BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
18 views

भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित बांड' (Green Bonds) और भारत में उनके नियमन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हरित बांड एक प्रकार का निश्चित आय वाला उपकरण (Fixed-income instrument) है, जिसे विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल और पर्यावरण के प्रति सकारात्मक परियोजनाओं, जैसे कि अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, और संधारणीय जल प्रबंधन के वित्तपोषण के लिए पूंजी जुटाने हेतु जारी किया जाता है।
  2. 2. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 'SEBI (Issue and Listing of Non-Convertible Securities) Regulations, 2021' के अंतर्गत हरित ऋण पत्रों (Green Debt Securities) के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश और प्रकटीकरण मानक निर्धारित किए हैं, जिसके तहत जारीकर्ता को जुटाई गई आय के उपयोग पर स्वतंत्र तृतीय-पक्षीय प्रमाणन (Third-party certification) प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
  3. 3. भारत सरकार द्वारा संप्रभु हरित बांड (Sovereign Green Bonds) फ्रेमवर्क के तहत जारी किए गए बांडों से प्राप्त होने वाली आय को देश के समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग केंद्र सरकार के सामान्य राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए किसी भी सरकारी उद्देश्य हेतु किया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: हरित बांड पारंपरिक बांडों की तरह ही होते हैं, लेकिन इनसे प्राप्त होने वाली धनराशि का उपयोग विशेष रूप से पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं (जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण, हरित भवन आदि) के लिए ही किया जाता है। कथन 2 सही है: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हरित ऋण पत्रों (Green Debt Securities) के जारी करने और उनके विनिमय के लिए कड़े नियम बनाए हैं। इसके तहत जारीकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना होता है कि जुटाई गई राशि का उपयोग निर्धारित हरित परियोजनाओं में ही हो, और इसके लिए तृतीय-पक्षीय (Third-party) समीक्षा या प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। कथन 3 गलत है: संप्रभु हरित बांड (Sovereign Green Bonds) फ्रेमवर्क के तहत जुटाई गई राशि को 'समेकित निधि' में जमा तो किया जाता है, लेकिन इसके उपयोग पर विशेष प्रतिबंध होता है। इस निधि का उपयोग केवल पात्र हरित परियोजनाओं (Eligible Green Projects) के वित्तपोषण या पुनर्वित्तपोषण के लिए ही किया जा सकता है, और इसे सामान्य राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए किसी भी मनमाने सरकारी उद्देश्य हेतु खर्च नहीं किया जा सकता है। अतः कथन 3 असत्य है।
Share:

Related Questions

→ ब्रंटलैंड रिपोर्ट का आधिकारिक शीर्षक क्या था? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा तय किए जाते हैं, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया और उसके अधिकार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान ही होते हैं। 2. निर्वाचन आयोग के अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से किसी भी समय हटाया जा सकता है, क्योंकि संविधान उन्हें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के समान विधिक सुरक्षा या महाभियोग जैसी प्रक्रिया प्रदान नहीं करता है। 3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 123 के अंतर्गत 'भ्रष्ट आचरण' (Corrupt Practices) की परिभाषा में केवल जाति, नस्ल, समुदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगना ही शामिल है, और यदि कोई उम्मीदवार अपने प्रतिद्वंद्वी के निजी जीवन या उसके व्यक्तिगत चरित्र से जुड़े पहलुओं पर बयान देता है, तो वह इस धारा के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं आता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → सुरेंद्रनाथ बनर्जी किस समाचार पत्र के संपादक थे? → द्वितीय बौद्ध संगीति किस स्थान पर संपन्न हुई थी? → भारतीय कला और वास्तुकला के इतिहास के संदर्भ में, बौद्ध स्तूपों (Buddhist Stupas) की वास्तुकला, उनके विभिन्न अंगों तथा उनके प्रतीकात्मक और धार्मिक महत्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्तूप की वास्तुकला में प्रयुक्त 'हरमिका' (Harmika) स्तूप के शीर्ष पर स्थित एक चौकोर रेलिंग जैसी संरचना होती है, जो उस पवित्र स्थान का प्रतीक है जहाँ देवताओं का निवास माना जाता है या जहाँ बुद्ध के अवशेषों की सर्वोच्च पवित्रता सुरक्षित है। 2. 'मेधि' (Medhi) एक वृत्ताकार या चौकोर ऊँचा चबूतरा होता है जिस पर स्तूप का मुख्य अर्धगोलाकार अंड (Anda) निर्मित होता है, और इसका उपयोग बौद्ध भिक्षुओं द्वारा स्तूप के चारों ओर पवित्र परिक्रमा (Pradakshina) करने के लिए एक ऊपरी पथ के रूप में किया जाता है। 3. सांची और भरहुत के प्रारंभिक शुंग-सातवाहन कालीन स्तूपों में पाए जाने वाले 'तोरण' (Toranas) और पत्थर की रेलिंग (Vedika) मूल रूप से लकड़ी की बढ़ईगीरी (Woodcraft and carpentry techniques) की नकल पर आधारित हैं, जो प्राचीन भारत में पत्थर के काम से पहले लकड़ी की वास्तुकला की गहरी परंपरा को दर्शाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.