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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत प्रदत्त 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14 से 18) और विशेष रूप से 'उपाधियों का अंत' (अनुच्छेद 18) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 18(1) राज्य को यह निर्देश देता है कि वह सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अलावा किसी अन्य प्रकार की कोई उपाधि (Title) प्रदान नहीं करेगा, तथा यह प्रतिबंध केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होता है, विदेशी नागरिकों पर नहीं।
- 2. अनुच्छेद 18(2) के अनुसार, भारत का कोई भी नागरिक किसी भी विदेशी राज्य से बिना राष्ट्रपति की पूर्व सहमति के कोई भी उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है।
- 3. उच्चतम न्यायालय ने 'बालाजी राघवन बनाम भारत संघ' (1996) के ऐतिहासिक निर्णय में यह स्पष्ट किया कि 'भारत रत्न', 'पद्म विभूषण', 'पद्म भूषण' और 'पद्म श्री' जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार अनुच्छेद 18 के अर्थ के अंतर्गत 'उपाधियाँ' (Titles) नहीं हैं, इसलिए इनका प्रयोग प्राप्तकर्ता द्वारा अपने नाम के आगे या पीछे प्रत्यय (Suffix) या उपसर्ग (Prefix) के रूप में किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: अनुच्छेद 18(1) के तहत राज्य सेना या विद्या (शैक्षणिक) संबंधी सम्मान के अलावा कोई उपाधि प्रदान नहीं कर सकता। यह प्रतिबंध न केवल भारतीय नागरिकों पर बल्कि उन विदेशी नागरिकों पर भी लागू होता है जो भारत में किसी लाभ या विश्वास के पद पर आसीन हैं और वे किसी विदेशी राज्य से बिना राष्ट्रपति की सहमति के उपाधि स्वीकार नहीं कर सकते।
कथन 2 सही है: संविधान का अनुच्छेद 18(2) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि भारत का कोई भी नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा।
कथन 3 गलत है: 'बालाजी राघवन बनाम भारत संघ' (1996) मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि 'भारत रत्न', 'पद्म विभूषण', 'पद्म भूषण' और 'पद्म श्री' जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार अनुच्छेद 18 के अर्थ में 'उपाधियाँ' (Titles) नहीं हैं क्योंकि ये योग्यता और लोक सेवा को मान्यता देते हैं; हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्राप्तकर्ता इन पुरस्कारों का उपयोग अपने नाम के आगे या पीछे उपसर्ग या प्रत्यय के रूप में (जैसे 'पद्म श्री विजेता X') नहीं कर सकते हैं। यदि वे ऐसा करते हैं, तो वे पुरस्कार को त्यागने के लिए बाध्य हो सकते हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' के अंतर्गत 'राजभाषा' (Official Language - अनुच्छेद 343 से 351) तथा उससे संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जाने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप (1, 2, 3...) होगा।
2. संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ अनिवार्य रूप से हिंदी भाषा में ही की जानी चाहिए, और किसी भी न्यायालय में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करने की संवैधानिक अनुमति केवल राज्यपाल की पूर्व अनुमति से ही दी जा सकती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 351 के तहत यह संघ का कर्तव्य बताया गया है कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके विकास के लिए संस्कृत भाषा से शब्द ग्रहण करने को प्राथमिकता दे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124' के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय' (Supreme Court) की स्थापना, न्यायाधीशों की नियुक्ति और उनकी स्वतंत्रता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए 'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) का मूल प्रावधान सीधे तौर पर संविधान के मूल पाठ में अनुच्छेद 124 के अंतर्गत उल्लिखित था, जिसे बाद में न्यायिक फैसलों के माध्यम से संशोधित किया गया।
2. उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों द्वारा समर्थित ऐसा समावेदन प्रस्तुत किए जाने पर ही हटाया जा सकता है, जो 'कदाचार' (Misbehaviour) या 'असमर्थता' (Incapacity) के आधार पर विशेष बहुमत द्वारा पारित किया गया हो।
3. उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को भारत के किसी भी न्यायालय या प्राधिकरण (Authority) के समक्ष वकालत करने या अपनी प्रैक्टिस जारी रखने पर पूर्ण संवैधानिक प्रतिबंध (Total Constitutional Ban) है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill - Article 110) तथा उसके विधायी प्रक्रियागत पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार, किसी विधेयक को धन विधेयक तभी माना जाएगा जब उसमें केवल और केवल कराधान, भारत की संचित निधि से धन का विनियोजन, या उससे संबंधित सभी या किन्हीं आकस्मिक विषयों के प्रावधान शामिल हों, और यदि किसी विधेयक में धन संबंधी प्रावधानों के साथ-साथ अन्य सामान्य विधायी मामले भी जुड़े हैं, तो उसे किसी भी परिस्थिति में धन विधेयक के रूप में प्रमाणित नहीं किया जा सकता है।
2. लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) का यह प्रमाण पत्र कि कोई विधेयक एक धन विधेयक है, अंतिम होता है और इस प्रश्न पर किसी भी न्यायालय में, या संसद के किसी भी सदन में (लोकसभा को छोड़कर), अथवा राष्ट्रपति द्वारा आपत्ति नहीं की जा सकती है।
3. राज्यसभा को धन विधेयक के संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियाँ प्राप्त हैं; वह न तो इसे अस्वीकार कर सकती है और न ही इसमें संशोधन कर सकती है, बल्कि उसे केवल अपनी सिफारिशें देनी होती हैं जिन्हें मानने के लिए लोकसभा बाध्य नहीं है, तथा यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर विधेयक को वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' (आपात उपबंध - अनुच्छेद 352 से 360) तथा 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग पर तब की जा सकती है जब युद्ध, बाह्य आक्रमण या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के कारण भारत या उसके राज्यक्षेत्र की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो, और मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदला गया था।
2. मंत्रिमंडल (Cabinet) की लिखित संस्तुति प्राप्त होने के पश्चात ही राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं, और इस प्रकार उद्घोषित राष्ट्रीय आपातकाल को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से एक मास के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के प्रभावस्वरूप संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, और इसके साथ ही अनुच्छेद 20 तथा अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को भी राष्ट्रपति द्वारा एक आदेश के माध्यम से आपातकाल के दौरान निलंबित किया जा सकता है।
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भारतीय संविधान के भाग IX और IX-A के अंतर्गत पंचायती राज और नगरपालिकाओं (स्थानीय स्वशासन) के प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-G और 243-W के अनुसार, राज्य के विधानमंडल को यह शक्ति दी गई है कि वे विधि द्वारा पंचायतों और नगरपालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी सौंप सकते हैं, जिसमें ग्यारहवीं और बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषय शामिल हैं।
2. 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियमों के माध्यम से स्थानीय निकायों के चुनावों को नियमित और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रत्येक राज्य में एक 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसके राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति और सेवा शर्तें राज्यपाल द्वारा निर्धारित की जाती हैं और उन्हें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान ही उनके पद से हटाया जा सकता है।
3. पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने के लिए प्रत्येक पांच वर्ष की समाप्ति पर राज्यपाल द्वारा एक 'राज्य वित्त आयोग' (State Finance Commission) के गठन का संवैधानिक प्रावधान है, जो राज्य और स्थानीय निकायों के बीच करों, शुल्कों और टोल के वितरण के संबंध में राज्यपाल को अपनी संस्तुतियां सौंपता है, जिन्हें राज्यपाल द्वारा राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखा जाना अनिवार्य होता है।
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