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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, भारत के 'राष्ट्रीय उद्यान' (National Parks) और 'वन्यजीव अभ्यारण्यों' (Wildlife Sanctuaries) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत किसी क्षेत्र को 'राष्ट्रीय उद्यान' के रूप में अधिसूचित करने की शक्ति केवल राज्य सरकार के पास है, जबकि 'वन्यजीव अभ्यारण्य' के मामले में राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी राजपत्र (Gazette) में अधिसूचना जारी करने का अंतिम अधिकार प्राप्त है।
- 2. राष्ट्रीय उद्यानों में मानवीय गतिविधियों, जैसे कि मवेशी चराना, निजी स्वामित्व के अधिकार (Private ownership rights) और वानिकी उत्पादों का संग्रहण, को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाता है और किसी भी स्थिति में इनकी अनुमति नहीं दी जाती है, जबकि वन्यजीव अभ्यारण्यों में मुख्य वन्यजीव वार्डन (Chief Wildlife Warden) की अनुमति से कुछ सीमित मानवीय गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है।
- 3. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की मूल संरचना के तहत, राष्ट्रीय उद्यानों की सीमाओं में किसी भी प्रकार के परिवर्तन के लिए राज्य सरकार को अनिवार्य रूप से भारतीय वन्यजीव बोर्ड (National Board for Wildlife - NBW) की पूर्व अनुशंसा या अनुमोदन प्राप्त करना होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 35 के तहत राज्य सरकार किसी क्षेत्र को 'राष्ट्रीय उद्यान' के रूप में घोषित कर सकती है, और धारा 26क के तहत 'वन्यजीव अभ्यारण्य' के रूप में भी राज्य सरकार ही अधिसूचना जारी करती है। केंद्र सरकार के पास सीधे तौर पर सामान्यतः अभ्यारण्य या राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने की व्यापक शक्ति इस अधिनियम के तहत नहीं है जब तक कि विशेष परिस्थितियों या केंद्रीय संस्थाओं (जैसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) की संस्तुति न हो, और विशेषकर अभ्यारण्य का अधिकार भी राज्य सरकार के पास ही होता है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
कथन 2 सही है: राष्ट्रीय उद्यानों (National Parks) में वन्यजीव संरक्षण के कड़े नियम होते हैं। यहाँ किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधियों, जैसे कि पशुओं को चराना, निजी भूमि अधिकार या वनोपज का संग्रहण (Collection of forest produce), की अनुमति नहीं होती है। इसके विपरीत, वन्यजीव अभ्यारण्यों (Wildlife Sanctuaries) में मुख्य वन्यजीव वार्डन के नियंत्रण और अनुमति के अधीन मवेशी चराने और कुछ सीमित मानवीय गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है यदि वे वन्यजीवों के संरक्षण में बाधक न हों।
कथन 3 सही है: सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभ्यारण्य की सीमाओं में किसी भी प्रकार के परिवर्तन या वि-अधिसूचना (Denotification) के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBW) की स्थायी समिति की पूर्व अनुमति और अनुशंसा अनिवार्य है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 75' (Article 75) और 'मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व' (Collective Responsibility) के सिद्धांत के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव (No-confidence Motion) के पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है, भले ही वह नीतिगत मतभेद किसी एक विशिष्ट मंत्री से जुड़ा हो।
2. व्यक्तिगत रूप से मंत्रियों का उत्तरदायित्व राष्ट्रपति के प्रति होता है, अर्थात राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर किसी भी मंत्री को उस समय भी पदच्युत (Dismiss) कर सकता है जब संबंधित मंत्री को लोकसभा का विश्वास प्राप्त हो।
3. 'सामूहिक उत्तरदायित्व' के सिद्धांत के तहत कैबिनेट के प्रत्येक निर्णय के लिए सरकार के सभी मंत्रियों (चाहे वे कैबिनेट मंत्री हों, राज्य मंत्री हों या उपमंत्री) को सार्वजनिक रूप से समर्थन देना अनिवार्य होता है, और यदि कोई मंत्री मंत्रिमंडल के किसी निर्णय से असहमत है तो उसे मंत्रिमंडल की बैठक के बाहर उसकी खुलकर आलोचना करने की स्वतंत्रता प्राप्त होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संसद की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 110' के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill) की परिभाषा और उसकी पारित होने की प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोई विधेयक धन विधेयक तभी माना जाएगा जब उसमें केवल ऐसे उपबंध हों जो कर-अध्यारोपण, उत्सादन, छूट, परिवर्तन या विनियमन से संबंधित हों, तथा इसके अंतर्गत किसी स्थानीय प्राधिकारी या निकाय द्वारा स्थानीय करों (Local taxes) के आरोपण से संबंधित उपबंध भी शामिल होते हैं।
2. लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद जब धन विधेयक को राज्यसभा में भेजा जाता है, तो राज्यसभा के पास इसे संशोधित करने या अस्वीकार करने की पूर्ण शक्ति होती है, बशर्ते वह इसे 14 दिनों के भीतर वापस लोकसभा को भेज दे।
3. यदि लोकसभा द्वारा राज्यसभा की किसी भी सिफारिश को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो भी वह धन विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित माना जाता है जिस रूप में वह लोकसभा द्वारा मूलतः पारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'ग्लोबल हंगर इंडेक्स' (Global Hunger Index - GHI) और इसके माप के संकेतकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) को प्रतिवर्ष 'कंसर्न वर्ल्डवाइड' (Concern Worldwide) और 'वेल्थुंगरहिल्फ' (Welthungerhilfe) नामक गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किया जाता है।
2. इस सूचकांक की गणना चार प्रमुख संकेतकों के आधार पर की जाती है: अल्पपोषण (Undernourishment), बाल वर्धापन (Child Wasting), बाल स्टंटिंग (Child Stunting), और बाल मृत्यु दर (Child Mortality)।
3. GHI स्कोर के निर्धारण में बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित तीनों संकेतकों (स्टंटिंग, वर्धापन और मृत्यु दर) का भारांश (Weightage) कुल स्कोर का दो-तिहाई होता है, जबकि देश की कुल आबादी के अल्पपोषण का भारांश एक-तिहाई होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, 'गुप्तोत्तर काल' (Post-Gupta Period) के दौरान प्रचलित भूमि अनुदान प्रणालियों और प्रशासनिक शब्दावली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त और गुप्तोत्तर काल में राजाओं द्वारा ब्राह्मणों, मंदिरों और प्रशासनिक अधिकारियों को जो कर-मुक्त भूमि अनुदान (Agrahara Grants) दिए जाते थे, उनके परिणामस्वरूप स्थानीय स्तर पर एक नए सामंती वर्ग (Feudal Order) का उदय हुआ, जिससे किसानों की स्थिति धीरे-धीरे उप-कृषकों या अर्ध-दासों (Serfs) जैसी होने लगी।
2. इस काल के अभिलेखों में प्रयुक्त 'अग्रहार' (Agrahara) शब्द उस भूमि को इंगित करता था जो केवल बौद्ध विहारों को दान में दी जाती थी, जबकि जैन संस्थाओं को दिए जाने वाले भूमि अनुदानों को 'देवदान' कहा जाता था।
3. भूमि अनुदान दस्तावेजों में उल्लिखित 'विष्टि' (Vishti) का तात्पर्य जबरन श्रम या बेगार से था, जिसका उपयोग राजाओं और भूमि अनुदान प्राप्तकर्ताओं द्वारा बिना किसी पारिश्रमिक के सार्वजनिक कार्यों या व्यक्तिगत खेतों में काम करवाने के लिए किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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वायुदाब पेटियों के निर्माण का प्रमुख कारण क्या है?
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