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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकारों' (Fundamental Rights) और उनके प्रवर्तन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 13 यह सुनिश्चित करता है कि राज्य ऐसा कोई कानून नहीं बनाएगा जो भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनता है या उनका अल्पीकरण करता है, और इस प्रयोजन के लिए 'विधि' (Law) शब्द के अंतर्गत केवल संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए अधिनियम (Acts) ही शामिल हैं, न कि अध्यादेश, उप-विधियाँ, नियम, या रूढ़ियाँ।
- 2. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह अधिकार स्वयं में एक मूल अधिकार है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है जो उच्च न्यायालयों की न्यायक्षेत्रीय शक्ति का हिस्सा है न कि मूल अधिकार।
- 3. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, अर्ध-सैनिक बलों, पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के सदस्यों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध या उनका पूर्ण निरसन (Abrogation) कर सके ताकि उनके द्वारा अपने कर्तव्यों का उचित निर्वाह और अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके, तथा ऐसी विधि बनाने की यह शक्ति केवल संसद के पास है, राज्य विधानमंडलों के पास नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है: संविधान के अनुच्छेद 13 के अनुसार, 'विधि' (Law) शब्द की परिभाषा बहुत व्यापक है। इसके अंतर्गत केवल संसद या राज्य विधानमंडल के अधिनियम ही नहीं, बल्कि अध्यादेश, आदेश, उप-विधियाँ (By-laws), नियम (Rules), विनियम (Regulations), और यहाँ तक कि रूढ़ियाँ या प्रथाएँ (Customs or usages) भी शामिल हैं जिनमें भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर कानून जैसी बलवत्ता है। अतः कथन 1 गलत है।
कथन 2 सत्य है: संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय से मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उपचार प्राप्त करने का अधिकार स्वयं एक मूल अधिकार है (डॉ. अम्बेडकर ने इसे 'संविधान की आत्मा और हृदय' कहा था)। दूसरी ओर, उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने की शक्ति है, जो उनकी व्यापक न्यायिक समीक्षा और क्षेत्राधिकार का हिस्सा है, न कि स्वयं एक मूल अधिकार।
कथन 3 सत्य है: अनुच्छेद 33 संसद को यह विशेष अधिकार देता है कि वह सशस्त्र बलों (Armed Forces), लोक व्यवस्था बनाए रखने वाले बलों (Forces charged with maintenance of public order) और खुफिया एजेंसियों के सदस्यों के मूल अधिकारों के अनुप्रयोग को प्रतिबंधित या समाप्त कर सके, ताकि उनके बीच अनुशासन बना रहे। यह शक्ति केवल संसद को प्राप्त है, किसी राज्य विधानमंडल को नहीं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'केंद्र-राज्य विधายक संबंध' (Legislative Relations between Centre and States) तथा 'अनुच्छेद 245 से 255' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार, संसद को भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, और किसी राज्य के विधान-मंडल को पूरे राज्य या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, किंतु संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून को इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि उसका 'अतिरिक्त प्रादेशिक विस्तार' (Extra-territorial operation) है।
2. यदि राज्य सूची (List II) में प्रगणित किसी विषय पर राष्ट्रीय हित में कानून बनाना आवश्यक हो जाए, तो संविधान के अनुच्छेद 249 के तहत राज्य सभा द्वारा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित किए जाने पर संसद उस विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए विधि बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम तीन वर्ष की अवधि तक प्रवृत्त रह सकता है।
3. अनुच्छेद 254 के अनुसार, यदि समवर्ती सूची (List III) में उल्लिखित किसी विषय पर राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि संसद द्वारा बनाई गई किसी पूर्ववर्ती विधि या किसी मौजूदा विधि के उपबंधों के प्रतिकूल (Repugnant) है, तो संसद द्वारा बनाई गई विधि मान्य होगी, चाहे राज्य की विधि को राष्ट्रपति की अनुमति बाद में क्यों न प्राप्त हो गई हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' और 'भाग IX-A' के अंतर्गत 'पंचायतों' तथा 'नगरपालिकाओं' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में जोड़ी गई ग्यारहवीं अनुसूची के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने के संबंध में कुल 29 कार्यात्मक विषय सौंपे गए हैं, तथा इस भाग के प्रावधान देश के सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों पर बिना किसी अपवाद के पूर्ण रूप से अनिवार्य रूप से लागू होते हैं।
2. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत नगरपालिकाओं के तीन प्रकार - नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम - का गठन किया जाता है, तथा प्रत्येक नगरपालिका में वार्ड समितियों (Ward Committees) का गठन उन नगरपालिकाओं के लिए अनिवार्य है जिनकी जनसंख्या दस लाख या उससे अधिक है।
3. पंचायतों और नगरपालिकाओं दोनों के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करने तथा मतदाता सूचियों को तैयार कराने की शक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा नियुक्त किए जाने वाले 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) में निहित होती है, जिसे हटाने की प्रक्रिया और शर्तें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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