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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों (जिनमें प्रवर्तनीय विधिक अधिकार भी शामिल हैं) के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और तीव्र निपटान के लिए की गई थी।
  2. 2. यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित नागरिक न्यायालय की प्रक्रिया से कड़ाई से बंधा हुआ है और यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) के आधार पर कार्य करने के लिए बाध्य नहीं है।
  3. 3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के किसी आदेश, निर्णय या अवार्ड से व्यथित कोई भी व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, किंतु यह अपील आदेश की तारीख से साठ दिनों के भीतर की जानी अनिवार्य है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए की गई थी। कथन 2 गलत है: NGT सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है। कथन 3 गलत है: NGT के किसी आदेश या निर्णय से व्यथित व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है, किंतु इसके लिए आदेश की तारीख से **90 दिनों** (न कि 60 दिनों) के भीतर अपील दायर करनी होती है।
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