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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG - अनुच्छेद 148 से 151) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सीएजी (CAG) की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनके हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र (Warrant) द्वारा की जाती है, तथा उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही प्रक्रिया और आधारों पर ही उनके पद से हटाया जा सकता है, अन्यथा नहीं।
- 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का पद धारण करने वाला व्यक्ति अपनी सेवानिवृत्ति या कार्यकाल की समाप्ति के बाद भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद को ग्रहण करने के लिए पूर्णतः पात्र होता है, क्योंकि संविधान इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता है।
- 3. भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) के साथ-साथ प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (जहाँ विधानसभा है) की संचित निधि से होने वाले सभी खर्चों के लेखा-परीक्षण (Audit) की शक्ति सीएजी के पास है, तथा वे अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति और राज्यपालों के माध्यम से क्रमशः संसद और राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार, सीएजी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया और आधार वही हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के होते हैं (अर्थात संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित समावेदन के आधार पर साबित कदाचार या असमर्थता)।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 148(4) के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, सीएजी अपने पद से सेवानिवृत्ति या कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य पद को ग्रहण करने के लिए अपात्र (Ineligible) होते हैं। यह प्रतिबंध उनके पद की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए लगाया गया है।
कथन 3 गलत है: सीएजी केवल केंद्र और राज्यों की संचित निधि, आकस्मिक निधि और लोक लेखा के खर्चों का लेखा-परीक्षण करते हैं, लेकिन दिल्ली और पुडुचेरी को छोड़कर अन्य केंद्र शासित प्रदेशों (जहाँ विधानसभाएँ हैं) के लेखा-परीक्षण का प्रत्यक्ष क्षेत्राधिकार सीएजी के पास नहीं होता है, बल्कि कुछ मामलों में उपराज्यपाल या प्रशासक द्वारा लेखा-परीक्षण कराया जाता है (यानी 'केंद्र शासित प्रदेश' वाला सामान्य कथन तकनीकी रूप से सभी यूटी के लिए सही नहीं है)। इसके अतिरिक्त, सीएजी अपनी रिपोर्ट केंद्र के मामलों के लिए राष्ट्रपति को (जो संसद में रखी जाती है) और राज्य के मामलों के लिए राज्यपाल को (जो राज्य विधानमंडल में रखी जाती है) सौंपते हैं।
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक बुनियादी आय' (Universal Basic Income - UBI) और भारत में इसके संभावित कार्यान्वयन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वभौमिक बुनियादी आय (UBI) की अवधारणा के मूल में यह मान्यता होती है कि देश के सभी नागरिकों को बिना किसी पूर्व शर्त के एक निश्चित अंतराल पर नियमित रूप से नकद हस्तांतरण (Cash Transfer) के रूप में एक न्यूनतम आय की गारंटी दी जानी चाहिए, जिससे काम करने की उनकी इच्छा और उत्पादकता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
2. भारत के संदर्भ में, आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) में UBI का समर्थन करते हुए यह सुझाव दिया गया था कि यदि इसे पूर्ण रूप से लागू किया जाए तो लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसी सभी मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं को बिना किसी अपवाद के तत्काल समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि UBI उनका एकमात्र और पूर्ण विकल्प है।
3. UBI के समर्थकों का तर्क है कि यह पारंपरिक कल्याणकारी योजनाओं की तुलना में प्रशासनिक अक्षमताओं और रिसाव (Leakages) को काफी हद तक कम करता है, क्योंकि यह प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) वास्तुकला और जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी का उपयोग करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मौलिक अधिकार) के अंतर्गत 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) और 'मूलभूत संरचना सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) के विकास के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 13 में न्यायिक समीक्षा की स्पष्ट संवैधानिक नींव प्रदान की गई है, जिसके अनुसार राज्य ऐसा कोई कानून नहीं बनाएगा जो भाग III द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों को छीनता है या न्यून करता है, और इस प्रकार का कोई भी कानून उल्लंघन की मात्रा तक शून्य (Void) होगा।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती वाद (1973) में पहली बार 'संविधान की मूलभूत संरचना' के सिद्धांत को प्रतिपादित किया था, जिसके अनुसार संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है, बशर्ते वह मूलभूत संरचना का उल्लंघन न करे।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित 'मूलभूत संरचना' की सूची में न्यायिक समीक्षा की स्वतंत्रता, संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्रात्मक और गणराज्य रूप, तथा संघवाद जैसे तत्व शामिल हैं, किंतु 'संसदीय संप्रभुता' (Parliamentary Sovereignty) को इस मूलभूत संरचना का अनिवार्य हिस्सा नहीं माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) और उनके जलवायु तथा पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराएँ पृथ्वी की सतह पर ऊष्मा के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिसके तहत विषुवत वृत्त (Equator) से उष्ण जल को ध्रुवों की ओर और ध्रुवों से ठंडे जल को विषुवतीय क्षेत्रों की ओर प्रवाहित किया जाता है, और इस प्रक्रिया में पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होने वाला कोरियोलिस बल (Coriolis Force) उत्तरी गोलार्ध में धाराओं को दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है।
2. उत्तरी अटलांटिक प्रवाह (North Atlantic Drift) के प्रभाव से पश्चिमी यूरोप के उत्तरी तटों के बंदरगाह उच्च अक्षांशों पर स्थित होने के बावजूद वर्षभर जमे नहीं रहते और खुले रहते हैं, जबकि इसके विपरीत दक्षिणी गोलार्ध में पेरू (हम्बोल्ट) धारा के प्रभाव से दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर शुष्क परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जो अटाकामा मरुस्थल के निर्माण में सहायक हैं।
3. एल निनो (El Nino) घटना के दौरान प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग (ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के पास) में वायुमंडलीय दाब में वृद्धि और पूर्वी भाग (पेरू के तट के पास) में दाब में कमी आती है, जिससे गर्म जल का प्रवाह दक्षिण अमेरिका के तट की ओर होने लगता है, जो भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य वर्षा को अत्यधिक मजबूत करता है और बाढ़ जैसी स्थितियाँ उत्पन्न करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' के अंतर्गत 'पंचायतों' (Panchayats) और 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-G के तहत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के संबंध में कार्यक्रम लागू करने की शक्ति और उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं, जिन्हें लागू करना राज्य विधानमंडलों के लिए संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।
2. 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायतों में महिलाओं के लिए सभी स्तरों पर सीटों के आरक्षण (कम-से-कम एक-तिहाई) का प्रावधान किया गया है, और यह आरक्षण केवल निर्वाचित सीटों की कुल संख्या तक सीमित न होकर, पंचायतों के अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर भी सभी स्तरों पर लागू होता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 243-I के अनुसार प्रत्येक राज्य के राज्यपाल को प्रत्येक पांच वर्ष की समाप्ति पर एक 'वित्त आयोग' (Finance Commission) गठित करने का अधिकार है, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और राज्य की संचित निधि से पंचायतों को राजस्व के वितरण के संबंध में राज्यपाल को संस्तुति करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के पहले Air-Filled Rubber Dams का निर्माण किस राज्य में किया जा रहा है?
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