर्देश, आदेश या रिट—जिनमें बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेषण और प्रतिषेध शामिल हैं—जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और यह अधिकार स्वयं में एक मूल अधिकार है।
2. 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) रिट का शाब्दिक अर्थ 'कोशिश करना या प्रस्तुत करना' है, जिसे किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखने के विरुद्ध जारी किया जाता है, और यह रिट सार्वजनिक प्राधिकरणों के साथ-साथ निजी व्यक्तियों दोनों के विरुद्ध भी जारी की जा सकती है।
3. 'उत्प्रेषण' (Certiorari) और 'प्रतिषेध' (Prohibition) दोनों ही रिटें न्यायिक और अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के विरुद्ध जारी की जाती हैं, जिसमें 'प्रतिषेध' एक उपचारात्मक (Curative) रिट है जो किसी निम्न न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकने के लिए निर्णय पारित होने के पश्चात जारी की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 108' के अंतर्गत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) के प्रावधान और उसकी प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 108 के अनुसार, दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल साधारण विधेयकों (Ordinary Bills) और वित्तीय विधेयकों (Financial Bills) के संदर्भ में ही लागू होता है, और यह प्रक्रिया संविधान संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) तथा धन विधेयकों (Money Bills) के मामले में किसी भी स्थिति में लागू नहीं की जा सकती है।
2. यदि किसी साधारण विधेयक के संबंध में दोनों सदनों के बीच गतिरोध उत्पन्न हो जाता है और राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाने के अपने आशय की सूचना दे देते हैं, तो इसके बाद यदि लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो भी राष्ट्रपति द्वारा बुलाई जाने वाली संयुक्त बैठक समाप्त नहीं होती है और विघटन के बावजूद संयुक्त बैठक आयोजित की जा सकती है।
3. संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष (Speaker) द्वारा की जाती है, और यदि अध्यक्ष अनुपस्थित हैं, तो लोकसभा के उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) तथा उनकी भी अनुपस्थिति में राज्यसभा के उपसभापति (Deputy Chairman) द्वारा की जाती है, लेकिन यदि इनमें से कोई भी उपस्थित न हो, तो दोनों सदनों द्वारा संयुक्त रूप से निर्वाचित सदन का कोई अन्य सदस्य इसकी अध्यक्षता कर सकता है।
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